370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 285 व 286 // अर्चना राय

प्रविष्टि क्रमांक - 285


अर्चना राय
***********
क्वॉलिटी टाइम

अरसे बाद दोनों घर में अकेले थे। मौसम भी सुहाना हो रहा था। घने बादल, ठंडी हवा के साथ रिमझिम बारिश की फुहारें कुछ अलग ही समां बांध रही थी। पति हमेशा की तरह कमरे में आफिस की फाइलों में व्यस्त थे।
" यह लीजिए, चाय के साथ आपके पसंद के प्याज के पकोड़े"- पत्नी ने पकौड़ा उनके मुँह में डाल कर,  मुस्कुराते हुए कहा।
कितने समय बाद आज वे पत्नी को भर नजर देख रहे थे। अचानक उनके मशीनी शरीर में इंसानी स्पंदन महसूस होने लगा। आज पत्नी कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी या वे ही थोड़ा रूहानी हो रहे थे, कहना मुश्किल था।
" तुम भी तो मेरे पास आकर बैठो"- पत्नी का हाथ प्यार से पकड़ते हुए कहा।
" अरे आप खाइए, मुझे रसोई में काम है "-पत्नी ने बनावटी आवाज में कहा।
" बैठो न, आज हम कितने दिनों बाद, घर में अकेले हैं, वर्ना सारा दिन घर और बच्चों में व्यस्त होती हो"
" आपके पास भी कहां टाइम रहता है, दिन भर आफिस, और घर पर भी फाइलों में ही डूबे रहते हैं"
" क्या करूं ?इस बार मुझे प्रमोशन चाहिए ही है, तीन साल हो गए एड़ी चोटी का जोर लगाते, अब तो मेरे जूनियर भी मुझ से आगे निकल गए हैं"
" चिंता न कीजिए ,इस बार आपको जरूर तरक्की मिलेगी ,मैंने भगवान से प्रार्थना की है"
"अच्छा यह सब छोड़ो, आओ कुछ अपनी बातें करते हैं"- पति ने शरारत से आंखें चमकाते हुए कहा।
ठंडी हवा के झोंके ने आकर सोंधी खुशबू से कमरे को भर दिया।
" हटिए न आप भी" -पत्नी के गाल शर्म से लाल हो गए।
" सुनो न मुझे तुमसे कुछ कहना है"- पति ने प्यार से कहा।
" अरे हां! याद आया मुझे भी आपसे कुछ बताना है"- अचानक से पत्नी के चेहरे का गुलाबी रंग उड़ गया।
"कहो"
बिट्टू के स्कूल से फीस भरने का नोटिस आया है ,पूरे पांच हजार भरने हैं"- पत्नी ने चिंतित होते हुए कहा।
कमरे में फैली खुशबू कुछ कम सी होने लगी। पति के चेहरे पर भी चिंता की लहर दौड़ गई।
" सब इंतजाम हो जाएगा"- अपने आप को संभाल कर पुनः पत्नी को बैठाते हुए बोला।
"और हां, गांव से भी माँ जी का फोन आया है, इस बार फसल खराब हो गई है, तो साल भर का अनाज नहीं भेज पाएंगी, उसका इंतजार हमें ही करना पड़ेगा"
" अच्छा" पति का चेहरा अब तनाव ग्रस्त हो गया।
" कल मकान मालिक भी धमका रहा था ,पिछले महीने, चाचा की बेटी की शादी ने घर का सारा बजट ही बिगाड़ दिया है"- पत्नी अपनी धुन में कहे जा रही थी।
" हां हां देखता हूं "-अचानक से पति ने पत्नी का हाथ छोड़कर, फाइल उठा कर पन्ने पलटने लगा।
" अरे! आप भी तो कुछ कह रहे थे न"- पत्नी ने कुछ सोचते हुए कहा।
ऊं.. हां कल से ऑफिस के डब्बे में दो रोटियां और ज्यादा रख देना, सोचता हूं ओवरटाइम शुरू कर लूं"
अब कमरे से खुशबू पूरी तरह उड़ चुकी थी। और धीरे-धीरे उसका इंसानी शरीर मशीन में तब्दील होने लगा।

*************

प्रविष्टि क्रमांक - 286

अर्चना राय

संगीन जुर्म

जेल में बंद कैदियों के बीच, एक नये कैदी के आने से बड़ी उत्सुकता थी कि,  आखिर ये कौन है? और क्या जुर्म किया है? जिसे लेकर पुलिस, बड़ी सावधानी बरत रही हैं।
चूंकि जिस प्रकार वर्ग व्यवस्था की जडें, समाज में गहरे तक फैली हुई हैं,  तो भला जेल भी इससे अछूता कैसे रह सकता है?इस व्यवस्था के अनुसार हत्या, खूनी कैदियों का उच्च वर्ग,, चोरी, लूटपाट करने वालों का दूसरा वर्ग और छोटे-मोटे अपराधियों का निम्न वर्ग।
उच्च वर्ग के कैदियों के सारे काम, निम्न वर्ग के कैदियों द्वारा करना यहां का अघोषित नियम था।
नए कैदी को सभी देख रहे थे। उच्च वर्ग के कैदी चाहते थे कि वह उनके वर्ग में आए ताकि उनकी शाख और मजबूत हो, इसी तरह निम्न कैदी उसे अपने साथ चाहते थे ताकि कुछ मदद हो सके, वे उसके चेहरे से अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे थे। पर आए हुए नए कैदी ने किसी से मिलने में कोई उत्सुकता न दिखाई और कोने में जाकर बैठ, अपने साथ लाई हुई गीता पढ़ने लगा। तब एक कैदी उसके पास आकर पूछता है "भाई तुम कौन हो? और क्या करते हो? और तुम्हारा जुर्म क्या है?,बताओ ताकि हम तुम्हारा इस जेल में वर्ग तय कर सके"
नए कैदी ने नजरें उठाकर उसे देखा और ठंडी सांस भरते हुए निराश होकर कहा- " मैं एक देशभक्त, ईमानदार बैंक का क्लर्क हूं", मेरा नाम. ...!
" अरे भाई, वह सब बाद में बताना, पहिले तुमने जुर्म क्या किया है? वह बताओ"- बीच में ही कैदी ने टोकते हुए कहा।
" देश का भला करने का"
तब पीछे से सबसे बुजुर्ग कैदी ने कहा- "भाई तेरा जुर्म तो बहुत बड़ा है, तेरे लायक तो यहां कोई वर्ग ही नहीं बना है"

--

अर्चना राय
आदर्श होटल, पंचवटी
भेड़ाघाट,जबलपुर (म 0 प्र 0) 483053
*Email* -archana.rai 1977@gmail.com

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 5704693284324876558

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव