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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 348 // "कुछ तो लोग कहेंगे" // नीलम स्वर्णकार

प्रविष्टि क्रमांक - 348

नीलम स्वर्णकार

"कुछ तो लोग कहेंगे"

ठण्डे पानी के साथ एक कड़वी-सी टेबलेट निगल कर सविता जी सोफे पर अधलेटी-सी बैठ गयीं।

सर दर्द, पैरों में दर्द और थकान से निढाल होकर अपना माथा हाथों से दबाते हुए हुए उन्हें वे दिन याद आ रहे थे जब 28 साल पहले उनकी उनकी बेटी ने जन्म लिया था।

ओह! वो भी क्या दिन थे..

गर्भावस्था जितनी रोमांचक थी उतनी ही तकलीफदेह भी। पूरे 9 महीने तक उल्टियां होती रही थीं। बहुत परेशान किया था इस शैतान रुचिरा ने.. सोचते हुए वे मुस्करा उठीं।

..और अपने फूले हुए पेट पर स्नेह से हाथ फेरते हुए कहा.. "और तुम भी कम शैतान नहीं हो..आखिर हो तो रुचिरा की संतान ही न.."

तभी दरवाजे से आती रुचिरा दिखाई दी, सामान से लदी हुई। सामान रखकर सीधा माँ के पास आयी और उनके पेट पर अपनी हथेली रखते हुए बोली.. " कैसा है बेबी?

फिर कुछ उदास स्वर में बोली- " पता है माँ आज मार्केट में फिर किसी ने पीछे से बोला.. यही है वो लड़की जो अपनी माँ से अपना बच्चा पैदा करवा रही है, और इसकी माँ को भी इस उम्र में सरोगेट मदर बनने का शौक चढ़ा है"

सविता जी गहरी साँस लेते हुए बोलीं- उन्हें बोलने दे रूचि, क्या फर्क पड़ता है, मेरे लिए तेरी ख़ुशी से बढ़कर कुछ भी नहीं.., तू प्रेग्नेंट नहीं हो सकती तो क्या हुआ ..मैं स्वस्थ हूँ, बच्चे को जन्म दे सकती हूँ तो क्यों न मैं अपनी बेटी की गोद खुशियों से भर दूँ। लोगों को बोलने दे जो बोलना है।

टेंशन मत लिया कर।

अच्छा सुन.. जरा एक कप लेमन टी बना ला.. सर बड़ा दुख रहा है सुबह से..। इन सबकी बातों की परवाह मत किया कर। तू तो मेरा पोता या पोती जो भी होगा इसके स्वागत की तैयारियां कर..।

कहते हुए सविता जी खिलखिला कर हँस पड़ीं।

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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 6583515151934997451

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  1. साहस भरा निर्णय लिया...👌👍

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  2. Shraddha verma6:02 pm

    नए समाज की रचना के लिए लालायित कहानी। संदर्भों में बेहद सटीक। खूबसूरत ।

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  3. मैंने आजतक बहुत सारी कहानियां पढ़ी लेकिन इस छोटी सी लघुकथा ने जाने कितनी सारी पहेलियों को सुलझा दिया हैं। नीलम बेहद शुक्रिया आपका इस तरह की नई और ज़रूरी सोच को आपने बेहद ही सरल तरीके से सामने रखा है। रूढ़िवादी सोच पर करारा जवाब है ये कथा,माँ के प्यार का अनकहा अहसास है कथा,समाज के लिए नया आईना हैं ये कथा। बेहद बधाई आपको ❣️

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  4. बेनामी8:58 am

    शुक्रिया!

    उत्तर देंहटाएं

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