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समीक्षा - सम्राट मिहिर भोज एवं उनका युग

पुस्तक समीक्षा १.  पुस्तक का नाम :-सम्राट मिहिर भोज एवं उनका युग २.  लेखक :- विजय नाहर ३.  प्रकाशक का नाम, प्रकाशन स्थल  :- पिंकसिटी प्रकाशन...

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नेमीचंद मावरी ' निमय' की कविताएँ

                                                      नेमीचंद मावरी ' निमय'                                                         ...

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व्यंग्य ---- तू मैके मत जइयो ..... विजय शंकर विकुज

             क्यूं भाइयों, आपलोगों की पत्नी बीच-बीच में मायके जाती है या नहीं ? मेरी तो जाती है। जाहिर है कि आप सभी की भी जाती होगी। वैसे सच...

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मेरे जूड़े के सितारों पे न जा, लाख काँटे हैं मेरे दामन में। - तेजपाल सिंह ‘तेज’ की दस ग़ज़लें

-एक- गए सावन की कहानी लेकर, टीस सीने में पुरानी लेकर।   मारा फिरता है कोई सहरा में, ज़िन्दा होने की निशानी लेकर।   ख़ूब जीता है बुढ़ापा जीभर, क...

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कहानी - श्यामला - अविनाश झा

श्यामला ने आज फिर मां को काफी खरी खोटी सुनाई थी। मां ने सिर्फ इतना ही तो पूछा था! "बेटी जुग जमाना सही नहीं है। यूं देर रात तक बाहर रहना...

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नया प्रपंच - ज्ञानदेव मुकेश की लघुकथाएं

नया प्रपंच नेताजी अपने दलबल के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दौरे पर निकले हुए थे। एक जगह सड़क बेहद ऊबड़-खाबड़ थी। उनकी गाड़ी हिचकोले खाने लग...

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अनुपमा ठाकुर की कविताएँ

1.अभिनंदन जिसके नाम में ही विजय परिलक्षित है साहस का जो पर्यायवाची है विश्वास था हमें वह पराक्रमी वीर जीत कर ही लौटेगा दिलेर जांबाज़ के लिए ...

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'सॉफ्ट स्किल्स' में शानदार कॅरियर की सम्भावनाएँ - डॉ. चन्द्रकुमार जैन

गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है - सीय-राम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी या सब देखहिं प्रभुमय जगत केहि सन करहिं विरोध। जब तक आप इस...

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नवजागरण के अग्रदूत मौलाना अल्ताफ हुसैन 'हाली' - खान मनजीत भावडिया मजीद

‌हरियाणा के ऐतिहासिक शहर पानीपत के रहने वाले थे हाली उर्दू के शायर व प्रथम आलोचक के तौर पर प्रख्यात थे 'हाली' साहब का जन्म 11 नवम्बर...

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नया प्रपंच - ज्ञानदेव मुकेश की लघुकथाएँ

नया प्रपंच नेताजी अपने दलबल के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दौरे पर निकले हुए थे। एक जगह सड़क बेहद ऊबड़-खाबड़ थी। उनकी गाड़ी हिचकोले खाने लग...

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कहानी - माँ का रूप - मंजुला

मधु नौलखा हार हाथों में लिए सोच रही थी कि जो इतने सालों से सासूमाँ का रूप देखा वो सच है या जो पिछले दिनों देखा वो सच है या फिर उसे ही समझने ...

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हरिवंश प्रभात के गीत

(1.) हम तुम  जब  मिलते  हैं हम तुम जब मिलते हैं जी भर बातें कर लेते हैं                                                   उन बातों की डोर...

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गुड़ी पड़वा-नवसंवत्सर-नववर्ष-वर्ष प्रतिपदा - मानसश्री डॉ.नरेन्द्रकुमार मेहता - मानस शिरोमणि एवं विद्यावाचस्पति

गुड़ी पड़वा या नववर्ष क्या है? चैत्र मास की  शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या नववर्ष का आरम्भ माना गया है। ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है विजय पत...

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कहानी - “ख़िलक़त का, क्या भरोसा...?” लेखक दिनेश चन्द्र पुरोहित

“ ख़िलक़त का, क्या भरोसा...? ” लेखक दिनेश चन्द्र पुरोहित गाँव बुछेटी से क़रीब आधा फलांग दूर, वानरा की ढाणी है। कई सालों पहले, वहां नेक-दिल ठाक...

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