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जीवन-मृत्यु : हरीश कुमार ‘अमित’ की लघुकथाएँ

harísh kumār 'amit'


टाइम

आज द़फ्तर पहुँचने में बहुत देरी हो गई थी. ब्रीफकेस उठाए अपने कमरे की ओर जाते हुए मना रहा था कि कोई अधीनस्थ नज़र न आ जाए. कोई अधीनस्थ अगर अपने अफ़सर को देर से द़फ्तर में आता देख ले तो फिर अफ़सर की अफ़सरी की कड़क कमज़ोर पड़ जाती है न. जल्दी-जल्दी कमरे का सीक्रेट लॉक खोलकर धड़कते दिल से कमरे के अन्दर चला गया.

एकाध मिनट के बाद मुँह-हाथ धोने के लिए कमरे से बाहर निकला, तो देखा मेरा एक अधीनस्थ अपना बैग उठाए जल्दी-जल्दी अपने सेक्‍शन की ओर जा रहा था. उसे देखते ही अफ़सराना लहज़ेवाली रौबभरी आवाज़ में मैंने उससे कहा, ‘‘इतना लेट क्यों हो, टाइम से आया करो!’’

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जीवन-मृत्यु

टी.वी. पर ख़बर आ रही थी - अप्रैल के महीने में बेमौसम हो रही बारिशों से बहुत सारी फसलें तबाह हो गई हैं. इस वजह से कुछ किसानों ने आत्महत्या भी कर ली है.

मगर यह ख़बर सुनकर मुझे जीवनदान मिलता दीख रहा था, पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भयंकर गर्मी में सिर्फ पंखे के सहारे जीना मुश्‍किल हो गया था. हमारे इकलौते ए.सी. में इतनी ख़राबी आ गई थी कि उसके बदले नया ए.सी. ही ख़रीदना ज़रूरी बन गया था. मगर इस बारिश के कारण मौसम काफ़ी ठण्डा हो गया था. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कई दिनों तक ज़ोरदार बारिशें होने और मौसम ठण्डा रहने की सम्भावना थी. ए.सी. ख़रीदने का काम अगले महीने द़फ्तर से लोन मिल जाने तक आराम से टाला जा सकता था.

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ख़ुशी बनाम ख़ुशी

मोबाइल फोन पर यह सूचना मिलते ही कि नाटक प्रतियोगिता में मेरे नाटक के आलेख को प्रथम पुरस्कार मिला है, मैं ख़ुशी से उछल पड़ा. फिर झट-से दूसरे कमरे की तरफ़ लपका जहाँ माँ और सुधा (मेरी पत्नी) बैठे थे. उस कमरे में पहुँचते ही मैंने ख़ुशी से चहकते हुए कहा, ‘‘प्रथम पुरस्कार मिला है मेरे नाटक को!’’

सुनते ही माँ ने ख़ुशी से भरी आवाज़ में कहा, ‘‘वाह बेटे, जुग-जुग जिओ, पहला इनाम मिलना तो बहुत ही बड़ी बात है.’’

‘‘कितने पैसे मिलेंगे?’’ ख़ुशी सुधा की आवाज़ में भी थी.

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उपलब्धि

‘‘लो जी मुँह मीठा करो! मेरी किताब पर अकादमी ने पुरस्कार दिया है!’’ बहन के घर पहुँच मिठाई का डिब्बा जीजाजी के आगे करते हुए मैंने बड़ी शान से कहा.

‘‘मैंने सोचा पिंकी का रिश्‍ता आखिरकार तय हो गया है कहीं और इसलिए मिठाई लेकर आए हो.’’ जीजा जी के मुँह से यह सुनते ही मेरा सारा जोश ठण्डा पड़ गया और मेरी आँखों के सामने अपनी पैंतीस वर्षीया बेटी का चेहरा घूम गया, जिसकी शादी तय करने की कोशिशें मैं पिछले दस सालों से कर रहा था.

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संक्षिप्त परिचय

नाम - हरीश कुमार ‘अमित’

जन्म मार्च, 1958 को दिल्ली में

शिक्षा बी.कॉम.; एम.ए.(हिन्दी); पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.

प्रकाशन 800 से अधिक रचनाएँ (कहानियाँ, कविताएँ/ग़ज़लें, व्यंग्य, लघुकथाएँ, बाल कहानियाँ/कविताएँ आदि) विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित .

एक कविता संग्रह ‘अहसासों की परछाइयाँ’, एक कहानी संग्रह ‘खौलते पानी का भंवर’, एक ग़ज़ल संग्रह ‘ज़ख़्म दिल के’, एक लघुकथा संग्रह ‘ज़िंदगी ज़िंदगी’, एक बाल कथा संग्रह ‘ईमानदारी का स्वाद’, एक विज्ञान उपन्यास ‘दिल्ली से प्लूटो’ तथा तीन बाल कविता संग्रह ‘गुब्बारे जी’, ‘चाबी वाला बन्दर’ व ‘मम्मी-पापा की लड़ाई’ प्र‍काशित .

एक कहानी संकलन, एक लघुकथा संकलन, चार बाल कथा व दस बाल कविता संकलनों में रचनाएँ संकलित.

प्रसारण लगभग 200 रचनाओं का आकाशवाणी से प्रसारण. इनमें स्वयं के लिखे दो नाटक तथा विभिन्न उपन्यासों से रुपान्तरित पाँच नाटक भी शामिल.

पुरस्कार (क) चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट की बाल-साहित्य लेखक प्रतियोगिता 1994,

2001, 2009 व 2016 में कहानियाँ पुरस्कृत.

(ख) ‘जाह्नवी-टी.टी.’ कहानी प्रतियोगिता, 1996 में कहानी पुरस्कृत.

(ग) ‘किरचें’ नाटक पर साहित्य कला परिषद (दिल्ली) का मोहन राकेश सम्मान 1997 में प्राप्त.

(घ) ‘केक’ कहानी पर किताबघर प्रकाशन का आर्य स्मृति साहित्य सम्मान दिसम्बर 2002 में प्राप्त.

(ड.) दिल्ली प्रेस की कहानी प्रतियोगिता 2002 में कहानी पुरस्कृत.

(च) ‘गुब्बारे जी’ बाल कविता संग्रह भारतीय बाल व युवा कल्याण संस्थान, खण्डवा (म.प्र.) द्वारा पुरस्कृत.

(छ) ‘ईमानदारी का स्वाद’ बाल कथा संग्रह की पांडुलिपि पर भारत सरकार का भारतेन्दु हरिश्‍चन्द्र पुरस्कार, 2006 प्राप्त.

(ज) ‘कथादेश’ लघुकथा प्रतियोगिता, 2015 में लघुकथा पुरस्कृत.

(झ) ‘राष्‍ट्रधर्म’ की कहानी-व्यंग्य प्रतियोगिता, 2017 में व्यंग्य पुरस्कृत.

(¥) ‘राष्‍ट्रधर्म’ की कहानी प्रतियोगिता, 2018 में कहानी पुरस्कृत.

(ट) ‘ज़िंदगी ज़िंदगी’लघुकथा संग्रह की पांडुलिपि पर किताबघर प्रकाशन का आर्य स्मृति साहित्य सम्मान, 2018 प्राप्त.

सम्प्रति भारत सरकार में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त .

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पता 304, एम.एस.4 केन्द्रीय विहार, सेक्टर 56, गुरूग्राम-122011 (हरियाणा)


ई-मेल harishkumaramit@yahoo.co.in

लघुकथा 4610328131449938591

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