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भानु झा की ग़ज़लें व शेर

1
सफात उसमें अजीब का है
चराग पर वो गरीब का है ।


पता नहीं कौन गुल खिलाए
कि आज मौसम अजीब का है ।


वो मेरा भी तो रकीब है जो
रकीब मेंरे हबीब का है ।


अहम् नहीं जिसके वो अता है
कि खेल सारा नसीब का है ।


2

कहते कहते वो अटका था
उसको डर जाने किसका था ।


आब की आस सहरे में
आँख से आंसू टपका था ।


हाथ तो सबने फैलाए
एक सा हाल सबका था ।


गोद में एक बच्ची थी
और माथे पे मटका था ।


राह पे फिर न आ पाया
राह से जो वो भटका था ।


3


सीधी राह कोई भी नहीं आता है
अब लोगों का वासीला बदल जाता है ।


दिल के टूटने पे इतना ही कहना है
अपने ही किए की दिल सजा पाता है ।


दावत कोई यहाँ छक के उड़ाता है और
कोई पट्टी शिकम पे बांध सो जाता है ।


जब भी जिन्दगी हद पार कर जाती है
कोई रावण उठा के उसको ले जाता है ।


कोई अपना मुखौटा रंगने के वास्ते
कई चेहरे की लाली को चुरा लाता है ।


5


गो बहुत ही सावधानी बरत रहे हैं हम
फिर भी कोई कहे कहाँ पे गलत रहे हैं हम ।


एक कमरे में सिमट सी गयी है जिन्दगी
आज कल बहुत किफ़ायत बरत रहे हैं हम ।


फूल पत्ती जैसे अहसास  के भी साथ अब
आज किस कदर ये सख्ती बरत रहे हैं हम ।


कोई क्या जवाब भेजे हमारे ख़त का भी
एक बेपता व बेनाम ख़त रहे हैं हम ।


6


बस लकीर पिटते थे निकल गये थे सांप
लाठी भी न टूटती और मार देते सांप ।


वो मदारी की पिटारी में बंद सारे सांप
दांत के बगैर फुफकारते ही रहते सांप ।


एक धीमा जहर होता है यारों रक्स भी
दिल पे मेरे अक्सर लोटते ही रहते सांप ।


जिनको हमने अपने सर आँखों पे बिठाया है
आस्तीन के हमारे वो आज निकले सांप ।


7


नहीं हूँ मैं तमाम में
अलग हूँ मैं निजाम में ।


सभी यहाँ पे नंगे हैं
सियासती हमाम में ।


ए जम्हूर तू होश कर
इन्हें रख तू लगाम में ।


बुरा हाल है मुल्क का
खलल रख तू निजाम में ।


8


जब कभी उम्मीद से वो रही होगी
बेटे की उम्मीद ही सबने की होगी ।


सबकी ताने तोहमत ही सही होगी
जब कभी भी बेटी को वो जनी होगी ।


औरतों के गम का अहसास है उसको
उसको बेटी की फिकर भी रही होगी ।


9

मेरा अपना शानी यहाँ आप होना
किसी और का मुझपे कोई छाप होना ।


उलझते रहे ख़ुद व ख़ुद से यहाँ
यहाँ अपनी पेचीदगी आप होना ।


ख़ुदा भी न जिनको समझ पाया हो
भला हमको क्या उनका कोई नाप होना ।


10

अपने दिल को गर हर कोई फिर से राह पे लाए
फिर तो यार ये दुनिया भी हसीन बन जाए ।


जिस्म को सजाए कोई चेहरा लाख चमकाए
कोई क्या कहे गर ये दिल ही मैला रह जाए ।


हम तो एक ज़माने से उनसे मिल नहीं पाए
ये नहीं कि वो हमको याद भी नहीं आए ।


दोस्त यार से जब भी कोई मिलने को जाए
अपने कोई गिले शिकवे साथ में नहीं लाए ।


एक उम्र हाले दिल का बयां नहीं होता
कोई भी मेरी ढलती उम्र पे नहीं जाए ।


11

ख्याल रिश्ते का है, उनसे कुछ नहीं कह पाता
ये मत समझिए हमे कहना ही नहीं आता ।


बिछड़ने के तो निकलते हैं रोज लाख बहाने
जरा सा मिलने का कोई सबब निकल नहीं पाता ।


मैं मिलने को तो हमेशा मिल आता हूँ उनसे
कशिश ही वो नहीं होती करार ही नहीं आता ।


--

आदमपुर, भागलपुर, बिहार

ग़ज़लें 5117962579145641468

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