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पीड़ा - कविताएँ - विनोद सिल्ला


1.
मानसिक विकास

दोष होता है
या नहीं होता
व्यक्ति विशेष का

गालियों से
नवाजा जाता है
आरोपी के
पूरे समाज को
उसकी पूरी जाति को
उसके धर्म को
उसके घर की
तमाम महिलाओं को
जिनका उक्‍त मामले से
नहीं है कोई सरोकार
कमाल की है मनोस्‍थिति
लोगों की

अपेक्षित है
मानसिक विकास
पूरे समाज का

-विनोद सिल्‍ला©
2.
लगते हो श्राप

तुम
डराते रहे हो
आमजन को
श्राप का
भय दिखाकर
लेकिन मुझे
तुम स्वयं
मानवता के लिए
लगते हो श्राप

-विनोद सिल्‍ला
3.
श्राप

जब-जब
भारत पर
आक्रमण करने
विदेशी आए
जब चीन
भारतीय भू-भाग पर
अतिक्रमण कर रहा था
जब पाकिस्तान
आधे कश्मीर को
अपने अधीन
कर रहा था
जब-जब प्राकृतिक
आपदाएं आई
जब-जब आतंकी
हमले हुए
तब तुम और
तुम्हारा श्राप
कहाँ थे

-विनोद सिल्‍ला
4.
राष्ट्रवादी

उनके संगठन का नाम
है विदेशी भाषा में
उनकी वेशभूषा
वो भी विदेशी
नहीं लगा आज तक
उनकी मुंडेर पर
राष्ट्रध्‍वज
दावा है उनका
राष्‍ट्रवादी होने का

-विनोद सिल्‍ला
5.
बदलना चाहते हैं

वो चाहते हैं
पूरी दुनिया को बदलना
इसी उद्देश्य से
लगाते है शाखाएं
गांव-गांव
शहर-शहर
लेकिन अफसोस
खुद को नहीं
बदलना चाहते

-विनोद सिल्‍ला
6.
पीड़ा

मोहब्बत
दिल को द्रवित
करने वाली
पीड़ा होती है
जिसे न तो
ढंग से कहा जाता
और न ही
ढंग से सुन जाता
मात्र दफन किया जाता है
दिल के तहखाने में

-विनोद सिल्‍ला
7.
प्‍यार

प्‍यार शब्द भले ही
छोटा हो
लेकिन इसका अर्थ
बहुत बड़ा है
बहुत गहरा है
शायद आसमां से बड़ा
शायद समुद्र से गहरा
परन्तु तह तक
जाता कौन है

-विनोद सिल्‍ला
8.
आते हैं चोर

मेरी गली में
आते हैं चोर
चोरों को
भौंकते हैं कुत्ते
आस-पास के लोग
चोरों पर नहीं
कुत्तों पर ही
उठाते हैं उंगली
लगाते हैं आरोप
नींद हराम करने का

-विनोद सिल्‍ला©
9.
तुम्हारा श्राप

आज तक
दंत कथाओं में
सुनते रहे
फलां ने
फलां को
दिया श्राप
फलां ने
भुगता श्राप
लेकिन कभी नहीं लगा
कि तुम्हारे श्राप ने
किया है
भारत का
या फिर
मानवता का
भला

-विनोद सिल्‍ला©
10.
संभव क्यों नहीं

कामना है
न हो कोई सरहद
न हो कोई बाधा
भाषाओं की
विविधताओं की
जाति-पांतियों की
सभी दिलों में बहे
एक-सी सरिता
सबके कानों में गूंजें
एक-से तराने
सबके कदम उठें
और करें तय
बीच के फासले
यह सब
नहीं है असंभव
आदिकाल म में था
ऐसा ही
फिर आज संभव
क्यों नहीं?

-विनोद सिल्‍ला©

--

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

कविता 5764666818892282227

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