---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

गंगा संताप - श्रीप्रकाश सिंह की कविताएँ

साझा करें:

पत्नी का अपने सैनिक पति को पत्र हथेली पर लिख दो न पिया मेंहदी से यह पैगाम भारत माँ सदा रहे सुहागन मेरा सिंदूर उन पर कुर्बान जो काम न आये देश...

पत्नी का अपने सैनिक पति को पत्र

हथेली पर लिख दो न पिया

मेंहदी से यह पैगाम

भारत माँ सदा रहे सुहागन

मेरा सिंदूर उन पर कुर्बान

जो काम न आये देश का

वह सिंदूर बेकार

तेरे नाम के सिंदूर पर पिया

जाऊं कोटि बलिहार

तुम कहते हो- मैं कुछ मांगू

पर बिन मांगे सब कुछ पाऊं

तेरे एक चुटकी सिंदूर से साजन

मेरा सोलहो श्रृंगार

लो, आज तुमसे कुछ मांग रही

देने को तैयार रहो

भारत की बलवेदी पर प्रियतम,

बलि का तुम तलवार बनो !

जो सिंदूर तुझे समर्पित था -

अब है अर्पित भारत के नाम

मांग मेरा उजड़ जाय तो क्या

सदा सुहागन हो भारत मां

इस वर्ष की होली पर

तुझे चार रंग मैं भेज रही

इन रंगों से ही होली खेलना

बस इतनी अरज मैं कर रही

तीन रंग वीरों का है-

श्वेत, हरा और केसरिया

चौथा रंग वीरॉगनाओं का है

जिससे मॉग सजाती नारियां

​​

हरे रंग से होली खेलना

देश के वीर किसानों से

जो दूसरों की भूख मिटाते हैं

और खुद ही भूखे सो जाते हैं

श्वेत रंग से होली खेलना

सत - पथ के अनुगामी से

अमन - चैन के रखवालों से,

देश भक्त स्वाभिमानी से

केसरिया रंग से होली खेलना

परम वीर बलिदानी से

जो सरहद पर शीश चढ़ाने आते

अपनी भरी जवानी में

चौथा रंग सिंदूर का है

लो, इसे कुर्बान कर रही

भारत मां की सेवा में

लो, इसे न्यौछावर कर रही

गर दुश्मन आये एक इंच भी

अपने देश के अंदर

उससे लहू की होली खेलना

उसके सीने को चीरकर

संगीनों की पिचकारी से

उससे सिंदूरी होली खेलना

उसके एक पग के बदले

उसका अंग- अंग कतर देना

दुश्मन के दु:साहस को

शमन- दमन तुम कर देना

अगर गोली लगे सीने में तो

अपने लहू से जय हिंद लिख देना

​​

सरहद पर जान लुटाने का-

अंदाज तुम्हारा देखूंगी?

प्रियतम मेरा कितना ऊंचा

अंबर से मैं यह पूछूंगी

पर एक बात का दुख हमें है

यह कैसी परिभाषा है

अगर शहीद अमर होते हैं तो

उनकी पत्नी कैसे विधवा है ?

मेरी अरज बस इतनी है -

यह परिभाषा अब बदलनी होगी

जो निज पति को करती कुर्बान

उसे चिर सुहागन कहनी होगी

यह खत तुझे मैं भेज रही हूं

तुम सीमा पर डटे रहो,

तुम वहां नव इतिहास रचो

मैं यहां नई परिभाषा लिख रही हूं

-------------------------------------------------------------------------------------------------------

श्रीप्रकाश सिंह ( उपनाम : मनोज कुमार सिंह), सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, मो. न. 9436193458 ( यह कविता दिल्ली से प्रकाशित अभिनव इमरोज पत्रिका में प्रकाशित है)

​​

​​

​​

​​

​​

​​

​​

गंगा संताप

​​

गंगा की लहरें रो- रोकर पुकारे

सदियों से बहती हूं तेरे लिये प्यारे

पाप धोते सूख गयीं-

मेरे अंसुअन की धारें

गंगा की लहरें-------------------------

​​

मैंने तुम्हें पाक किया

तूने पंक मुझमें डाले

ऊपर से और तुमने

बहा दिया मुझमें नाले

अब तो मेरे लाल, कर कुछ विचार रे

गंगा की लहरें--------------------

​​

हाथ जोड़ कहती हूं, सुनो, रे दुलारे

बूढ़ी होकर सूख रही हूं, अब तो बचा रे

जीऊं तो जीऊं कैसे,

किसके सहारे

गंगा की लहरें-------------------------

​​

कई टुकड़े तुमने किये,अपनी मां के मेरे शरीर को

कैसा तू लाल मेरा, नहीं समझे मेरे पीर को

कूड़ा- कचरा, मल, मैला

अब मत बहा रे

गंगा की लहरें------------------------

-----------------------------------------------------

मनोज कुमार सिंह उर्फ श्रीप्रकाश सिंह, सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, एसोसिएट मेम्बर, फिल्म राइटर्स एसोसिएशन, मुम्बई मो. न. 9436193458 (यह कविता साहित्य अमृत पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी है ।)

​​

​​

​​

​​

चलो, चले उस पार प्रिये !

​​

चलो, चले उस पार प्रिये,

क्या रखा इस पार प्रिये !

​​

इधर मुर्दाघर, उधर मधुशाला

इधर लुटेरा, उधर रखवाला

उधर ही जीवन- सार प्रिये,

चलो, चले उस पार प्रिये !

​​

इधर क्षार, उधर क्षीर है

इधर कछार, उधर नीर है

इधर व्यापार, उधर प्यार प्रिये,

चलो, चले उस पार प्रिये !

​​

इधर दैत्य, उधर देव है

इधर प्रेत, उधर श्रेय है

इधर बाजार,उधर घर-द्वार प्रिये,

चलो, चले उस पार प्रिये !

​​

इधर तम घन, उधर स्वर्ण किरन

इधर व्यथा है, उधर मगन मन

उधर ही श्रृंगार प्रिये,

चलो, चले उस पार प्रिये !

​​

प्रीति की पीली पहन चुनरिया

अब मत जोगन बनु रे गुजरिया

अपना घूंघट उघार प्रिये,

चलो, चलें ! उस पार प्रिये !

श्रीप्रकाश सिंह (उपनाम: मनोज कुमार सिंह), स्नातकोत्तर अध्ययन महविद्यालय, उमियाम-793103 शिलॉग,मेघालया, मो. न. 9436193458 ( यह कविता अभिनव इमरोज पत्रिका के अप्रेल, 2019 अंक में प्रकाशित

है ।)

​​

​​

​​

तू नदिया मैं हूं तीर

​​

तू नदिया, मैं हूं तीर

तू है क्षीर, मैं रिक्त नीर

​​

तू कल-कल, मैं क्रंदन हूं

तू रून-झुन, मैं रोदन हूं

तू है प्रीति, मैं हूं पीर

तू नदिया, मैं हूं तीर

​​

तू है मधु, मैं मदिरा

मैं हूं तम घन, तू सबेरा

तू है आत्मा, मैं शरीर

तू नदिया, मैं हूं तीर

​​

मैं हूं आह, तू सुरभित स्वर

मैं भग्न दीप, तू ज्योति प्रखर

तुम हो तकदीर, मैं लकीर

तू नदिया, मैं हूं तीर

​​

तुम सावन की शीतलता

मैं दग्ध मरू की उष्णता

तू है अमीर, मैं फकीर

तू नदिया, मैं हूं तीर

​​

तुम विमला, कमला, निर्मला

मैं धूलधूसरित, मटमैला

तुम हो चंदन, मैं गिरा अबीर

तू नदिया, मैं हूं तीर

श्रीप्रकाश सिंह (उपनाम: मनोज कुमार सिंह), स्नातकोत्तर अध्ययन महविद्यालय, उमियाम-793103, शिलॉग,मेघालया, मो. न. 9436193458 ( यह कविता कविताएं अभिनव इमरोज पत्रिका के अप्रेल, 2019 अंक में प्रकाशित है ।)

​​

​​

​​

​​

कविता

​​

जिसके पास जमीर नहीं है

सचमुच वह अमीर नहीं है

​​

राजा नहीं, वह रंक है भाई

मन से जो फकीर नहीं है

मां से बढ़कर दुनिया में

दूजी कोई जागीर नहीं है

हाथ की रेखायें क्या देखूं

लकीर में तकदीर नहीं है

​​

चित्र तो चित में होता है

दर्पण में तस्वीर नहीं है

​​

आँखों के आँसू- सा पावन

जग में कोई नीर नहीं है

​​

उस दरवाजे की क्या हस्ती है

जिसमें कोई जंजीर नहीं

​​

वो ऊंचाइयॉ कितनी बौनी है

जो ओछी है, गंभीर नहीं

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

श्रीप्रकाश सिंह ( उपनाम : मनोज कुमार सिंह), सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, सलाहकार संपादक, कंचन मेधा, मो. न. 9436193458 ( यह कविता साहित्यिक पत्रिका “ साहित्य अमृत में प्रकाशित हो चुकी है ।)

​​

​​

​​

​​

मैं बुलबुला हूं

​​

तो क्या हुआ ?

मैं बुलबुला हूं !

जबतक जिया

हरदम खिला हूं ।

​​

सागर दहाड़ से

तुम डरो,

मैं तो लहरों से लड़कर

उनकी पलकों पर झुला हूं ।

​​

अस्तित्वहीन नहीं,

अनंत हूं,

विशाल जलराशि का

अंतरंग हूं ।

​​

शील हूं, शर्मीला हूं,

नटखट, गर्वीला हूं,

शबनम और शोला हूं

मैं अलबेला हूं ।

चंद पल के जीवन में

चुनौतियों से खेला हूं

आँधी-तूफानों को भी झेला हूं

मैं बुलबुला हूं ।

-------------------------------------------------------------------------------------------------------------

श्रीप्रकाश सिंह ( उपनाम : मनोज कुमार सिंह), सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, सलाहकार संपादक, कंचन मेधा, मो. न. 9436193458 ( अप्रकाशित कविता )

​​

​​

प्रश्न

कुबेरों की यह बस्ती है,

भूखमरी यहां बहुत सस्ती है ।

हर रात घुंघुरूओं की झंकार

हर सुबह कौन सिसकती है ?

रंग महल की रंगत में,

फांसी की किसकी रस्सी है ?

यह पूछे, किसकी हस्ती है,

यहां मातम, वहां क्यों मस्ती है ?

अपनी डफली, अपना राग,

हर ओर जोर - जबरदस्ती है ।

जीवन के आपाधापी में,

रिश्तों में खुदपरस्ती है ।

जिस मां ने दिया जीवनदान,

हर पल क्यों वह मरती है ?

हाय ! मानवता हुई कंगाल,

बस मुर्दों की ही गश्ती है ।

कैसे करूं मैं दलदल पार,

चारों ओर नरभक्षी हैं ।

किस नौका पर मैं होऊं सवार

टूटी – फूटी हर कश्ती है ।

टूट रहे सांसों के तार

शासन की कैसी वंशी है ।

​​

-------------------------------------------------------------------------------------------------------------

श्रीप्रकाश सिंह ( उपनाम : मनोज कुमार सिंह), सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, सलाहकार संपादक, कंचन मेधा, मो. न. 9436193458, (अप्रकाशित कविता)

)

​​

​​

आओ, चले नजारे देखें !

​​

आओ, चले ! नजारें देखें

धूल फांकते तारे देखें

कौवों की महफिल सजी है

हंस बैठे किनारे देखें

सागर में खींच गई लकीरें

अब अम्बर में दीवारें देखें

सांसों में है धुंआ - धकड़ा

मन में फटी दरारे देखें

सियासत की अजब कहानी

हर पात्रों में तकरारें देखें

आज कितनी कलियां कुचली

आओ, चलें अखबारें देखें

मानवता बिक रही है सस्ती

सजी दुकानें - खरीदारें देखें

आओ, चले नजारे देखें

​​

श्रीप्रकाश सिंह ( उपनाम : मनोज कुमार सिंह), सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, सलाहकार संपादक, कंचन मेधा, मो. न. 9436193458, (यह कविता सृजनलोक प्रकाशन के “समकालीन कविता” संग्रह में प्रकाशित हो चुकी है ।)

​​

​​

​​

​​

​​

​​

गांव की गलियों में रौनक बहुत है

गांव की गलियों में रौनक बहुत है

बाग - बगीचों में मधुरस बहुत है

कभी आकर देखो, ऐ देवराज ईंद्र

खेत- खलिहानों में परियां बहुत हैं

​​

सावन के मौसम में गांवों में आना

धान रोपती देखना कितनी ही रम्भा

घास गढ़ती मेंढ़ों पर मेनका बहुत है

खेत- खलिहानों में परियां बहुत हैं

​​

बाग- बगीचों में जब पड़ जाते झूलें

गली और कूंचों में कजरी जब गूंजे

नाचती रति, झूले अप्सरा बहुत हैं

खेत - खलिहानों में परियां बहुत हैं

​​

आम मोजराये जब महुआ कोचियाये

वसंत अनंग संग पवन रथ पर आये

पीले सरसों में सजती उर्वशियां बहुत हैं

खेत - खलिहानों में परियां बहुत हैं

​​

मादक उमंग ले जब चले पुरवाई

देखना,तुम शाम को छत पर कौन आई

भेजती पतंग- पाती तिलोत्मा बहुत है

खेत - खलिहानों में परियां बहुत हैं

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

मनोज कुमार सिंह उर्फ श्रीप्रकाश सिंह, सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, एसोसिएट मेम्बर, फिल्म राइटर्स एसोसिएशन, मुम्बई मो. न. 9436193458

​​

​​

​​

​​

“आह”

​​

आँखों में आँसू, होंठों पर आह

मुरझा गई है अधखिली कली,

रौंदा, कुचला, मसला उसको

हाय ! बेदर्दी, यह क्या कर दी !

​​

अपने हवस में इतने गिर गये हो,

मानव नहीं, तुम गिद्ध बन गये हो;

लपका, झपटा,नोचा उसको,

शरीर उसका क्षत-विक्षत कर दी !

​​

सांसें उसकी थम रही है,

दिल की धड़कन मंद पड़ रही है;

नाजुक तन लहू से लथ- पथ

अर्ध नग्न वह तड़प रही है |

​​

चीख रही है वह सुकुमारी,

रो रही है दुनिया सारी ;

बिलख रहे हैं उसके खेल- खिलौने,

सिसक रही है उसकी गुड़िया प्यारी |

​​

पर ऐ बेदर्दी, तुम्हें दर्द कहां है,

अपने दुष्कर्मों पर तुझे शर्म कहां है !

गुड़ियों के जो साथ खेलती,

उससे तुम मुंह काला कर ली !

​​

​​

​​

वह एक नन्ही-सी चिड़िया थी,

जो घर- आंगन में फुदक रही थी;

अम्बर में उड़ने की आशा ले,

अपने मन में चहक रही थी |

​​

तितलियों के संग दूर देश

जाने घर से निकली थी,

दो कदम वह अभी चली थी

कि तेरी बुरी नजर पड़ी थी |

​​

ऐ पतित, उसके पथ में

क्यों खेला यह खेल घिनौना ?

मानवता चीत्कार उठी है,

हिमालय ने भी सिर नीचे कर ली |

​​

अपना पतन और कितना करोगे ?

जा ! सोच बैठ, अकेले में,

जो आरती की दीपशिखा- सी थी

उसे बुझाकर तुम पाप न कर दी ?

​​

कितनी बालायें दम तोड़ रही हैं

तेरे क्रूर करतूतों से,

और कितनी बालायें आहत होकर

अभी- अभी खुद्कुशी कर ली !

------------------------------------------------------

​​

मनोज कुमार सिंह उर्फ श्रीप्रकाश सिंह, सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, एसोसिएट मेम्बर, फिल्म राइटर्स एसोसिएशन, मुम्बई मो. न. 9436193458

​​

मैं तन नहीं, अंतर्मन देखता हूं

​​

​​

मैं तन नहीं, अंतर्मन देखता हूं

बूढों के अंदर बचपन देखता हूं

नहीं पढ़ता हूं हर गीत - गजल

मैं शब्दों के अंदर शबनम देखता हू

​​

मैं कीचड़ के अंदर कमल देखता हूं

मैं कॉटों के अंदर सुमन देखता हूं

सिर्फ तारें - सितारें निरखता नही

मैं लपटों के अंदर तड़पन देखता हूं

​​

मैं भावों में सबरी का जूठन देखता हूं

लेखनी के अंदर अल्हड़पन देखता हूं

मैं पिंजड़े का पंछी नहीं यारों,

मैं उड़ने के लिये गगन देखता हूं

​​

मैं विचारों को भावों से अलंकृत करता हूं

मैं व्याकरण नहीं, साहित्य पढ़ता हूं

जिसमें सत्यम, शिवम, सुंदरम नहीं

उसे मैं कभी नहीं साहित्य कहता हूं

मनोज कुमार सिंह उर्फ श्रीप्रकाश सिंह, सलाहकार, राष्ट्रीय मयूर, मासिक पत्रिका, दिल्ली, एसोसिएट मेम्बर, फिल्म राइटर्स एसोसिएशन, मुम्बई मो. न. 9436193458

​​

​​

​​

​​

​​

 

​​--

लेखक परिचय एवं साहित्य के क्षेत्र में योगदान

नाम : श्रीप्रकाश सिंह

उपनाम : मनोज कुमार सिंह

पिता का नाम : स्व. केशव सिंह

माता का नाम : श्रीमती फूलझरी देवी

स्थायी पता : ग्राम- इब्रहिमाबाद, पोस्ट- इब्रहिमाबाद, जिला- बलिया, उत्तर प्रदेश

पत्राचार का पता : कॉलेज ओफ पोस्ट ग्रेजुएट स्ट्डिज

सेंट्रल एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी, उमियाम, बारपानी- 793103, शिलॉग, मेघालय

Email- singhmanojprakash@gmail.com

जन्म तिथि : 15/07/1969

शैक्षणिक योग्यता : एम. ए., बी. एड.

व्यवसाय : सरकारी नौकरी

सदस्यता : Ex-Associate Member, Film Writer Association

प्रकाशित पुस्तक : उपन्यास- मंगलसूत्र

: काव्य- मेरी प्रेयसी

इसके अतिरिक्त “अभिनव इमरोज”, साहित्य अमृत, शब्द प्रवाह साहित्यिक पत्रिकाओं सहित अन्य विभिन्न राष्ट्रीय पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का नियमित प्रका शन ।

साहित्यिक पदभार एवं कार्य :

1-स्नातकोत्तर अध्ययन महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, उमियाम, रि-भोई, मेघालय में गठित हिंदी समिति के सचिव के रूप में हिंदी के प्रचार-प्रसार का कार्य्।

2- सदस्य, सलाहकार मंडल एवं स्तंभकार, मासिक हिंदी पत्रिका “राष्ट्रीय मयूर”,नई दिल्ली ।

3- सलाहकार संपादक- कंचन मेधा, अध्यात्मिक पत्रिका ।

पुरस्कार एवं सम्मान 1- वर्ष 1996 में स्नातकोत्तर महविद्यालय, खलीलाबाद मे आयोजित भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता में क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार.

2-“साहित्य रत्न” 2012 ( समता साहित्य अकादमी, महाराष्ट्र के सौजन्य से डॉ माता प्रसद, पूर्व राज्यपाल, अरूणॉचल प्रदेश के द्वारा 26 मई,2012 को मुम्बई में आयोजित राज्यस्तरीय एवं राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2012 के अंतर्गत प्रदान किया गया)

3- भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2012 का ‘डाँ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फेलोशीप सम्मान 2012.( यह सम्मान भारतीय दलित साहित्य अकदमी, नई दिल्ली के दो दिवसीय 28 वें राष्ट्रीय सम्मेलन दिसम्बर 9 -10,2012 मे प्रदान किया गया)

4- “अखिल भारतीय साहित्य सम्मान 2013” शब्द प्रवाह साहित्य मंच उज्जैन, मध्य प्रदेश द्वारा प्रदान किया गया |

5-माण्डवी प्रकाशन फेसबूक ग्रुप द्वारा 3/3/2013 को आयोजित QATA’AT AUR MUKTAK प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार

6- India+ Nepal Friendship International Award -2013 “ से सम्मानित. यह सम्मान 10 /11/2013 को कठमाण्डु, नेपाल में आयोजित समता साहित्य अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मेलन-2013 मे नेपाल अकैडेमी के चांसलर माननीय तिल विक्रम नियांग द्वारा दिया गया.

7 -पूर्वोत्तर हिंदी एकेडेमी, शिलॉग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन एवं अखिल भारतीय लेखक सम्मान समारोह में “ डॉ. महारज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान- 2014” से सम्मानित |

8- भारतीय वाड्मय पीठ, साहित्यिक संस्था, कोलकता द्वारा “ युगपुरूष स्वामी विवेकानंद पत्रकार- रत्न सारस्वत सम्मान- 2016.

​​

​​

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

---प्रायोजक---

---***---

|कथा-कहानी_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|हास्य-व्यंग्य_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|संस्मरण_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|लोककथा_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=complex$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3964,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2919,कहानी,2204,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,513,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,93,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,338,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,61,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,25,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1184,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1986,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,694,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,757,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: गंगा संताप - श्रीप्रकाश सिंह की कविताएँ
गंगा संताप - श्रीप्रकाश सिंह की कविताएँ
https://1.bp.blogspot.com/-TwM8Od4jsAI/XNEOIcmsRlI/AAAAAAABO8A/P8tPJSHCLDsBI88av_zPrH4h_1GFT4qjACK4BGAYYCw/s320/Photograph%2Bof%2BS.P.%2BSingh-711796.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-TwM8Od4jsAI/XNEOIcmsRlI/AAAAAAABO8A/P8tPJSHCLDsBI88av_zPrH4h_1GFT4qjACK4BGAYYCw/s72-c/Photograph%2Bof%2BS.P.%2BSingh-711796.jpg
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2019/05/blog-post_11.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2019/05/blog-post_11.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ