रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

बालकवि बैरागी की प्रथम पुण्यतिथि पर सुमिरन - तुम्हें हम यूं ना भुला पाएंगे.. मनोज कुमार

साझा करें:

(स्व. श्री बाल कवि बैरागी) बालकवि बैरागी की प्रथम पुण्यतिथि पर सुमिरन तुम्हें हम यूं ना भुला पाएंगे.. मनोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया व...

(स्व. श्री बाल कवि बैरागी)


बालकवि बैरागी की प्रथम पुण्यतिथि पर सुमिरन

तुम्हें हम यूं ना भुला पाएंगे..

मनोज कुमार

वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया विश्लेषक

13 मई की यह तारीख आज भी है और अगले साल भी आएगी. साल-दर-साल तारीख अपने साथ साल बदलकर आएगी लेकिन 2018 की 13 मई को भुला पाना आसान नहीं होगा. यह वह तारीख है जिसने हमसे हमारे बैरागी को छीन लिया. आए थे वे इस दुनिया में बैरागी की तरह और रूखत भी हुए तो बैरागी की तरह. ना कोई शोरगुल और ना दवा-दारू का कोई झंझट. भोजन कर दोपहर में घड़ी आध घड़ी की नींद लेने जो सोए तो फिर चिरनिंद्रा में समा गए. इस बैरागी का होना अपने आपमें एक विश्वास का होना था. सच के साथ जीने की शर्त का नाम बैरागी था. वो जो भीतर से थे, वो बाहर से थे. सबकुछ पारदर्शी था. जीवन भी और जीवन का सच भी. जिस कालखंड में हम गुजर रहे हैं. जी रहे हैं, उस काल में बैरागी का होना अपने आपमें चमत्कार की तरह था. उम्र ढल रही थी लेकिन आवाज की ओज में वही कशिश था जो शायद उनकी जवानी के दिनों में रहा होगा. वे नारियल की मानिंद थे. बाहर से सख्त और भीतर से नरम दिल. वे इस समय के उन गुरुजनों में थे, खलीफाओं के खलीफा थे जो उन्हें भा जाता, वे दिल में बैठ जाते और ऐसे भी कई थे जो उनके दिल के करीब नहीं पहुंचे. मैं याद कर रहा हूं मध्यप्रदेश के उस नगीने की जिसे हम बालकवि बैरागी के नाम से जानते हैं. जो कवि भी थे, साहित्यकार थे, पत्रकार थे और थे खरे राजनेता. थे इसलिए कि आज ही के दिन वे हमसे बिछुड़ गए लेकिन हैं इसलिए कि हम जब उन्हें कहीं उल्लेखित करते हैं तो कहते हैं कि बैरागी ने लिखा है. शरीर नश्वर था, सो वो चला गया लेकिन जो समाज के पास बचा, वह अक्षय है. ऐसे में बैरागीजी से एक शिकायत है कि तुम्हें हम यूं ना भुला पाएंगे..

मेरा और बैरागीजी का रिश्ता अमूमन सात-आठ का रहा है. उनके विशाल व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था. कुछ पढ़ा भी था. पहले कुछ साहित्यकारों से परिचय हुआ और उनके तेवर देखकर मैं खौफजदा था. बैरागीजी को लेकर मन में भी यही भाव था. कई बार कोशिश करने के बाद भी मेरे द्वारा संपादित पत्रकारिता एवं सिनेमा पर केन्द्रित मासिक पत्रिका ‘समागम’ के अंक उन्हें भेजने का साहस जुटा नहीं पाया. यह सोचकर जाने उनकी प्रतिक्रिया क्या हो. आखिरकार हिम्मत जुटाकर एक अंक उन्हें साधारण डाक से भिजवा दिया. यह बात साल 2011-12 के आसपास की होगी. इस अंक में पेडन्यूज को लेकर आलेख प्रकाशित किया गया था जिसमें देश के वरिष्ठ पत्रकार श्री जगदीश उपासने का वह लेख था जिसमें उन्होंने बड़ी बेबाकी से पेडन्यूज के आचरण के बारे में लिखा था. श्री उपासने इंडिया टुडे हिन्दी के वर्षों सम्पादक रहे. और तब मध्यप्रदेश के रायपुर के रहने वाले थे. उनकी माताजी जनसंघ से विधायक निर्वाचित हुई थीं और उनकी एक मुकम्मल राजनीतिक पृष्ठभूमि थी. वे स्वयं राजनीति से दूर रहे लेकिन परिवार में उनके भाई राजनीति में सक्रिय रहे. उन्हीं के चुनाव के दरम्यान पेडन्यूज के आचरण पर अपने अनुभवों को उन्होंने बेबाकी से लिखा था. ‘समागम’ का यह अंक ज्यों ही बैरागी को मिला, अगले दिन अलसुबह उनका फोन आया. पहले तो शिकायत यह कि इतने सालों से पत्रिका प्रकाशित कर रहे हो और मुझे भेजा भी नहीं. उसके बाद मेरे साहस की तारीफ कि इस संकट के समय में पेडन्यूज पर तुमने इतनी बेबाकी से छाप दिया. वे मेरे दुस्साहस पर फिदा थे. तत्काल उन्होंने उपासनेजी का नंबर लिया लेकिन मेरी नजदीकी बढ़ती गई. कई बार गलतियों पर डांट और फिर पुचकार कर समझाने के लिए फोन. मैं हैरान था कि मुझ जैसे नासमझ और नौसिखिया सम्पादक को इतने बड़े व्यक्ति का स्नेह मिल रहा है. सबकुछ यथावत चलता रहा.

अपने देहांत के कोई चार महीने पहले भोपाल आए थे. शायद अवसर था मध्यप्रदेश शासन द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने का. होटल अशोका में मुलाकात हुई. कौन सी शक्ति काम कर रही थी, मुझे पता नहीं लेकिन उन्होंने मेरे सामने दिल खोलकर रख दिया. बचपन से लेकर अब तक की सारी बातें सिलसिलेवार बताते गए. अपने गरीबी के दिन. भीख मांगकर खाने से लेकर पिता के अपाहिज होने की, हर बात सुनाई. अपनी दास्तां कहते कहते कई बार उनकी आंखें नम हो गई. साहस तो उनमें इतना था कि आंसुओं को पलकों से नीचे आने की इजाजत नहीं दी लेकिन उस आवाज का क्या करते जो उनके दर्द को बयां कर रही थी. अपनी शादी-ब्याहो के बारे में बताते हुए ठहाके लगा दिये. कुछ मन हल्का हुआ. तब की नईदुनिया में उनकी कविता को पढक़र वह लडक़ी उनसे शादी के लिए तैयार हो गई जिनके साथ अंतिम सांस तक उनका साथ रहा.

कुछेक अपने अनुभव उन्होंने सुनाए. आप सामने वाले के दिल में उतर गये हैं कि उसके दिल से उतर गये हैं, इस सत्य को समझने के लिए एक जरूरी तरीका यही है कि उस व्यक्ति ने आपसे किस संबोधन का उपयोग करते हुए कुछ कहना शुरू किया है। उसने आपको किस संज्ञा या सर्वनाम या कि विशेषण से आवाज दी है। आपके पास आपके अनुभव और संस्मरण अवश्य होंगे। यह एक सामान्य व्यवहार या अध्ययन बिन्दु है। मेरे पास इस सत्य का संस्मरण श्रीमती इंदिरा गांधी और श्री पं. विद्याचरण जी शुक्ल के संदर्भ में है। एक बार मैं विद्या भैया के साथ इंदिराजी से भेंट करने गया. खुले मैदान में जब इंदिराजी आयीं तो दूर खड़े विद्या भैया को आवाज लगायीं..  ‘‘शुकुल जी...! शुकुल जी...! शुकुल जी...!’’ और विद्या भैया पूरी तेजी से उस समूह को छोडक़र इंदिराजी के सामने आ गये। मैंने इंदिराजी को प्रणाम किया और अपनी कृतज्ञता प्रकट करने उनका आभार व्यक्त किया। यह मैदानी भेंट पूरी होने के बाद मैं वापस विद्या भैया के साथ ही उनके बंगले पर पहुंच गया। विद्या भैया ने अपने चपरासी को चाय लाने का आदेश दिया और मुझसे बात करने के लिये मुझे देखा। वे कुछ बोलते उससे पहले मैंने अपनी बेचैनी प्रकट कर दी। मैंने कहा- ‘‘भैया में बेचैन होकर पूछ रहा हूं कि क्या इन दिनों इंदिराजी आपसे नाराज हैं? चाय वाय को रहने दो।’’ वे नजरें नीची करके थोड़ा गंभीर होकर पूछ बैठे- ‘‘क्या मेरे आने से पहले इंदिराजी ने आपसे कुछ पूछा था क्या?’’ मैंने कहा- ‘‘कुछ नहीं कहा। बस आपको आवाज उन्होंने खुद ही लगाई।’’ ‘‘तब नाराजी वाली बात कौन सी हुई?’’ विद्या भैया का सवाल था। मैंने कहा- ‘‘भैया! वे सदैव आपको ‘विद्या’ कहकर संबोधित करती थीं। आज उनका संबोधन बदल गया था। वे आपको शुकुल जी..शुकुलजी कहकर आवाज लगा रही थीं। यह बदलाव मुझे बेचैन कर रहा है।’’ विद्या भैया बिलकुल चुप हो गए। इधर-उधर देखने लगे। तब तक चाय आ गई। जब चाय देकर चपरासी चला गया तो विद्या भैया बोले-‘‘आपका अनुमान ठीक है। वे इन दिनों मुझसे कुछ नाराज चल रही हैं। आप किसी से चर्चा नहीं करें।’’ और हमारी चाय ठंडी हो गई। विद्या भैया प्राय: असहज हो गए। मेरी बेचैनी बढ़ गई।

बैरागी जी एक कवि नहीं थे, एक राजनेता भी नहीं थे, एक पत्रकार भी नहीं थे. सही मायने में वे एक मुकम्मल इंसान थे. वे संवेदनशील थे. वे समय की हवा का रूख पहचानते थे. वे कहते रहे कि मनोज, आज ईश्वर का दिया सबकुछ है मेरे पास. लेकिन मैं अपना अतीत नहीं भुला हूं. मैं आज भी मांगकर कपड़े पहनता हूं. इसलिए कि मुझे याद रहे कि मैं मंगता रहा हूं और मंगता ही रहूंगा. ऐसे बैरागी का साथ भूलने का साहस मेरे जैसा छोटा सा आदमी कैसे कर सकता है. जो उनसे सीखने को मिला, वह कम ना था लेकिन कुछ और वक्त मिल जाता तो जीवन में कुछ और दूजा करने की कोशिश करता. खैर, उनके शब्द आज भी गूंज रहे हैं.. मैं अकेला क्या करूं? कुछ तुम लड़ो, कुछ मैं लड़ूं .

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

---***---

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=1$au=0

|कथा-कहानी_$type=blogging$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|लघुकथा_$type=blogging$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|कविता_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$va=1$com=0$s=200$src=random

|विविधा_$type=blogging$au=0$count=10$page=1$com=0$va=0$src=random

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3996,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2968,कहानी,2228,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,529,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,339,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,62,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,10,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,26,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1217,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1995,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,700,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,782,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: बालकवि बैरागी की प्रथम पुण्यतिथि पर सुमिरन - तुम्हें हम यूं ना भुला पाएंगे.. मनोज कुमार
बालकवि बैरागी की प्रथम पुण्यतिथि पर सुमिरन - तुम्हें हम यूं ना भुला पाएंगे.. मनोज कुमार
https://4.bp.blogspot.com/-RP0t0d-2564/XNhuWgdNffI/AAAAAAAATKk/ceTC_W2tZV04j8CG5ZVxexyjZLgijfSqwCLcBGAs/s640/DSC_1001.JPG
https://4.bp.blogspot.com/-RP0t0d-2564/XNhuWgdNffI/AAAAAAAATKk/ceTC_W2tZV04j8CG5ZVxexyjZLgijfSqwCLcBGAs/s72-c/DSC_1001.JPG
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2019/05/blog-post_13.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2019/05/blog-post_13.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ