370010869858007

---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

संजय कर्णवाल की कविताएँ

अपना  नजरिया तुम  बेहतर बनाओ।

अच्छा सोचो ,अच्छा सबको सिखाओ।

बेहतर तुम एक मिसाल पेश करो

सारे जहाँ को और भी अच्छा कर दिखाओ।

जो गुंजाइश है जीवन में अपने

उनको तुम आगे बढ़ कर पूरा कर जाओ।

सभी सोचते हैं कुछ न कुछ मन में

मन के भावों को ना तुम छिपाओ।

2.......

कुछ कर दिखाने का जज्बा हो खुद में।

तो कुछ भी मुश्किल नहीं सारे जहाँ में।

बुलन्द हौसले जिनके होते हमेशा

वो ढूंढ लेते हैं मंजिल जमी आसमां में

नहीं साथ देता अगर तुमको कोई

ना रुक जाना तुम इस  इम्तहां में।

रखना कदम अपने आगे ही आगे

कदमों से बनेंगे यहाँ पर निशां।

3

है इतनी सी बस चाहते,

मिले साथ हमको

यही करते हैं दुआ

दिन रात हम तो।

नहीं चाहते हैं

इतना हो अपना रुतबा

गले से लगते हैं,

रब की हर सौगात को ।

जमाने में भी बस

लोग जीते हैं कैसे

जो खोए रहते कहीं

नहीं जानते रब की बात को।

4

सबसे तुम प्रेम से बोलो,प्रेम से बोलो

बोलो तो सोच के बोलो,हर बात को तोलो।

जग में कोई मोल नहीं ऐसी बातों का

सम्मान करो तुम दूसरों के जज्बातों का

हो सके तो तुम किसी का सहयोग करो

अच्छी अच्छी बातों से तुम जग में प्यार भरो।

5

सोचे कुछ अच्छा ही मन में,

निकले सदा सुविचार ही मन से।

हम इतने सुधरे जग में,

महक उठे खुशबू जीवन से।

सफर जिंदगी का चलता रहा है

वक्त का दरिया आगे निकलता रहा है ।

नहीं कामना है कुछ पाने की

है आरजू मन में बस जाने की।

6

जो भी तुमसे मिले,उसको अपना समझो

बेकार की झूठी सारी बातों में ना उलझो।

कहीं कोई किसी को पड़े परेशानी

कर सको तो उस पर करो मेहरबानी।

हो इंसा अगर तो इंसानियत को समझो।।

बिना रहमोकरम के नहीं चलता  है जीवन

अपने ही कारण बनी रहती हैं उलझन

करके पक्का इरादा सारी उलझनों से सुलझो।।

7

जानकर भी दुःख किसी के मत अंजान बन जाओ

इंसान हो तो सच में किसी की मुस्कान बन जाओ

नहीं सोचो भला करके मन में कुछ पाने की

सदा ही रहे मन में कुछ अच्छा कर जाने की

जो जीते हैं बस दूसरों के लिए

अनेकों ही जिसने दूसरों पर उपकार किए

वही कहलाते हैं, सच्चे इंसान यहाँ

अपना लगता है, उनको सारा जहाँ ।

8

बनो ऐसे तुम लगे हर कोई अपना

सहारा दे शाम ओ सहर कोई अपना

रंग उजालो के हरदम बिखरते रहे

साथ लेकर गुलों का निखरते रहे

चाँद तारे सभी मिलकर चमकते रहे

खुशबू लेकर भौंरे भी महकते रहे।

9

एक अपना कोई मकसद हो,

कुछ करने का हौसला बुलन्द हो।

हम चलते रहे आगे ही आगे

न रास्ते अपने बन्द हो।।

मंजिल पाने वाले होते हैं कम,

भटक जाते हैं लोग यहाँ।

सोचते सोचते वक्त गुजर जाता है

बस जाय तो जाएं कहाँ।

हिम्मत वाला जीत जाता है हर हाल में

ढूंढ लेते हैं जो जवाब हर सवाल में।

10........

हर एक मुश्किल आकर हमको

जीना ढंग से सिखलाती है।

जब चलते है हम पक्का इरादा करके

वो नई दिशा दिखलाती है ।

कहीं रुक न पाएं अपने कदम

जो बढ़ते रहे आगे आगे।

अरमान दिल के पूरे हो तो

मन गाड़ी सा आगे भागे।

हमेशा यूँ ही विश्वास बना रहे

अच्छा ही अहसास बना रहे

कविता 1456051506373716413

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

---प्रायोजक---

---***---

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव