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लघु-कथा - “मुंह नोचवा” - लेखक - दिनेश चन्द्र पुरोहित

जोधपुर शहर की अंधेरी गली में दीप नाम का पढ़ा-लिखा नौजवान रहता था, उसे कसरत करने का बहुत शौक था ! सुबह-सुबह जब उस्ताद के द्वारा बतायी गयी वेट-लिफ्टिंग की एक्सरसाइज़ करके, वह पसीना सूखाने के लिए जैसे ही वह बोलकोनी में आता, और उसकी नज़र नीचे गली में खड़ी चुलबुली खूबसूरत लड़कियों पर गिरती..जो उसका कसरती बदन देखकर आहें भरती थी ! कई बार उनके बोले गए कोमेंट्स उसके कानों में सुनायी दे जाते, कोई कह रही होती “हाय राम, कैसा सुन्दर बांका जवान !” तो कोई कहती “क्या डोले हैं, पट्ठे के ? वाह, क्या भुजाओं की मछलियां उछल रही है ?” इस तरह कई तरह-तरह के कोमेंट्स, उसके कानों को सुनायी दे जाते ! फिर क्या ? वह खुश होकर, उनकी तरफ देखता और मद-भरी मुस्कान लबों पर छोड़ देता ! कभी-कभी तो ये लड़कियां उससे नज़र मिलते ही, हवाई चुम्मा छोड़ देती थी..! फिर क्या ? उस युवा के रोम-रोम खड़े हो जाते, और उसके कसरती बदन में उतेजना फ़ैल जाती ! वह झट मुस्कराता हुआ, अपने सीने और भुजाओं के डोले दिखलाकर उन्हें पुलकित कर देता ! इस तरह, वह रोज़ कसरत करता और इन खूबसूरत नवयोवनाओं को अपना कसरती बदन दिखलाकर खुश होता था..धीरे-धीरे यह आदत, उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गयी !

कुछ समय बाद उस नवयुवक दीप की शादी एक खूबसूरत लड़की से हो गयी, उस युवती का पीहर मध्य-प्रदेश प्रांत में था ! वह खुले दिल की ज़रूर थी, मगर कोई संदेह उसके दिल में घर कर जाता तो वह एक नंबर की शंकालु किस्म की औरत बन जाया करती ! पति के कसरती बदन को देखकर वह अपने-आपको गौरवान्वित महसूस करती ! अपने भाग्य को सराहती हुई, वह बहुत खुश रहा करती ! वह सोचा करती कि, ‘वह कितनी खुशनसीब है, जिसे ऐसा सुन्दर पति मिला है !’ एक दिन की बात है, दीप कसरत करके जैसे ही बोलकोनी में आया ! उसकी नज़र गली में खड़ी उन खूबसूरत लड़कियों पर गिरी, नज़रें आपस में मिलते ही उतेजक कोमेंट्स तो क्या कसे गए..? यहाँ तो एक लड़की जिसका नाम था नयन तारा, उसने उसको छेड़ने के अंदाज़ में अपने लबों से सीटी बजा दी ! इधर इसका सीटी बजाना हुआ, और उधर इस दीप की पत्नि का चाय लेकर बालकोनी में आना हुआ, बस फिर क्या ? उसने इस मंज़र को अपनी आँखों से देख लिया, तब से उसे यह बात घर कर गयी कि, उसका पति उसके हाथ से फिसलता जा रहा है, और तत्काल उसने निर्णय ले लिया कि ‘अब इस पर, लगाम कसनी बहुत ज़रूरी है ! न तो, यह दीप हाथ से चला जाएगा !’ फिर क्या ? अपनी कसम देकर, उसने हमेशा के लिए उसकी कसरत करने की आदत छुड़ा दी, फिर किसी रिश्तेदार को वेट-लिफ्टिंग के सामान देकर हमेशा के लिए इस समस्या का समाधान कर डाला ! कसरत न करने से दीप की कमर के पास फेट्स जमा होने लगी, भुजाओं के डोले अब कहाँ नज़र आते ? धीरे-धीरे बेचारे दीप का कसरती बदन, मोटापे में बदलने लगा ! अचानक एक दिन सुबह वह बालकोनी में चला आया, और उसकी नज़र गली में खड़ी उन खूबसूरत लड़कियों पर जा गिरी ! जैसे ही उनकी नज़रें आपस में मिली, और उन लड़कियों के बोले गए असहनीय कोमेंट्स उसे सुनने पड़े ! कोई कह रही थी “वह बांका जवान, कहाँ चला गया ? यह कमबख़्त मोटा भैंसा, कहाँ से आकर यहां आकर खड़ा हो गया ?” कोई कह रही थी “हाय राम ! यह लड़का तो वही है, शायद इसने कसरत करना छोड़ दिया हो ?” तभी नयन तारा दीप को अपने पंजे के नाखून दिखलाती हुई, जोर से कह उठी “साले ! अगर तूने वापस कसरत करनी शुरू नहीं की तो, मैं तेरा मुंह नोच लूंगी ! ख़ाक देखूं, अब तेरा मुंह..साला मोटा भैंसा ?”

बेचारा दीप घबरा गया, उसके मुख से चीख निकल गयी “अरे मेरी मां, आकर बचा मुझे इस मुंह नोचवा से !” बेचारा दीप घबराया हुआ, सोचने लगा कि, ‘आख़िर, आज़कल की इन शैतान लड़कियों के बारे में कौन जान सकता है...? भगवान करे कहीं ऐसा न हो, ये लड़कियां रास्ता रोककर मेरे साथ कोई बेहूदी हरक़त कर बैठे ? अगर ऐसा हो गया तो मैं न घर का रहूंगा, न घाट का !’ सोचता हुआ, वह दालान में आकर पलंग पर बैठ गया ! वहां बैठे-बैठे सोचता जा रहा था कि, ‘इस समस्या से, कैसे निज़ात पाया जाय ?’ सोचते-सोचते उसे ऊंघ लग गयी, थोड़ी देर बाद उसकी पत्नि की चीख-पुकार ने उसे जगा दिया, वह इकलौते पुत्र अम्मू को फटकार कर कह रही थी “साला ! अपने बाप पर गया है, पूरा निठल्ला निकला तू तो ! जा अपने बाप को चाय देकर आ, न तो मैं मुंह नोच लूंगी तेरे और तेरे बाप का ! मुझे समझ क्या रखा है, तुम दोनों ने ! तेरा बाप एक चाय के लिए मुझे सीढ़ियां चढ़वाता है, और दूसरा तू.. कोई काम करता नहीं ! जानता है, मैं हूं मुंह नोचवा ! अब जाता है, नहीं ? नहीं गया तो मुंह नोच लूंगी, कमबख़्त !”

अब बेचारा दीप जाए, किधर ? यहाँ तो घरवाली और बाहर वाली, दोनों ठहरी मुंह नोचवा !

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