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पहला सुख - निरोगी काया - डॉ. कविता किरण

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर

–--------------------------------------        लेख- डॉ कविता"किरण"

"व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं।

आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥"

      हमारे शास्त्रों में कहा गया है

       "पहला सुख निरोगी काया"

आज 21 जून है। और 21 जून को पूरे विश्व मे अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रुप मे मनाया जाता है। यहां कई लोगों के मन मे प्रश्न उठता है कि "वास्तव में योग है क्या"? ये कोई व्यायाम, प्राणायाम, ध्यान,आसन, समाधि है या फिर कुछ और।

दरअसल "योग जीवन को सही प्रकार से जीने की एक कला है। एक ऐसा विज्ञान है। जिसे हमें अपनी दिनचर्या में अनिवार्य रूप से सम्मिलित करना  चाहिए। क्योंकि यह हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर अपना प्रभाव डालता है। 

योग का अर्थ है जुड़ाव...यानि जोड़कर रखना, बांधना, एकाकार हो जाना।

आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एकाकार हो जाना। अर्थात आत्मा का परमात्मा से योग होना। इसके अतिरिक्त हम अपने दैनिक जीवन में जो भी कार्य करते हैं..यदि उसे पूर्ण मनोयोग से नहीं किया जाएगा..तो उस कार्य की सफलता एवम संपन्नता में निश्चित रूप से संदेह रहेगा।

    व्यावहारिक स्तर पर यदि हम देखें..तो योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और उनमें आपस में तालमेल बिठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

रोज़मर्रा के जीवन के तनाव..और प्रतिकूल परिस्थितियों के परिणामस्वरूप हम में से बहुत से ऐसे लोग हैं जो अनेक प्रकार की मानसिक परेशानियों से पीड़ित रहते हैं। कई अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं। और कइयों के शारीरिक अवयव भलीभांति काम नहीं करते। योग इन सब समस्याओं का सामना करने के लिए हमें शक्ति प्रदान करता है। निदान के साथ यथासम्भव समाधान प्रस्तुत करता है।

      योग व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली प्रकार है, जिसके माध्यम से न केवल शरीर के अंग प्रत्यंग...बल्कि अपने मन, मस्तिष्क और आत्मा में भी संतुलन बनाया जा सकता है। यही कारण है कि योग से शा‍रीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है।

     तो आइये आज विश्व योग दिवस पर हम सब मिलकर ये संकल्प लें कि..हम प्रतिदिन योग के लिए.. स्वयम अपने लिए..अपने स्वस्थ एवम दीर्घ जीवन के लिए सुबह या शाम में अपनी सुविधानुसार कुछ समय अवश्य निकालेंगे। क्योंकि कहा जाता है स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। और स्वस्थ मस्तिष्क से ही स्वस्थ विचार एवं श्रेष्ठ जीवन का निर्माण सम्भव है। उत्तम स्वास्थ्य ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार है , जो मात्र योग से ही साकार एवम सम्भव हो सकता है इसीलिए आइये-

"योग को अपनायें और अपना जीवन को बेहतर बनाये"

©डॉ कविता"किरण"

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