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मेरी लघुकविताएं - विनोद सिल्ला

1.
आगन्तुक

हर आगन्तुक
लाता है पैगाम
खुशी का
या फिर गम का
जो कर देता है माहौल
खुशनुमा या गमगीन
आंसू ही है मात्र
ऐसा आगन्तुक जो
आकर कर देता है
हल्का-फुल्‍का इंसान को

-विनोद सिल्‍ला©

2.
बदलाव

ढले कितने सूरज
बीती कितनी सांझ
बहुत कुछ बदलते देखा
गाँव बदले कस्बों में
कस्‍बे बदले शहरों में
शहर बदले महानगरों में
जवानी बदली बुढ़ापे में
बचपन जवानी में
व्‍यक्‍ति का नाम, उपनाम में
हुआ आभास बदलाव है शास्‍वत है

-विनोद सिल्‍ला©

3.
विविधता के बावजूद

मैं पहुँच गया
अपने निवास स्थान से
बहुत दूर
करके तय लंबा सफर
व्‍यक्‍ति की
वेशभूषा-बोलचाल
रहन-सहन व खान-पान की
विविधता के बावजूद
प्रवृत्ति व आचरण था
सबका एक जैसा

-विनोद सिल्‍ला©

4.
बय्‍ये के घोंसले

मेरे मित्र की
अतिथिशाला की
शोभा बढ़ा रहे हैं
बय्‍ये के घोंसले
जब भी मैं देखता हूँ
इन घोंसलों को
मन में आते हैं विचार
गजब सृजन करते हैं
ये नन्‍हे कलाकार

-विनोद सिल्‍ला©

5.
कर दिया कितना दूर

हम दो मित्र
एक अरसे बाद मिले
मात्र औपचारिकतावश ही
पूछी राजी-खुशी
और हो गए विदा
इस व्‍यस्‍तता ने
दो मित्रों को
कर दिया कितना दूर
खुद के लिए भी
समय नहीं

-विनोद सिल्‍ला©

6.
स्वर्ग की कल्पना

सावन माह में
ठंडी हैं फुहार
मौसम है सुहावना
शायद ऐसा ही मौसम
देख कर
की गई होगी
स्‍वर्ग की कल्पना

-विनोद सिल्‍ला©

7.
सावन

बादलों ने
कर लिया
सूरज का अपहरण
हवा भी
जाने कहाँ से
ले आई शीतलता
सुहावना हुआ मौसम
शायद इसी को
कहते हैं सावन

-विनोद सिल्‍ला©

8.
अनजान है इंसान

इंसान उलझ गया
संकीर्ण दायरों में
कर लिया मेकअप
आधुनिकता का
ओढ़ लिया आवरण
सभ्यता का
दुनिया बना ली छोटी-सी
कूंए के मेंढक की तरह
अनजान है
सागर की विशालता से

-विनोद सिल्‍ला©
9.
सुख

नहीं मिला सुख
पूजा-पाठ में
नहीं मिला सुख
धन-दौलत में
नहीं मिला सुख
अन्य उपक्रमों में
जब आया
प्रकृति के संपर्क में
हुई असीम
सुख की अनुभूति

-विनोद सिल्‍ला©

10.
मीठी बातें

उनकी बातें थीं
मीठी और कर्णप्रिय
बातों में था मिठास
स्‍वार्थवश
यह तब पता चला
जब बात आगे बढी़
अगर इतना मिठास
होता निस्‍वार्थ
तो गजब होता

-विनोद सिल्‍ला©

11.
रात

कभी-कभी
करवटें बदलते
गुजर जाती है रात
कभी बिस्तर पर जाते ही
ले लेती हैं नींद आगोश में
कभी पहाड़-सी लगती है रात
कभी होती नहीं नींद पूरी
और गुजर जाती है रात
हर रात की
अलग है विशेषता

-विनोद सिल्‍ला©

12.
मैं हूँ रात

मैं हूँ रात
तुम्हारे लिए लाई हूँ
चैन-शकून और नींद
सोओगे नहीं तो कैसे मिटेगी
दिन भर की थकान
कैसे आएगी
तबियत में ताजगी
कैसे आएंगे स्‍वप्‍न
गर स्‍वप्‍न नहीं आए तो
कैसे होगा लक्ष्‍य निर्धारित

-विनोद सिल्‍ला©

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

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