370010869858007

---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...
item-thumbnail

अशोक गौतम का व्यंग्य : दूसरे दर्जे की धमा चौकड़ी!!

मे रा और उनका रिश्ता तबका है जब हम दोनों एक साथ ऊपर नीचे की रसोई में एक ही वक्त कुंडी में डंडे से प्याज लहसुन कूटा करते थे और एक साथ अपनी अप...

item-thumbnail

यशवन्त कोठारी का आलेख : राम कथा - अनन्ता

राम के चरित्र ने हजारों वर्षों से लेखकों, कवियों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों को आकर्षित किया है, शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जिसमें राम के चर...

item-thumbnail

ओमप्रकाश कश्यप का आलेख : भारतीय लोकतंत्र – यात्रा और पड़ाव

खून की बूंद न गिरते हुए भी लोगों के जीवन में सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन लाने की व्यवस्था का अभिप्राय है-लोकतंत्र! डॉ. आंबेडकर. कालेज के द...

item-thumbnail

अपनी रचना इंटरनेट पर प्रकाशित करते-करवाते समय निम्न बातों का ध्यान रखें –

  रचनाकार में प्रकाशनार्थ हर विधा की रचनाओं का स्वागत है.   अपनी या अपने रचनाकार मित्रों की रचनाएँ  हिन्दी के किसी भी फ़ॉन्ट यथा -  कृतिदेव...

item-thumbnail

सीमा सिंघल की कविताएँ

(1) हौसले हों गर बुलन्‍द . . . बातें करता सागर की तो उसका दायरा बड़ा है, तू नदी की बात कर, उसकी गोद में पला है। मजबूत इरादों को...

item-thumbnail

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : सेवा -निवृत्‍ति के संकट

  आखिर हिम्‍मत कर के मैंने स्‍वैच्‍छिक सेवा निवृत्‍ति ले ही ली। काफी पुरानी परम्‍परा है हिन्‍दी में। जिन्‍दगी भर नौकरी कर के समय पूर्व ...

item-thumbnail

पुरू मालव की ग़ज़लें

ग़ज़ल रिश्‍तों से अब डर लगता है रिश्‍तों से अब डर लगता है। टूटे पुल-सा घर लगता है।   चेहरों पे शातिर मुस्‍कानें हाथों में ख...

item-thumbnail

आदेश कुमार पंकज की कविताएँ

दो कवितायें   प्रश्‍न   वर्षों से, एक प्रश्‍न जो - मेरे सामने मुँह बाए खड़ा है । हिमालय सा , मेरे सामने अड़ा है ।...

item-thumbnail

आकांक्षा यादव की कविता : एक लड़की

एक लड़की न जाने कितनी बार टूटी है वो टुकड़ों-टुकड़ों में हर किसी को देखती याचना की निगाहों से एक बार तो हाँ कहकर देखो कोई क...

item-thumbnail

हर्ष शर्मा की कविता : व्यग्रता

कवि तुम्हारी कल्पना में आऊंगी मैं, तुमको बहुत लुभाऊंगी मैं, तड़पोगे छटपटाओगे तुम, मुझे व्यक्त न कर पाओगे तुम, शब्द- दर- शब्द तलाश...

item-thumbnail

कृष्ण कुमार यादव का आलेख : गणेश शंकर ‘विद्यार्थी' का अद्‌भुत ‘प्रताप'

विद्यार्थी जी की पुण्‍यतिथि पर (25 मार्च)   गणेश शंकर ‘विद्यार्थी' का अद्‌भुत ‘प्रताप'   कृष्ण कुमार यादव   साहित्‍य क...

item-thumbnail

यशवन्त कोठारी का संस्मरण : ये जो थे पंडित शरद जोशी

(शरद जोशी - चित्र साभार - लेखनी.नेट) वे 1977 की सर्दियों के दिन थे। शरद जोशी किसी कवि सम्‍मेलन के चक्‍कर में उदयपुर आये थे। मैं उनसे म...

item-thumbnail

कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता : हवाई जहाज़ या चिड़िया

    हवाई जहाज या चिड़िया डा० कान्ति प्रकाश त्यागी   ए क बार अम्मा,पिताजी ,का खाना पहुंचाने गई मुझे भी कुछ पकड़ाकर ,साथ में लिव...

item-thumbnail

श्याम यादव का आलेख : पत्रकारिता की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न

आलेख - सवाल पत्रकारिता की पवित्रता पर ?   - श्याम यादव   दे श के पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिह शेखावत ने पद्मश्री से सम्मानित ...

item-thumbnail

हरि भटनागर की कहानी : भय

उ स लड़के को देखकर मैं यकायक डर गया जो मेरे घर के सामने आ खड़ा हुआ था। लड़का फटीचर हालत में था। तन पर बहुत ही गंदी, जगह-जगह फटी बनियान ...

मुख्यपृष्ठ archive

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

---प्रायोजक---

---***---

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव