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अशोक जमनानी की कविता - धूप

धूप धूप है बहुत तुम याद मत आना पैर जल रहें हैं तुम याद मत आना छाँव दूर है तुम याद मत आना मुश्किल भरा सफर है तुम याद...

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उमेश कुमार चौरसिया की दो कविताएँ

कविताएं प्‍यार प्‍यार स्पर्श है अहसास है चलती-रूकती एक श्‍वास है। प्‍यार मिलन है, जुदाई भी प्‍यार अमन है, खुदाई भी। प्‍यार...

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हास परिहास : फ़र्क़ आदमी और औरत में…

यदि दो आदमी आपस में  अनजाने में टकरा जाएँ तो वो एक दूसरे के ऊपर मुट्ठी तान लेंगे. पहला बोलेगा – ‘ऐ – अंधा है क्या? देख के नहीं चल सकता?...

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सारिका अंक 1986 से कुछ ग़ज़लें - मैं किन्हीं खुरदरे सवालों-सा, खूबसूरत जवाब-सी है वो.

आशुफ़्ता चंगेजी की ग़ज़ल   सदाएँ कैद करूं, आहटें चुरा ले जाऊँ, महकते जिस्म की सब खुशबुएँ उड़ा ले जाऊँ.   तेरी अमानतें महफूज रख ...

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प्रमोद भार्गव का आलेख - बीमारियों को महामारी में बदलने का खेल

भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में साधारण बीमारियों को महामारी में बदलने का खेल चल रहा है। यह खेल बहुराष्‍ट्रीय दवा कंपनियां अरबों-खरबों क...

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माणिक का व्यंग्य : बारह लाइन लिखकर बन गए साहित्यकार

आजकल सभी तरफ छपने छपाने का जो दौर चल पड़ा है,कई बार दिल इतना क्रोधित होता है कि,कुछ कर नहीं पाने पर बस सिर फोड़ने की इच्छा होती है. देश भ...

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दीनदयाल शर्मा की ग़ज़ल

ग़जल की शक्ल में एक रचना तकाज़ा वक्त का / दीनदयाल शर्मा चेहरे पर ये झुर्रियां कब आ गई, देखते ही देखते बचपन खा गई. वक्त...

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चंद चुनिंदा कविताएँ

सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविता पाने को सियासत अपने भी पराये हुये जिन्‍हें दी थी कुर्सी वे भी बेगाने हुये पुत्रमोह में कलंकित की निष...

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घनश्याम मौर्य की ग़ज़ल

ग़ज़ल मुझको ज़रा समझा ये माजरा तो दीजिये। इस मौके पर फबता मुहावरा तो दीजिये। तैयार बाज़ीगर है , खड़े हैं तम...

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अरुणा कपूर की कहानी : मोहिनी समाई सागर में...

मोहिनी ! .... पिछ्ले महीने ही मेरे पड़ोस के मकान में रहने आ गई है!...नाम भले ही मोहिनी है ; उसे सुंदर नहीं कहा जा सकता!... सांवला ...

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वीरेन्‍द्र सिंह यादव का आलेख – समकालीनता : और गहन जीवन अनुभवों के क्रांतिदर्शी लेखक मोहन राकेश

युवा साहित्‍यकार के रूप में ख्‍याति प्राप्‍त डाँ वीरेन्‍द्र सिंह यादव ने दलित विमर्श के क्षेत्र में ‘ दलित विकासवाद ' की अवधारणा को स्‍...

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नन्दलाल भारती का लघुकथा संग्रह एहसास - पीडीएफ़ ईबुक में मुफ़्त डाउनलोड कर पढ़ें

नन्दलाल भारती का लघुकथा संग्रह रचनाकार पर पढ़ें स्क्रिब्ड ईपेपर पर यहीँ या मुफ़्त में डाउनलोड कर या प्रिंट कर पढ़ें. डाउनलोड हेतु नीचे दिए ग...

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एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - बच्चों के लिए : जंगल में कोहराम

( १) पशु, पक्षी आदिक एक बार । जंगल में सब करें विचार ।। बढ़ता मानव अत्याचार । क्या होगा इसका उपचार  ?    ( २) पेड़, बगीचे सारे...

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माणिक की कविता - आदमीजात

आदमीजात जीत जाता है हरदम वो ही, अबला हारी, हारी है, देख आईना ताज़ा ताज़ा, लिख रहा हूं सच्चा मुच्चा, फ़िर से अनुभव भारी है, बे...

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यशवन्त कोठारी का व्यंग्य - वे और अकादमी

वे एक मामूली हिन्दी अध्यापक थे। महान् बनना चाहते थे, सो अकादमी में घुस गये। वे अब महान् साहित्यकार हो गये। अकादमी भी उनको पाकर धन्य हो गई...

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यशवन्त कोठारी का व्यंग्य - चिकने कवर पर खुरदरे सत्य

                                                       बाजार में जब से पुरानी साहित्यिक-सामाजिक पत्रिकाएं गायब हुई हैं । पुस्तक-पत्रिकाओं ...

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अशोक गौतम का व्यंग्य - काश! ये पेट न होता सर!!

सच्‍ची को, नौकरी तो साली बाप की भी बुरी होती है। और ये ठहरी सरकार की जो चौथे रोज बदली होती है । सरकार की भी काहे की, उनकी। आज की डेट में ...

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आर. के. भारद्वाज की कहानी – सः मम प्रिय

वयोवृद्ध चुनाव आयोग ने चुनावी शंखनाद किया, शंखनाद के उपरान्‍त विभिन्‍न राजनैतिक दलों ने भी अपनी अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार शंखनाद किया, कुछ...

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