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सूरजपुरी की कविताएँ और गीत

    याद के बादल. (गीत) हृदय-आकाश पर मेरे, छितरकर छा गए बादल, तुम्हारी याद के बादल. !   लरज के,साथ गरजन के, बदरिया छा गई उर पे, कि...

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मुल्ला नसरूद्दीन के चुटकुले : 11-20

चुटकुले 1 - 10 यहाँ पढ़ें 11 भरपूर युवा और खूबसूरत युवती ने मुल्ला से कहा कि वो मुल्ला से प्यार करती है और उससे शादी करना चाहती है. मुल...

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गोवर्धन यादव का आलेख - कहानी पोस्टकार्ड की

डाक का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है. उस समय एक राजा दूसरे राज्य के राजा तक अपना संदेश एक विशेष व्यक्ति जिसे दूत कहा जाता था, के माध्यम से...

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गोवर्धन यादव का आलेख - जल प्रदूषण को रोकने के उपाय

वर्तमान युग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का प्रादुर्भाव इस युग में मानव को आश्चर्यजनक साधन उपलब्ध कराने में सफ़ल रहा है. लेकिन मनुष्य ने प्...

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गोवर्धन यादव का आलेख - कूट संकेतों की दुनिया

कूट संकेतों की दुनिया. आइये, मैं आपको कूट संकेतों की रहस्यमय दुनियां में ले चलूं . एक यन्त्र जिसने लगभग समूची दुनिया में एक- छत्र राज्य कि...

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कामिनी कामायनी की कविताएँ

     1 बदलते समय का एहसास यह सहज था कि तुम्हारे आँसू देख मेरी आँखें रो पड़ती तुम्हारे बहते खून से मेरा जिगर लहूलुहान हो जाता तुम्हारी यातना...

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गोवर्धन यादव का यात्रा संस्मरण : यात्रा अमरनाथ की

आपने अब तक अपने जीवन में अनगिनत यात्राएं की होगी,लेकिन किन्हीं कारणवश आप अमरनाथ की यात्रा नहीं कर पाएं है, तो आपको एक बार बर्फ़ानी बाबा के द...

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गरिमा जोशी पंत तथा मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ

गरिमा जोशी पंत की कविताएँ गुलदाऊदी लगाऊंगी इस बार मैं भी गुलदाऊदी लगाऊंगी। हां मैं भी मेरा घर बहुत छोटा है उसमें कोई बगीचा नहीं तो क्या ...

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सन्तोष कुमार सिंह की बाल कविताएँ - बादल, धूप

1․बादल रोज निहारूँ नभ में तुझको, काले बादल भैया। गरमी से सब प्राणी व्‍याकुल, रँभा रही घर गैया॥ पारे जैसा गिरे रोज ही, भू के अन्‍दर पानी। त...

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हीरालाल प्रजापति की कविताएँ व ग़ज़लें

ग़ज़ल 21 क्या मिलेगा रात दिन सब छोड़ कर पढ़के वहाँ II माँजते बर्तन जहाँ एम. ए. किये लड़के यहाँ II   जेब हैं फुलपेंट में उनके कई किस काम के ...

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एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - छल

मोहनी राधिका से कह रही थी ‘देख बेटी परिवार के बुजुर्ग तुम्हें कॉलेज भेजने के खिलाफ थे। लेकिन मैंने सबको समझा-बुझाकर मना लिया कि मोहल्ले की ...

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कविताएँ और ग़ज़लें

मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ व गीत : वो सागर पीकर भी, प्यासा ही रहा ! मै बूंद से गला , तर करती गयी !  --- जब मेरा जिक्र आया तो तेरी आँखों म...

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यशवन्त कोठारी का व्यंग्य - जंगल आदमी और समाज

पिछले दिनों राजस्‍थान के रणथम्‍भोर अभयारण्‍य में मवेशी घुस गये। अभी इसकी आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि एक अन्‍य अभयारण्‍य में आग लगने की खबर म...

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हीरालाल प्रजापति का व्यंग्य - शीर्षक में क्या धरा है?

व्यंग्य शीर्षक में क्या धरा है ?                                                   [ डॉ. हीरालाल प्रजापति ] शीर्षक ! शीर्षक ! शीर्षक ! आख...

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हीरालाल प्रजापति का व्यंग्य - इसे पढ़ना सख्त मना है!

व्यंग्य इसे पढ़ना सख्त मना है !                             [ डॉ. हीरालाल प्रजापति ]     क्योंकि आजकल सभी बचपन से ही ' जाकी ' के ...

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