370010869858007
Loading...
item-thumbnail

अनुरूपा चौघुले की कविताएँ - मेरे कॉलेज की वह लंबी लड़की

ओस बनूँगा तांक झांक कर रही दुपहरिया अल्हड़ हो गई सारी अमियाँ गुलमोहर से कुमकुम बरसे सजी सेज पर सजनी हरसे छांव नीम की ठंडी ठंडी मदहोशी...

item-thumbnail

महावीर सरन जैन का आलेख - भारतीय भाषा परिवार

भारोपीय भाषा परिवार : प्रोफेसर महावीर सरन जैन (मैंने इधर कुछ विद्वानों के आलेख पढ़े हैं जिनमें यूरोपीय भाषाओं के अनेक शब्दों की व्युत्पत्...

item-thumbnail

डाक्टर चंद जैन अंकुर की कविता - संगे मर मर से श्री विग्रह तक

मेरी कविता  " संगे मर मर से श्री विग्रह तक " उस अमर चेतना का प्रतिनिधित्व करता  है जो कण कण में समाया है । जड़ और चेतन से विश्व वि...

item-thumbnail

अनिल मेलकानी की कविताएँ

  ख़ामोशी कितना अजीब? कि इतनी नजदीकियों बाद भी, तुम हमें आम-लोगों में ही गिन पाते हो; और ये भी, कि इतना कुछ  होते हुए; तुम हमें दिल के उतने...

item-thumbnail

बशर नवाज की नज्म - मुझे जीना नहीं आता

            मुझे जीना नहीं आता                                      मूल उर्दू शायर- बशर नवाज                                      अनुवाद- ड...

item-thumbnail

सुरेश सर्वेद की कहानी - जागृति

खेत की मेढ़ पर कदम रखते ही मनहरण की द्य्ष्टि खेत के भीतरी हिस्से में दौड़ी. खेतों में बोई फसल को देखकर उसका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उसे ...

item-thumbnail

सुरेश सर्वेद की कहानी - हलकू इक्कीसवीं सदी का

हलकू शहर से वापस अपने गाँव आ गया.उसके पास अब लबालब सम्पति थी.धन दौलत के कारण ग्रामीण उसे अब हलक ू कहने से परहेज करने लगे.अब वह सेठ के नाम स...

item-thumbnail

सुरेश सर्वेद की कहानी - आक्रोश

बादल की टुकड़ियों को देखकर विश्राम तिलमिला रहा था.मानसून के आगमन की खबर फैली और एक बारिस हुई भी.फिर बारिस थमी तो बरसने का ही नाम नहीं ले रही...

item-thumbnail

सुरेश सर्वेद की कहानी - परिवर्तन

संध्या होते होते अमृतपाल शराब के नशे में चूर हो जाता. कोई दिन ऐसा नहीं गया कि वह बिना शराब पिये घर पहुंचा हो। वह दिन भर रिक्शा खींचता और जो...

item-thumbnail

आत्माराम यादव पीव की कविताएँ

           सम्पादक जी नमस्कार। मैंने जीवन में अनेक अवसरों मनोकाश पर उभरे.. . . शब्दों की लड़ियों में दर्जनों अभिव्यक्तियां अपने डायरी के प...

item-thumbnail

सुरेश सर्वेद की कहानी - नहीं बिकेगी जमीन

पु स्तैनी सम्पत्ति को बिगाड़ने की जरा सी भी इच्छा गोविन्द के मन में नहीं थी.वह चाह रहा था जिस तरह उसके दादा की सम्पत्ति को पिता ने सहज कर रख...

item-thumbnail

आशीष कुमार त्रिवेदी की लघुकथा - मेरी इच्छा

मेरी इच्छा  ईशान बेसब्री से अपने मम्मी डैडी के आने की प्रतीक्षा कर रहा था। बंसी ने कई बार कहा की वह खाना खाकर सो जाए नहीं तो मेमसाहब नाराज़ ...

item-thumbnail

रामवृक्ष सिंह का व्यंग्य - शहर में साँड़

व्यंग्य शहर में साँड़ डॉ . रामवृक्ष सिंह इधर हमारे शहर में साँड़ों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। और साँड़ से हमें अभिधा वाला अर्थ ही अभि...

item-thumbnail

बच्चन पाठक 'सलिल' की ऐतिहासिक कहानी - नियति चक्र

नियति चक्र -डॉ बच्चन पाठक 'सलिल    मगध साम्राज्य के राज वैद्य आचार्य जीवक को उस रात  नींद नहीं आरही थी अपने प्रसाद में ,अपने पर्यंक प...

मुख्यपृष्ठ archive

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव