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अपर्णा शर्मा की कहानी - पतिव्रता

अरूण और मैनी के हिन्दुस्तान आने की खबर से अरूण का पूरा परिवार उनके स्वागत को उत्सुक हो गया। दो साल पहले अरूण ने अमेरिका में अपनी सहकर्मी म...

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कामिनी कामायनी का यात्रा संस्मरण : मलाका -एक अद्वितीय शहर

मलेशिया का एक राज्य ,मलाका स्वच्छ नील गगन ,घनघोर हरियाली और विशाल समुद्र तट पर बसा हुआ एक बहुत ही खूब सूरत जगह है।  यह पर्यटकों के लिए एक ब...

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चन्द्रकुमार जैन का आलेख - 'मिल्कमैन ऑफ इंडिया' डॉ. वर्गीस कुरियन

भारत में श्वेत क्रांति के जनक और अमूल के संस्थापक वर्गीस कुरियन की 94 वीं जयंती के मौके पर सर्च इंजन गूगल ने अपनी लाज़वाब पेशकश की फेहरिस...

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जावेद अनीस का आलेख - बाल संरक्षण की उलटी चाल

26 साल पहले संयुक्त राष्ट्र की आम सभा ने “ बाल अधिकार समझौते ” को पारित किया गया था जिसके बाद वैश्विक स्तर से बच्चों के अधिकार को गंभीरता...

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महावीर सरन जैन की दो कविताएँ

दो कविताएँ        1. चिन्तन और मैं            प्रोफेसर महावीर सरन जैन   जब होते हो, मन में रह रहकर पलने वाला कम्पन सिगरेट धुएँ की भाँति- सु...

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अनुज कटारा की कविता - ना वो चंद्रमुखी

ना वो चंद्रमुखी ना वो है परियों की कोई कहानी है अगर कुछ तो, लफ़्ज है वो मेरे गीतों के दबे हुए जज्बात है मेरे कहीं गुम हो रही साँस है वो...

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सागर यादव 'जख्मी' की प्रेम कविताएँ

1. तुम बिन ------------ तुम बिन मैं जी ना पाऊँगा | अपने इस छोटे से हृदय मेँ , जाने कितने ख्वाब सजाये तोड़ जग के सारे बंधन , तुमसे हम सम...

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दीपक आचार्य का प्रेरक आलेख - अपने भीतर ही झरता है अमृत, और विष भी

हमारा यह शरीर परमात्मा की अनुपम कृति है। यह समस्त ब्रह्माण्ड का सूक्ष्म प्रतिनिधित्व करने का सामथ्र्य रखता है। ब्रह्माण्ड भर में जो कुछ है ...

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लक्ष्मीकांत बैष्णव , रायपुर की कविताएँ

टिम टिम जलता दीपक स्तब्ध वातावरण गहन अंधकार में टिमटिम जलता दीपक को देखा , तो पाया कि उसके चारों ओर प्रकाश का एक वृत्त है जो धीरे धीरे धुं...

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सुमन त्यागी 'आकाँक्षी' की कविता - मैं भी छोड़ूं देश, ये अरमान आया

                     देश का सम्मान शब्द-शब्द के जाल से छोड़ूँ ,देश अरमान आया मारो-मारो ,काटो-काटो शब्दों का शैलाब आया सच में है,या फिर भ्...

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समीक्षा “खण्डहर में चांद” की अतृप्त-कलात्मक कविताएं

समीक्षक : डा रमेश सोबती (डी लिट) अंग्रेजी साहित्य के इतिहास के रोमांटिसिज्म, हिन्दी के छायावाद और अमेरिका के ट्रांसेंडेंटल रोमांटिसिज्म-आधुन...

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सुशील यादव का व्यंग्य - बातों का आतंकवाद

बातों का आतंकवाद ..... हमारे देश में टी वी युग के आरंभ से एक नए आतंकवाद का जन्म हो गया है, वो है ‘बातों का आतंकवाद’ ....। चैनल वाले बड़-ब...

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महावीर सरन जैन का आलेख - सर्वधर्मसमभाव की स्वीकृति

लोक सभा के चुनावों तथा उनके बाद के कालखण्ड में मोदी जी के भक्त और भाजपा के प्रवक्ता “सेकुलर” शब्द को गाली देते रहे तथा देश के कट्टरवादी वि...

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गीता दुबे की कहानी - नंबर वन

मैं अपनी जिंदगी से बिल्कुल संतुष्ट थी, कोई शिकायत नहीं थी मुझे जिंदगी से. विवाह के आठ वर्ष बाद ईश्वर ने हमें एक बेटा दिया था, हम दोनों ने ...

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दीपक आचार्य का आलेख - नहीं सहेगा हिन्दुस्थान, असहिष्णुता का यह बवाल

सब तरह भारी हो हल्ला है असहिष्णुता का बोलबाला है जिस भारत ने दुनिया को संस्कार सिखाए, सभ्यता दी और इंसानियत का पैगाम दिया। उस भारत में अ...

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संजय द्विवेदी का आलेख - इस असहिष्णु समय में आभासी सांप्रदायिकता को स्थापित करने में लगी शक्तियों के इरादों को समझें

  सड़क से लेकर संसद तक असहिष्णुता की चर्चा है। बढ़ती सांप्रदायिकता की चर्चा है। कलाकार, साहित्यकार सबका इस फिजां में दम घुट रहा है और वे दौ...

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पाठकीय : पीयूष गुप्ता की हास्य-व्यंग्य कविता - नेता

  नेता पाँच साल में एक बार मैं धरती पर आ जाता हूँ मीठा-मीठा बोलकर मैं जनता को बहलाता हूँ पाँच साल में एक बार मैं धरती पर आ जाता हूँ कर...

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सागर यादव 'जख्मी ' की लघुकथा - फ़ोटो

"फोटो" --------------- पहली कक्षा के बच्चोँ को पढ़ाने के बाद मैं ज्योँ ही दूसरी कक्षा मेँ प्रवेश किया तो मेरी नजर एक सात वर्षीय लड़...

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प्रदीप कुमार साह की लघुकथा - लक्ष्य

कुछ दिन पहले मैं अपने चचेरे भाई से मिलने उनके घर गया था. भाभीजी यथासाध्य आवभगत कर मेरा कुशल-क्षेम पूछा फिर गृहकार्य निपटाने में व्यस्त हो ग...

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अनुज कटारा की कविता - मैं तेरा अपराधी

मैं तेरा अपराधी तू मेरा अपराधी प्यार किया पर साथ नहीं कैसी ये विचित्र कहानी मैं तेरा..... लबों के स्पर्श हुए,तन भी जाने क्यों मदमस्त हुए म...

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दीपक आचार्य का प्रेरक आलेख - खुद आगे आएँ अपनी पहचान बनाएँ

वो जमाना चला गया जब इंसान की खूबियों और उपयोगिता का आकलन-मूल्यांकन और उपयोग करने के लिए समाज आगे आता था और सदाचारी, सत्यवादी, सज्जनों, सेवा...

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कामिनी कामायनी का आलेख - ग्राम देवता

  मनुष्य और देवता में अन्योन्याश्रय संबंध रहा है । पहले देवता ने मनुष्य को बनाया ,फिर मनुष्य ने देवता को बनाया ,दूसरे शब्दों में अगर यूं कह...

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रामवृक्ष सिंह का आलेख - हिन्दी : क्या आपको कठिन लगती है?

भाषा-चिन्तन अपनी-अपनी आसानी डॉ. रामवृक्ष सिंह भारत सरकार की राजभाषा नीति सरकार के श्रेणी तीन और उससे ऊपर के कर्मचारियों पर लागू होती है।...

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