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(ब)जट : यमला पगला दीवाना / अमित शर्मा

प्रतिवर्ष संसद में आम बजट पेश किया जाता हैं. इसे आम बजट इसीलिये कहाँ जाता हैं क्योंकि ये आम के सीजन के पहले आता है. बजट पेश करने के पीछे आय...

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उपयोगी बनाएं इस भीड़ को / डॉ. दीपक आचार्य

मजमा लगाना और मजमा लगाकर बैठना, तमाशा बनना और तमाशा बनाना-दिखाना आदमी की फितरत में शुमार हो चला है। हमारे यहां गली-कूंचों से लेकर महानगरों...

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मंगतों को नहीं जरूरतमन्दों को दें / डॉ. दीपक आचार्य

पूरा संसार लेन-देन पर टिका हुआ है। यों कहा जाए कि सृष्टि में जन्म का आधार ही पूर्वजन्म के हिसाब-किताब का परिणाम है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं ह...

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आखिर थम ही गए पहिए - नैनपुर नैरो गेज ट्रेन की अंतिम यात्रा / गोवर्धन यादव

आखिर थम ही गए पहिए लगातार एक सौ ग्यारह वर्षों तक अहिर्निश सेवाएँ देती रहने वाली छोटी रेल के पहिए आखिर 30 नवम्बर 2015 को इतिहास का हिस्सा ब...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ - 12 / लेखक परिचय / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  लेखक परिचय डॉ . हिदायत प्रेम जन्म : 24 मार्च 1946, घोटका, ज़िला- सिन्ध में। 1973 में सिन्ध यूनिवर्सिटी, जामशोरो में सिन्धी में एम.ए.। 1...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ - 11 / स्नेह का सावन - इमदाद हुसैनी/ अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  स्नेह का सावन इमदाद हुसैनी शॉन ने कुर्सी की पीठ पर लेटे, एड़ियों पर घेर देकर, कुर्सी को पिछली टाँगों पर खड़ा किया और फिर दीवार से टिकान...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ - 10 / बीमार आकांक्षाओं की खोज - मुश्ताक़ अहमद शोरो/ अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  बीमार आकांक्षाओं की खोज मुश्ताक़ अहमद शोरो क्या ये सब जिल्लते, यंत्रणाएँ, अपमान, मानसिक यातनाएँ, अनाड़ीपन, महत्वहीनता के नगण्य भाव मेरे...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ -9 / मज़बूत टाँका हुआ बटन - पोपटी हीरानंदाणी / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  मज़बूत टाँका हुआ बटन पोपटी हीरानंदाणी मेरी भाग्यवान देखी है? हक़ीक़त में जैसे मिलिटरी का एक किरदार। उस दिन कहा था, "मुझे तुम्हारी य...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ -8 / चौराहे से उत्तर की ओर अब्दुल रहमान सियाल / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  चौराहे से उत्तर की ओर अब्दुल रहमान सियाल सुबह का वक़्त है, बस से उतरकर रोज़ की तरह चार कमरों तक महदूद उस कॉलेज की बिल्डिंग की ओर रुख़ कि...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ -7 / दुनिया एक स्टेज है - नूर अलहदा शाह/ अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  दुनिया एक स्टेज है नूर अलहदा शाह उस महफ़िल में सिर्फ़ मुझे ही नाचने के लिये बुलाया गया था। रात के पहले पहर में जब भीड़ इकट्ठा हुई थी और ...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ - 6/ सियासत, मीडिया और अजीब बू - तनवीर जोनेजो / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  सियासत , मीडिया और अजीब बू तनवीर जोनेजो कालीन सी दरी पर सफ़ेद चुनरी, जिस पर गुलाबी फूल गुंथे हुए थे, सर पर ओढ़े वह ख़ुदा के दर मिन्नत क...

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ -5 / जलते अंगारे - सहर इमदाद / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  जलते अंगारे सहर इमदाद रात शब बारात हुई। उसने शीरा और पूरी बनाई। ख़तिमा देकर आस- पड़ोस में बाँट दिया। आज उसने हर काम अकेले ही किया थ...

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