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गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता - वीणा भाटिया/मनोज कुमार झा

  “ आवहु सब मिल रोवहु भारत भाई हा ! हा !! भारत दुर्दशा देखि ना जाई। ”   ये पंक्तियां आधुनिक हिंदी के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र के ना...

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लघुपत्रिकाएं पिछलग्गू विमर्श का मंच नहीं हैं / चंद्रमौलि चंद्रकांत

आज के समय में मुख्यधारा की पत्रिकाएं व अखबार कारपोरेट जगत व सम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में समाहित हो रही है। इस वजह से देश के चौथे स्तंभ...

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पहाड़ी कोरवा की जिंदगी में नई सुबह / मनोज कुमार

यह शायद पहला मौका होगा जब पहाड़ी कोरवा आदिवासियों के जीवन में इतनी सारी खुशी उनके हिस्से में आयी है. अब से पहले तक उपेक्षा और तकलीफ के सहार...

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रचना और रचनाकार (१५) - सुभाष दशोत्तर की कविताओं में मृत्यु-बोध / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

रचना और रचनाकार (१५) सुभाष दशोत्तर की कविताओं में मृत्यु-बोध डा. सुरेन्द्र वर्मा सुभाष दशोत्तर मध्य-प्रदेश का एक उदीयमान हिंदी कवि था जो एक...

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निजीकरण के दौर में सरकारी स्कूल / जावेद अनीस

  सरकारी स्कूल हमारे देश के सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद हैं, ये देश के सबसे वंचित व हाशिये पर पंहुचा दिए गये समुदायों की शिक्षा मे...

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रचना और रचनाकार (१४) - अमृता भारती का रचना संसार / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

प्रसिद्ध संवृतशास्त्री, एडमंड हुस्सर्ल, की यह मान्यता है कि हमारी चेतना अनिवार्यतः विषयोन्मुख होती है. लेकिन जिनकी ओर वह अभिप्रेरित है, वे व...

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जरूरी हैं धर्मशालाएँ - डॉ. दीपक आचार्य

किसी जमाने में लोग कम हुआ करते थे और दानी-मानी लोगों की संख्या भी कोई कम नहीं थी। वे लोग गांवों-शहरों और कस्बों में धर्मशालाएं बनवाते थे जो...

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उदास है नदी / कविताएँ / गोवर्धन यादव

(१) सूख कर कांटा हो गई नदी, पता नहीं, किस दुख की मारी है बेचारी ? न कुछ कहती है, न कुछ बताती है. एक वाचाल नदी का - इस तरह मौन हो जाने का - ...

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रचना और रचनाकार (१३)-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचना धर्मिता नई कविता के समर्थ कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना एक ऐसे संवेदनशील रचनाकार हैं जो एक ओर अपनी निजी कोमल भा...

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जल प्रबंधन में युवाओं की भूमिका / डॉ.चन्द्रकुमार जैन

लोफिर आ गए सूरज के जलने और धरती के तपने के दिन। यानी गरमी की हुई दस्तक। फिर उठने लगे पानी के सवाल। यह एक तरह की नियति सी बन गई है कि हम पा...

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पहचानें इन पागलों को - डॉ. दीपक आचार्य

पागलों के बारे में कहा जाता है कि हर युग के अनुरूप पागलों का जन्म होता रहता है जो अपनी युगानुकूल अजीबोगरीब हरकतों के कारण उस युग में चर्चित...

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रचना और रचनाकार (१२) / नए पथ और नई दिशा के अन्वेषी - धर्मवीर भारती / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1950 में बी.ए.(प्रथम-वर्ष) में दाख़िला लिया था. 1949 में धर्मवीर भारती का उपन्यास “गुनाहों का देवता” प्रकाश...

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यही है रहस्य सुख-दुःख का - डॉ. दीपक आचार्य

सब लोग सुख चाहते हैं, दुःखी रहना कोई नहीं चाहता। लेकिन जो पूर्वजन्मार्जित पाप-पुण्य हैं वे दुःख और सुख के रूप में आते-जाते रहते हैं। नियति ...

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आया लोकगीतों और जसगीतों का पर्व / डॉ. सूर्यकांत मिश्रा

चैत्र नवरात्रि पर विशेष हिंदी मास चैत सुदी एकम हिंदू धर्मावलंबियों को अनेक पर्वों से जोड़ देती है। इस तिथि से हिंदी नव संवत्सर का प्रारंभ ह...

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प्राची - मार्च 2016 - काव्य जगत

फॉसिल अविनाश ब्यौहार बालाई आमदनी से उन्होंने सब कुछ कर लिया हासिल...! आगामी समय में हमें देखने को मिलेंगे ईमान के फॉसिल....! सम्पर्कः 86,...

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