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साहित्य प्रकाशन बनाम सोशल मीडिया का प्रभाव डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’

एक दौर था , जब साहित्य प्रकाशन के लिए रचनाकार प्रकाशकों के दर पर अपने सृजन के साथ जाते थे या फिर प्रकाशक प्रतिभाओं को ढूँढने के लिए हिन्दुस्...

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(कहानी) मुंह की मिठाई - अंकुश्री

मुकेश बाबू अपनी इकलौती बेटी शीला की शादी के लिये बहुत परेशान थे. किसी लड़का वाले के यहां से निराश लौट कर आये थे. अपनी पत्नी से बात कर रहे थे....

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कहानी । परीलोक में शार्क । अजय गोयल

गहरे काले बादलों ने सूरज को जैसे अपने रंग में रंग लिया था। दिन में भी अंधेरा उतर आया। गुस्सा खाकर मौसम सांय-सांय कर रहा था। आसमान से बिजली ग...

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सूरज कुमार मिश्र की कविताएँ

1. "मुझको लड़ना आता है" मुझे असफलताओं ने मारा है वक़्त ने बहुत लताड़ा है सहा है हर एक जख्म मगर ये दिल ना अब तक हारा है गिरा हज़...

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व्यंग्य // चूहे , दीमक और इल्लियाँ // यशवंत कोठारी

  चूहे सरकार को काट रहे हैं, दीमक फाइलें चाट रहीं हैं, जीप पर चढ़ कर इल्लियाँ खेत खा रहीं हैं और किसान आत्म हत्या कर रहे हैं. बाकी जो बचा वो ...

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दोहे सुशील यादव के.......

दोहे सुशील यादव के....... दीप उधर भी जल रहा ,थका-थका मायूस.....। गन्ना सहित किसान को ,सरकार रही चूस…..।। मंदिर बनना राम का ,तय करते तारीख......

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