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साहित्यिक समाचार - ‘‘पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं प्रमिला झरबड़े ’मीता’

‘‘पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं भोपाल। पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं, तन की गलियां सूनी-सूनी, रोम-रोम सन्नाटे हैं,’’‘मन की द...

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साहित्यिक गतिविधियाँ // *कठिनाइयों में भी अडिग रहे प्रेमचंद*

*कठिनाइयों में भी अडिग रहे प्रेमचंद*  छात्रों ने भी सुनाई अपनी रचनाएं     नारायणी साहित्य अकादमी एवं ज्ञानवाहिनी शिक्षण समिति  के संयुक्त तत...

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कहानी // मुआवज़ा // सुधा गोयल " नवीन"

मुआवज़ा सुधा गोयल " नवीन " आलिया की किस्मत ने एक बार फिर उसे धोखा दे दिया। कोठरी के दरवाजे की चौखट पर निढाल खड़ी आलिया अशरफ को जाते...

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व्यंग्य // कितने प्रतिशत भारतीय // धर्मपाल महेंद्र जैन

व्यंग्य कितने प्रतिशत भारतीय - धर्मपाल महेंद्र जैन अपने गेम शो में सेलेब्रिटी होस्ट कभी तो मुस्कुरा कर यह प्रश्न पूछेंगे कि कितने प्रतिशत भ...

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अध्ययन सामग्री - कहानी – गणपति गणनायक – सूर्यबाला // डॉ. जयश्री सिंह

अध्ययन सामग्री कहानी –      गणपति गणनायक – सूर्यबाला ------ डॉ. जयश्री सिंह सहायक प्राध्यापक एवं शोधनिर्देशक, हिन्दी विभाग, जोशी - बेडेकर ...

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अध्ययन सामग्री - कहानी – वापसी – उषा प्रियंवदा // डॉ. जयश्री सिंह

अध्ययन सामग्री - कहानी  – वापसी – - उषा प्रियंवदा ------ डॉ. जयश्री सिंह सहायक प्राध्यापक एवं शोधनिर्देशक, हिन्दी विभाग, जोशी - बेडेकर महाव...

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ललित व्यंग्य // भूख-प्यास // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

भूख-प्यास डा. सुरेन्द्र वर्मा जैसे ज़िंदगी में सुख-दुःख लगा रहता है, वैसे ही भूख-प्यास भी लगी रहती है। थोड़ी देर के लिए भले ही भोजनोपरांत भूख ...

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बाल नाटक - स्वर्णिम स्वतंत्रता दिवस - डॉ. रानू मुखर्जी

बाल नाटक स्वर्णिम स्वतंत्रता दिवस - डॉ. रानू मुखर्जी (पर्दा खुलते ही कुछ लोग एक जगह इकठ्ठे होकर बात करते हुए नजर आतें हैं और कुछ चहल कदम...

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मुंशी प्रेमचंद की गाय // प्रमोद भार्गव

संदर्भः प्रेमचंद जयंती 31 जुलाई पर विशेष- मुंशी प्रेमचंद की गाय प्रमोद भार्गव कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की एक कहानी हैं ‘मुक्तिधन‘ इस कहानी ...

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डॉ. रंजना जायसवाल की 6 लघुकथाएँ

कीमत वह हँस रही थी उसकी हँसी पर मुझे आश्चर्य हो रहा था। क्या कोई ऐसे हालात में भी हँस सकता है ?पर यह सच था कि वह हँस रही थी। उसके चेहरे पर क...

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देवेन्द्र कुमार पाठक के बरसाती दोहे व नवगीत

बादल, बिजुरी, बारिशें, काई, कीचड़, बाढ़. चौमासे की त्रासदी लिखता है आषाढ़. ~~~ बीज-जुताई, खाद का ऋण ही जुगत-जुगाड़. खातों में फूलें-फलें क़र्ज़-ब्...

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सावनी गीत // मंजुल भटनागर

सूरज छिप गया कहीं बादल घनेरा  है समीर  मंद मंद बूंदों की टिप टिप सपनों की नाव को यादों ने घेरा है  . लो मौसम फिर बदला ,सावन का बसेरा ह...

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साहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता : समस्या और समाधान § डॉ अर्पण जैन 'अविचल'

साहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता : समस्या और समाधान § डॉ अर्पण जैन ' अविचल ' इंटरनेट की दुनिया ने हिंदी या कहे प्रत्येक भाषा क...

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बदलते परिवेश में रक्षा बंधन // श्रीमती शारदा नरेन्द्र मेहता

बदलते परिवेश में रक्षा बंधन                                     श्रीमती शारदा नरेन्द्र मेहता (एम.ए. संस्कृत विशारद)      रक्षा बन्धन एक...

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