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कविताएँ // यह कैसा सूर्योदय // विनोद सिल्ला

1. यह कैसा सूर्योदय काल के भाल पर यह कैसा सूर्योदय हुआ? सद्भाव है दहशत में धर्मांध जय-जय हुआ नफरतें ही छप रही अखबार के समाचार में मं...

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लघुकथाएँ // औरत की परिभाषा और लक्ष्मण रेखा // अमिताभ कुमार "अकेला"

औरत की परिभाषा पति शराबी था और दिनभर इधर-उधर आवारागर्दी करता फिरता। छोटे-छोटे बच्चों की भूख उससे देखी नहीं जाती और वह दूसरों के घरों में झाड़...

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संस्मरण श्रृंखला // डोलर - हिंडा // दिनेश चन्द्र पुरोहित

संस्मरण श्रृंखला डोलर - हिंडा लेखक - दिनेश चन्द्र पुरोहित [प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के संस्मरणों के आधार पर तैयार की गयी पुस्तक ] प्रथम स...

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अडालज बावड़ी - कहानी 520 साल पुराने एयर कंडीशनर की! - रोली मिश्रा

अडालज बावड़ी-कहानी 520 साल पुराने एसी की                  गुजरात बावड़ियों का राज्य है। लगभग 120 से ऊपर स्टेपवेल हैं यहाँ और कुछ तो वर्ल्ड हेर...

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व्यंग्य // "प्रेम पत्र " // जय प्रकाश पाण्डेय

   मेरे प्राणनाथ,            वेलेंटाइन डे बीत गया और तुम बैंक में बीमा का टार्गेट करते रहे। वेलेंटाइन डे के इतने दिनों बाद तुम्हें पत्र इसलि...

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व्यंग्य // " उल्लू की उलाहना " // जय प्रकाश पाण्डेय

             इस दीवाली में ये उल्लू पता नहीं कहां से आ गया। पितर पक्ष में पुड़ी- साग और तरह-तरह के व्यंजन लेकर हम इंतजार करते रहे पर एक भी क...

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कहानी // बिछिया // अजय अमिताभ सुमन

बिछिया अनिमेष आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था । बचपन से ही अनिमेष के पिताजी ने ये उसे ये शिक्षा प्रदान कर रखी थी कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए ए...

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“आवां’’ समय की महत्वपूर्ण कथा - डॉ. रानू मुखर्जी

जब विधाता नारी के हाथ में कलम थमा देती है तो चेतावनियां, चुनौतियां और भीतरी – बाहरी चुभने वाली, दर्दीली चुभन भी साथ साथ चल रहा होता है। यूं ...

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रोचक आलेख // ठलुआ-पंथी // डा. सुरेन्द्र वर्मा

पथ अनेक हैं और हर पथ आपको कहीं न कहीं ले ही जाता है। लेकिन एक ऐसा भी पथ है ठलुओं का जो उन्हें कहीं नहीं ले जाता। वे कहीं जाना भी नहीं चाहते।...

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राम नरेश 'उज्ज्वल' की 10 बाल कविताएँ

         1- तौबा-तौबा         मार - पिटाई तौबा - तौबा ।          झूठ -  बुराई  तौबा - तौबा ।।           मम्मी  मेरी  अक्सर करतीं,         ...

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नींव की ईंट व अन्य कविताएँ // चंदन कुमार

आज की संतान आज की संतान हैं हम। माँ-बाप की प्रतिष्ठा की श्मशान हैं हम। आज की ……..हैं हम।          जितने भी बहायें, हमारी खुशी खातिर लहू।-2  ...

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