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चुटकुले 801 से 850

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चुटकुला # 0801 (एक यात्री ट्रेन से यात्रा कर रहा था, तभी टिकट चेकर आता है...) टिकट चेकर (यात्री से)- टिकट दिखाओ? यात्री (टिकट चेकर से)...

चुटकुला # 0801

(एक यात्री ट्रेन से यात्रा कर रहा था, तभी टिकट चेकर आता है...)

टिकट चेकर (यात्री से)- टिकट दिखाओ?

यात्री (टिकट चेकर से)- नहीं है।

टिकट चेकर (यात्री से)- कहां जाना है?

यात्री (टिकट चेकर से)- वही जहां राम पैदा हुए थे।

टिकट चेकर (यात्री से)- अब चलो मेरे साथ।

यात्री (टिकट चेकर)- कहां?

टिकट चेकर (यात्री से)- जहां श्रीकृष्ण पैदा हुए थे।

चुटकुला # 0802

अभिनेता (डायरेक्टर से)- डायरेक्टर साहब, इस फिल्म में मेरा किरदार

एक पागल का है। मुझे इसमें जान डालने के लिए क्या करना चाहिए?

डायरेक्टर (अभिनेता से)- कुछ नहीं, तुम बिल्कुल वैसे ही हो, जैसा तुम्हें

रोल मिला है।

चुटकुला # 0803

एक साहब कपड़े की दुकान पर कपड़ा लेने आए और वह कपड़े की

क्वालिटी तथा उसकी गारंटी के बारे में पूछताछ कर रहे थे। दुकानदार ने

उनसे पूछा भाई साहब आखिर आपको कितना कपड़ा चाहिए।

साहब बोले- मुझे केवल आधा मीटर कपड़ा टोपी बनाने के लिए चाहिए।

दुकानदार ने उनको आधा मीटर कपड़ा दे दिया तो साहब फिर बोले- इस

कपड़े की गारंटी क्या है?

दुकानदार झल्लाकर बोला- आपका सिर फट सकता है पर इस कपड़े की

बनी टोपी नहीं फट सकती।

चुटकुला # 0804

मच्छर का खून करने के इल्जाम में चीटी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस वाले चीटी से पूछते है, तुमने रात को ऐसा क्या किया कि मच्छर

मर गया?

चीटी बड़ी मासूमियत से कहती है, कुछ भी नहीं। मैं तो बस रात को

मोर्ट्रीन जलाकर सोई थी।

चुटकुला # 0805

मुकेश की पत्नी उसकी शराब पीने और जुआ खेलने की आदत से काफी

परेशान थी। एक रोज दोनो बाजार से गुजर रहे थे कि तभी एक भिखारी

उनके पास आया और एक रुपया मांगने लगा।

मुकेश- क्या तुम जुआ खेलते हो, शराब पीते हो?

भिखारी- जी नहीं साहब।

मुकेश (अपनी पत्नी की ओर देखते हुए)- देखा जो लोग सिगरेट शराब नहीं

पीते और जुआ नहीं खेलते हैं उनकी यही हालत होती है।

चुटकुला # 0806

एक भोले भाले ग्रामीण ने गांव के पंच को दावत देनी चाही। वह पंच के

पास पहुंचा और बोला- आपको खाने में क्या पसंद है?

पंच ने कहा- मछली।

लेकिन मेरी बीवी को तो मछली पकाने की विधि नहीं आती। ग्रामीण ने

कहा।

इस पर पंच ने एक कागज पर मछली पकाने की विधि लिख दी। वह

आदमी मछली खरीद कर घर जा रहा था। रास्ते में एक चील मछली को

झपट ले गयी।

इस पर वह बोला- ले जा, ले जा। विधि तो मेरे पास है, पकायेगी कैसे?

साधू- हे भगवान! तू मुझे दर्द दे, दुख दे, सारे संसार का गम दे।

चेला- बाबा, इतनी सारी डिमांड की क्या जरूरत है। इन शॉर्ट एक अदद

बीवी मांग लीजिए।

चुटकुला # 0807

बांकेलाल (प्यारेलाल से)- यार मैं सोचता था कि इस दुनिया में सिर्फ मैं

ही उल्लू हूं।

प्यारेलाल (बांकेलाल से)- क्यों क्या हुआ?

बांकेलाल (प्यारेलाल से)- कल मैंने अपनी पत्नी को कश्मीरी सेब लाने को

कहा था।

प्यारेलाल (बांकेलाल से)- तो क्या हुआ?

बांकेलाल (प्यारेलाल से)- आज कश्मीर से फोन आया कि उसने सेब खरीद

लिए है।

चुटकुला # 0808

जज (फरियादी से)- एक जैसी सैकड़ो भैसो में से तुमने अपनी भैस को

किस तरह पहचान लिया?

फरियादी (जज से)- यह कौन सी बड़ी बात है मालिक! आपकी कचहरी में

सैकड़ो काले कोट पहने वकील है, फिर भी मैं अपने वकील को पहचान

लेता हूं।

चुटकुला # 0809

ज्योतिषी (एक स्त्री से)- तुम अपने पति का भविष्य जानना चाहती हो?

स्त्री (ज्योतिषी से)- नहीं, इनका भविष्य तो मेरे हाथ में है। फिलहाल तो

आप उनका भूतकाल बताइए।

चुटकुला # 0810

एक दुकानदार ने अपने सेल्समैंन को बुलाया और पिछले दिन की बिक्री

देखकर बोला- कल एक ही दिन में सिर दर्द की दो हजार गोलियां कैसे

बिक गई?

सेल्समैंन (दुकानदार से)- जी, कल दुकान के सामने वाले मैंदान में कवि

सम्मेलन का आयोजन था।

चुटकुला # 0811

एक पंडित जी, सेठजी और चोर एक वक्त में चल बसे। भगवान ने तीनो

को फिर से धरती पर भेजने से पहले उनकी इच्छा पूछी।

पडित जी बोले - मुझे तो किसी बड़े से मंदिर में भेज दीजिए।

सेठ जी बोले- मुझे ढेर सारी दौलत देकर बड़े शहर में भेज दीजिए।

चोर ने भगवान जी से धीरे से कहा - आप तो इस सेठ काेे जहा भी

भेजे, बस....वहां का पता मुझे बता दीजिएगा।

चुटकुला # 0812

थानेदार (थाने में आने वाले व्यक्ति से)- कहिए जनाब आपका क्या खो

गया?

व्यक्ति-पहले याददाश्त खो गई। अब घर नहीं मिल रहा है।

चुटकुला # 0813

राम (श्याम से)- जब पिछले साल हम मुंबई गए थे तब कौन से होटल में

ठहरे थे?

श्याम (राम से)- जरा रुको, चम्मच देखकर बताता हूं।

चुटकुला # 0814

भिखारी (शर्मा जी से) -दो दिन से भूखा हूं साहब कुछ मदद करो।

शर्मा जी (भिखारी से)- तुम भिखारी तो नहीं लगते। ये लो दस का नोट

और बताओ तुम्हारी ये हालत कैसे हुई?

भिखारी (शर्मा जी से)-जी मैं भी आपकी तरह फिजूलखर्च था।

चुटकुला # 0815

नगर परिषद चुनाव में एक उम्मीदवार का चुनाव चिह्न साइकिल था। रात

के समय घरो में वोट मांगते समय एक बुढ़िया को घर के दरवाजे में बैठे

देखकर कहा, ‘माता जी साइकिल का ध्यान रखना।

बुढ़िया ने कहा, ‘बेटा दरवाजे के अंदर खड़ी कर दो, बाहर से कोई उठा न

ले जाये।

किरायेदार (मकान मालिक से)- इस महीने मैं आपको मकान का किराया

नहीं दूंगा।

मकान मालिक - यही बात तुमने पिछले महीने भी कही थी।

किरायेदार - तो क्या हुआ, मैं तो अपना वचन निभा रहा हूं।

चुटकुला # 0816

न्यायधीश (चोर से)- ‘ठीक-ठीक बताओ कि तुमने चोरी की या नहीं?‘

चोर (न्यायधीश से)- ‘पर सरकार, मैं कैसे बता सकता हूं?‘

न्यायधीश (चोर से)- ‘क्यों नहीं बता सकते?‘

चोर (न्यायधीश से)- ‘यह तो मेरा वकील ही बताएगा। इसी काम के लिए

ही तो मैंने फीस भरी है।‘

चुटकुला # 0817

यात्री (रेल के गार्ड से)- ‘मैं चाय पीना चाहता हूं। कोई ऐसा उपाय बताइए

कि मेरे आने तक गाड़ी न चले।‘

गार्ड (मुस्कराकर)- ‘बड़ा सरल उपाय है। मुझे भी अपने साथ ले चलिए।‘

चुटकुला # 0818

जज (अभियुक्त से)- ‘अपने को निर्दोष साबित करने के लिए तुम्हारे पास

अब क्या बचा है?‘

अभियुक्त - ‘सच है हुजूर, मेरे पास जो था, वह वकील साहब को मैंने फीस

में दे दिया।‘

चुटकुला # 0819

मालिक (नए चपरासी से)- तुम्हें मैंनेजर ने काम समझा दिया है न?

चपरासी (मालिक से)- जी हां, उन्होने समझा दिया है कि जब आप दफ्तर

में आएं तब मैं उन्हें जगा दिया करूं।

चुटकुला # 0820

दो मूर्ख वार्तालाप कर रहे थे।

पहला बोला- ‘यदि वृक्ष पर हाथी चढ़ जाए और वहां से नीचे उतरना चाहे

तो उसे क्या करना चाहिए?‘

दूसरा मूर्ख बोला- ‘हाथी को वृक्ष की टहनी पर बैठकर पतझड़ के आने की

प्रतीक्षा करनी चाहिए।‘

चुटकुला # 0821

एक ग्राहक ने होटल के मैंनेजर से शिकायत की- ‘बाथरूम में यह तौलिया

तो बहुत गंदा है आपको इतना गंदा तौलिया यहां नहीं रखना चाहिए था।‘

मैंनेजर हैरान होकर बोला- ‘कमाल है, अब तक बीसियो आदमी इससे हाथ

पोंछ चुके है। किसी ने शिकायत नहीं की। और आप कहते है कि यह

तौलिया गंदा है!‘

चुटकुला # 0822

भाभी (देवर से)- तुम कुंवारे हो। तुम भला महिलाओ के बारे में क्या

जानो।

देवर (भाभी से)- मैं महिलाओ के बारे में सब कुछ जानता हूं। इसीलिए तो

अभी तक कुंवारा हूं।

चुटकुला # 0823

मच्छर का खून करने के इल्जाम में चीटी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस वाले चीटी से पूछते है, तुमने रात को ऐसा क्या किया कि मच्छर

मर गया?

चीटी बड़ी मासूमियत से कहती है, कुछ भी नहीं। मैं तो बस रात को

मोर्ट्रीन जलाकर सोई थी।

चुटकुला # 0824

चोर एक घर का ताला तोड़ रहा था जैसे ही ताला टूटा चोर के पीछे एक

आहट हुई। चोर ने जैसे ही मुड़कर देखा घर का मालिक उसके पीछे खड़ा

था। चोर घबरा गया।

मकान मालिक उसे तसल्ली देता हुआ बोला, ‘मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूं

क्योंकि इस ताले की चाबी मुझसे कही खो गई थी।

सेठानी ने नौकरानी से परेशान होकर कहा, ‘अपनी तनख्वाह से ज्यादा के

तो तू बर्तन तोड़ देती है। बता अब मैं क्या करूं?‘

नौकरानी ने कहा- ‘मेरी तनख्वाह बढ़ा दे मालकिन।‘

.

.

चुटकुला # 0825

मालिक (नए चपरासी से)- तुम्हें मैंनेजर ने काम समझा दिया है न?

चपरासी (मालिक से)- जी हां, उन्होने समझा दिया है कि जब आप दफ्तर

में आएं तो मैं उन्हें जगा दिया करूं।

चुटकुला # 0826

भाभी (देवर से)- तुम कुंवारे हो। तुम भला महिलाओ के बारे में क्या

जानो।

देवर (भाभी से)- मैं महिलाओ के बारे में सब कुछ जानता हूं। इसीलिए तो

अभी तक कुंवारा हूं।

चुटकुला # 0827

किरायेदार (मकान मालिक से)- इस महीने मैं आपको मकान का किराया

नहीं दूंगा।

मकान मालिक (किरायेदार से)- यही बात तुमने पिछले महीने भी कही

थी।

किरायेदार - तो क्या हुआ, मैं अपना वचन ही तो निभा रहा हूं।

चुटकुला # 0828

अफसर ने रामलाल से कहा, ‘मैंने कहा न, कोई जगह खाली नहीं है।

नौकरी के लिए इतनी अर्जियां आती है कि संभाले नहीं संभलती।‘

रामलाल, ‘तो साहब! ऐसा करे कि मुझे इन अर्जियो को सम्भालने की

नौकरी दे दे।

चुटकुला # 0829

मालिक (नौकर से)- ‘इन सारे मच्छरो को मार दो।' फिर थोड़ी देर बाद

बोला, ‘तुमने इनको मारा नहीं इनकी भिनभिनाहट सुनकर मेरे कान पक

गए है।'

नौकर (मालिक से)- ‘मच्छरो को तो मैंने कभी का मार दिया। ये तो

उनकी विधवाएं है जो उनकी याद में विलाप कर रही है।'

चुटकुला # 0830

एक व्यक्ति अपने घर में चोरी होने की रिपोर्ट लिखवाने थाने पहुंचा, तो

दरोगा बोला- ‘कितने बजे थे?‘

उस व्यक्ति ने जवाब दिया- ‘जी चार लट्‌ठ मुझ पर बजे थे और पांच मेरे

भाई पर।‘

दरोगा ने झल्लाते हुए कहा- ‘मैं यह पूछ रहा हूं कि घड़ी में कितने बजे

थे?‘

वह व्यक्ति फिर बोला- जी घड़ी तो एक लट्ठ पड़ते ही टूट गई थी।

चुटकुला # 0831

मोहन (रमेश से)- मेरी बेटी का संगीत अभ्यास मेरे लिए लाभकारी सिद्ध

हुआ।

रमेश (मोहन से)- वह कैसे?

मोहन (रमेश से)- मेरा पड़ोसी इसी कारण मकान आधे दामो पर बेच गया

और मैंने उसे खरीद लिया।

चुटकुला # 0832

एक कैदी (दूसरे कैदी से)- तुमसे कोई मिलने नहीं आता है, क्या तुम्हारा

कोई रिश्तेदार नहीं है।

दूसरा कैदी- है तो बहुत, मगर सारे इसी जेल मेे है।

चुटकुला # 0833

संपादक (उम्मीदवार से)- तो तुमने प्रूफरीडर के पद के लिए अप्लाई किया

है। जानते हो, यह कितनी बड़ी जिम्मेदारी है?

उम्मीदवार (संपादक से)- जी सर, अच्छी तरह जानता हूं। आप जो भी

गलती करेगे, उसका दोष मेरे माथे मढ़ेगे और मैं चुप रहूंगा।

जज (चोर से) - अच्छा बताओ, तुमने चोरी की या नहीं?

चोर (जज से)- पर साहब, मैं कैसे बताऊं? यह तो मेरे वकील ही बताएंगे।

इसी के लिए तो मैंने उन्हें फीस दी है।

चुटकुला # 0834

मशीन पर काम कर रहे एक आदमी की उंगली कट गई तो वह चिल्लाने

लगा। वहां भीड़ इकट्ठी हो गई।

तभी उस फैक्टरी का मालिक वहां आया व पूरा मामला देखकर बोला,

‘कमाल है! एक उंगली कट गई तो इतना हंगामा खड़ा कर दिया, जबकि

पिछले महीने ही एक मजदूर की गर्दन मशीन में आ गई थी तो उसने तो

चूं तक नहीं की थी।‘

चुटकुला # 0835

मालिक (नौकर से)- देखो मैं बाजार जा रहा हूं तुम दुकान का ध्यान

रखना। अगर कोई व्यक्ति आकर कोई आर्डर दे तो उसे पूरा करना। कुछ

देर के बाद मालिक आया तो उसने नौकर से पूछा, ‘कोई आया था?‘

नौकर (मालिक से)- जी हां आया था। उसने कहा कि दोनो हाथ ऊपर

उठाकर कोने में खड़े हो जाओ। मैंने आर्डर मान लिया और वह गल्ला

उठाकर चला गया।

चुटकुला # 0836

एक भिखारी ने घर में आवाज लगायी- बाबू जी रोटी मिल जाएगी?

अंदर से आवाज आयी- बीबी घर में नहीं है।

भिखारी - बाबू जी मुझे बीबी नहीं, रोटी चाहिए।

चुटकुला # 0837

महेश (मुकेश से)- मुकेश तुम अपनी कंपनी के एक सफल एजेट हो।

तुम्हारी सफलता का राज क्या है?

मुकेश (महेश से)- जी, जब भी मैं किसी के दरवाजे पर दस्तक देता हूं तो

अंदर से किसी भी उम्र की महिला निकले मैं उससे यही कहता हूं कि मिस

आपकी मम्मी घर में हैं?

चुटकुला # 0838

राकेश (महेश से)- अखबार में पढ़ा है कि तुम्हारी सेठानी मर गई है।

महेश (राकेश से)- हां भई, मर गई। पिछले पांच वर्ष से मैं बुढ़िया की

बिल्लियो पर प्यार लुटा रहा था ताकि वसीयत लिखते समय उसे मेरा

ध्यान भी रहे।

राकेश (महेश से)- तब तो मालामाल हो गए होगे। क्या मिला तुम्हें?

महेश (राकेश से)- उसकी सारी बिल्लियां।

चुटकुला # 0839

जेबकतरा (अपने दोस्त से)- यार मुझे सर्दी का मौसम बिल्कुल अच्छा नहीं

लगता।

दोस्त (जेबकतरे से)- क्यों?

जेबकतरा (दोस्त से)- क्योंकि सभी लोग अपनी जेबो में हाथ डालकर

चलते है।

चुटकुला # 0840

एक महिला (पड़ोसन से)- अरे बहन जरा जल्दी अपना बेलन तो देना।

‘वो‘ आ गए है।

पड़ोसन (बेलन देते हुए)- अच्छा ले जाओ! लेकिन जल्दी वापस कर देना

क्योंकि चिंटू के पापा के भी आने का वक्त हो गया है।

चुटकुला # 0841

ज्योतिषी (महिला से) - तीन माह बाद आपके पति का साया आपके सिर

से उठ जाएगा।

महिला (ज्योतिषी से)- लेकिन उन्हें मरे हुए चार वर्ष बीत गए है।

ज्योतिषी (महिला से)- तब आप बड़े भाई की छाया से वंचित हो जाएंगी।

महिला (ज्योतिषी से)- लेकिन मैं तो इकलौती संतान हूं।

ज्योतिषी (महिला से)- ‘तो फिर आपका छाता जरूर खो जाएगा।‘

ज्योतिषी ने खीझकर कहा।

चुटकुला # 0842

मैंनेजर (अपनी खूबसूरत टाइपिस्ट से)- रात सपने में मैंने दुनिया की

सबसे खूबसूरत लड़की से शादी कर ली।

इतना सुनते ही टाइपिस्ट ने झेपते हुए पूछा- तो क्या बॉस, हम दोनो खुश

थे।

चुटकुला # 0843

दो महिलाएं आपस में बातचीत कर रही थीं।

पहली बोली- मेरे पति दिन भर में बहुत से भूखे लोगो को खाना खिला

देते है।

हां बहन, आजकल देवता जैसे लोग मिलते ही कहां है। तू बहुत ही

भाग्यवान है, जो तुझे ऐसे पति मिले है। वैसे तेरे पति करते क्या है?

दूसरी महिला ने कहते हुए पूछा।

‘वे एक होटल में वेटर है।‘ पहली महिला ने जवाब दिया।

चुटकुला # 0844

संता (बंता से)- बताओ स्वर और व्यंजन में क्या अंतर है?

बंता (संता से)- यही कि स्वर मुंह से बाहर निकलते है और व्यंजन अंदर

जाते है।

चुटकुला # 0845

एक बहरा अपने बीमार मित्र को देखने जा रहा था। रास्ते में वह मन ही

मन सोचने लगा कि ज्यादा बातें करूंगा तो कुछ का कुछ सुनाई देगा

इसलिए कम से कम बोलूंगा। सबसे पहले पूछूंगा कि तबीयत कैसी है?

मित्र कहेगा ठीक है। फिर पूछूंगा कि किसकी दवा चल रही है? वह डॉक्टर

का नाम बता देगा। सोचते-सोचते बीमार का घर आ गया। मित्र से मिलते

ही बहरा बोला, ‘कहो कैसी तबीयत है?‘

बीमार- ‘मर रहा हूं।‘

बहरा - अच्छा ही है। भगवान करे ऐसा ही हो। दवा किसकी चल रही है।

बीमार - यमराज की।

बहरा - अच्छा डॉक्टर है, खाने को क्या बताया है?

बीमार - पत्थर।

बहरा - ठीक है, पचने में हल्के होते है।

चुटकुला # 0846

महिला कैशियर- मुझे कुछ दिन की छुट्टी चाहिए, क्योंकि मुझे ऐसा लग

रहा है कि मेरी सुंदरता कुछ कम हो रही है।

बैक मैंनेजर - क्या मतलब?

महिला कैशियर - क्योंकि अब पुरूषो ने मुझसे पैसे गिनकर लेने शुरू कर

दिये है।

चुटकुला # 0847

सोनू (मोनू से)- आदमी के मुकाबले घोड़े ज्यादा समझदार होते है।

मोनू (सोनू से)- वह कैसे?

सोनू (मोनू से)- क्योंकि जब घोड़ो की दौड़ होती है तो हजारो आदमी वहां

उनकी दौड़ देखने पहुंचते है, लेकिन जब आदमियो की दौड़ होती है तो वहां

एक भी घोड़ा नहीं पहुंचता।

चुटकुला # 0848

दूध वाला- बीबी जी, कल से दूध पचास पैसे महंगा हो जायेगा।

महिला - क्यों, दूध के दाम क्यों बढ़ा रहे हो?

दूध वाला - क्योंकि मुझे भी अब पानी का बिल भरना पड़ता है।

चुटकुला # 0849

एक भिखारी को बैक में घुसते देख चौकीदार बोला, ‘अरे-अरे बाबा आगे

जाओ यहां कुछ नहीं मिलेगा।‘

भिखारी (चौकीदार से)- अरे भैया, मैं यहां कुछ लेने नहीं अपना पैसा जमा

कराने आया हूं।

चुटकुला # 0850

मोहन (बॉस से)- सर! अब तो मेरी सेलरी बढ़ा दीजिए। मेरी शादी हो गई

है।

बॉस (मोहन से)- ऑफिस के बाहर हुई दुर्घटनाओ के लिए हम जिम्मेदार

नहीं है।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 6
  1. रवी जी, इस बार दो चुटकुले मेरे लिए नये हैं। क्या आपके पास ऐसा कोई लिंक है जो आपके पास अब तक के सभी चुटकुले एक साथ मिल जाएं - अच्छा रहेगा, क्योंकि आपके पुराने चुटकुलों मे चंद मुझे बहुत पसंद आए लेकिन वो मुझे याद नही।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रविजी आपने तो चुटकुलों की गंगा ही बहा दी
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुहैब,

    ये सारे चुटकुले अनुगूंज के तहत जमा किए गए थे, उन्हीं को समय समय पर प्रकाशित किया जा रहा है - कुल 1001 चुटकुले हैं. इसका पीडीएफ़ ई-बुक भी प्रकाशित किया था जिसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं:
    1001 चुटकुले पीडीएफ़ ई-बुक डाउनलोड

    उत्तर देंहटाएं
  4. ankit8:40 pm

    dande bajne wala chutcula best tha.

    उत्तर देंहटाएं
  5. हास्‍य का जबरदस्‍त खजाना संजोया है आपने, हंसते-हंसते पेट में दर्द हो गया।

    उत्तर देंहटाएं

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श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,529,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1217,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1995,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,700,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,782,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: चुटकुले 801 से 850
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