शुक्रवार, 16 मई 2008

सीताराम गुप्ता की कविता : टैग


कविता

टैग

-सीताराम गुप्ता


निहायत जरूरी है
एक उम्दा लिबास
बचने के लिए
मौसम की मार से
गरमी-सरदी से, बरसात से
धर्म भी कम जरूरी नहीं
आदमी के लिए
लिबास की तरह ही
पर
लिबास हो या धर्म
जरूरी है देखना
उपयोगिता भी उसकी
उसे ढंग से पहनना
धरण करना
पर
धर्म भी हो गया है
आज के लिबास की तरह
किसे परवाह है
बना हो लिबास
उम्दा कपड़े से
उपयोगी हो मौसम के हिसाब से
या कम से कम
अच्छी हो सिलाई ही
आज
कपड़े और सिलाई की जगह
महत्वपूर्ण हो गया है टैग
टैग करता है निर्धारित
कीमत लिबास की
जरूरी है इंकार कर देना
टैग को लिबास मानने से
और किसी टैग को
मानने से धर्म
इंकार कर देना
बेहद जरूरी है।

-------- साभार - भाषा : मार्च-अप्रैल २००८ से

संपर्क:
सीताराम गुप्ता
ए.डी.-१०६-सी, पीतमपुरा,
दिल्ली-११००३४

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