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कैश जौनपुरी की लघुकथा : मंदिर में झंडा क्‍यों होता है...?

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”डीटीसी सीएनजी लोफ्‍लोर बस में आपका स्‍वागत है. यात्री स्‍टैंड आने से पहले चालक को सूचित करें. यात्री कृपया गेट से हटकर खड़े हों. बस में धूम्रपान करना अपराध है.”

मैं ये डिस्‍प्‍ले मैसेज पढ़ रहा था तभी पीछे से आवाज़ आयी. ”मंदिर में झंडा क्‍यों होता है...? आवाज़ किसी बच्‍चे की थी. बच्‍चा अपने दादा जी के साथ बस में सफर कर रहा था. बस आनन्‍द विहार से महरौली जा रही थी. रास्‍ते में बच्‍चे को मंदिर दिखा. मंदिर पे लहराता हुआ झंडा दिखा और एक सवाल बच्‍चे के मन में पैदा हुआ..........मंदिर में झंडा क्‍यों होता है...?

अब दादा जी को जवाब देना था. दादा जी ने कहा, ”बेटा, मंदिर में ....................... झंडा..........इसलिये होता है.............क्‍योंकि......................... वो.............मंदिर का झंडा होता है.................” अब एक दूसरा सवाल पैदा हुआ. बच्‍चे ने पूछा, ”ये मंदिर का झंडा क्‍या होता है...? अब दादा जी फंस चुके थे. दादा जी ने कहा, ”बेटा, तुमने नदी नहीं देखी.........? बच्‍चा समझ गया कि दादा जी टाल रहे हैं. उसने तुरंत पलटकर जवाब दिया, ”दादा जी, मैंने नदी देखी है. ये यमुना नदी है...” अब दादा जी को कुछ नहीं समझ आया कि बच्‍चे के सवाल का क्‍या जवाब दें.

फिर थोड़ी देर के लिए खामोशी छा गई...................

बच्‍चा पूछता रहा मगर दादा जी ने कुछ नहीं कहा. ”शायद दादा जी भी नहीं जानते थे कि मंदिर में झंडा लगाने की क्‍या जरूरत है. मंदिर तो भगवान का घर होता है. दादा जी ने तो कई मंदिर देखे हैं और कई बार तो झंडा भी अलग होता है. तो क्‍या हर मंदिर का भगवान अलग होता है या इतने सारे भगवान हैं तो हर भगवान ने अपना एक झंडा बना रखा है ताकि पहचान रहे. और अगर ऐसा है तो क्‍या अब भगवान को भी अपनी पहचान साबित करने के लिये झंडे का सहारा लेना पड़ता है.”

शायद दादा जी बुरी तरह उलझ गये थे इस सवाल में कि ..........मंदिर में झंडा क्‍यों होता है...? फिर दादा जी ने बच्‍चे को दूसरी बातों में ऐसा उलझाया कि बच्‍चा थोड़ी देर में ही मंदिर और झंडे की बात भूल गया. मैं इन्‍तज़ार कर रहा था कि शायद दादा जी कोई अच्‍छी वजह बतायेंगे और आज मुझे भी पता चल जायेगा कि ”मंदिर में झंडा क्‍यों होता है...?

मगर अफसोस तब तक उनका स्‍टैंड आ चुका था और दादा जी बच्‍चे को लेकर बस से उतर गये.

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- क़ैश जौनपुरी

नामः क़ैश “जौनपुरी“.

जन्‍मः 5 मई, 1985. जौनपुर, उत्‍तर प्रदेश, भारत.

षिक्षाः सिविल इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा.

भाशा ज्ञानः हिन्‍दी, अंग्रेजी.

साहित्‍य कर्मः कहानी, नाटक, लघुकथा, कविता, गीत, ग़ज़ल आदि.

सम्‍पर्कः qaishjaunpuri@yahoo.co.in

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पढ़ने मे तो मज़ा आ रहा था. हम सोच रहे थे कि कुछ ज्ञान वृद्धि हो जाएगी लेकिन ....... फिर भी जागृति लाने का आभार.

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