रविवार, 9 नवंबर 2008

स्वाति चड्ढा का सुविचार संग्रह

1.निराशा के अंधेरे को दूरकर

आशा का दीप जलाओ।

आपस में स्‍नेह जगा कर

मानवता को अपना धर्म बनाओ

2.प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति में अनेक विशेषताएं छुपी होती है,जिन्‍हें जागृत करके ही व्‍यक्‍ति का जीवन सफल और सार्थक बन सकता

3.सत्‍य और अहिंसा के द्वारा जीवन की हर लड़ाई जीती जा सकती है।

-महात्‍मा गांधी

4.हिंदी देश की एकता की ऐसी कड़ी है,जिसे मजबूत करना प्रत्‍येक भारतीय का प्रथम कर्तव्‍य है

-श्रीमती इंदिरा गांधी

5.हिंदी राजभाषा है अपनी

दें हम इसे प्रतिष्‍ठा

इसके प्रति हम रखे निरंतर

अपनी सच्‍ची निष्‍ठा

6.मदद करने के लिए उठे हाथ दुआ करने वाले हाथों से श्रेष्‍ठ होते है।

7.विचार करके बोलना श्रेष्‍ठता और बोलने के बाद विचार करना मूर्खता है।

8.अपने दोषों तथा कमियों को जान लेना उन पर विजय प्राप्‍त करने का पहला कदम है।

9.तिरंगा हमारा भारतवर्ष की शान है। विश्‍व भर में हमारी संस्‍कृति की पहचान है।

10.व्‍यक्‍ति काम की अधिकता से नहीं, काम की अव्‍यवस्‍था से थकता है।

11. बिना चरित्र के शिक्षा का कोई महत्‍व नहीं है। (सरदार वल्‍लभ भाई पटेल)

12.इंसान के व्‍यवहार की छोटी-छोटी बातें ही उसके चरित्र का आईना होती है।

13.प्रसिद्वि और धन उस समुद्री जल के समान है,जिसे पीने पर प्‍यास और बढ़ती जाती है।
14.हम जितना अधिक अध्‍ययन करेंगे ,उतना ही हमें अपनी अज्ञानता का आभास होगा ।

15.क्रोध और जल्‍दबाजी से व्‍यक्‍ति का कोई काम नहीं बनता,बल्‍कि और बिगड़ जाता है।

16.कभी कभी छोटी सी एक असफलता कई बड़ी सफलताओं के द्वार खोल देती है।

17.दूसरों के साथ वह व्‍यवहार न करें जो हमें अपने लिए पसंद नहीं हो।

18.जीवन एक पाठशाला है जिसमें व्‍यक्‍ति अनुभवों से शिक्षा ग्रहण करता है।

19.प्रत्‍येक अच्‍छा कार्य पहले असंभव लगता है।

20.असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं हुआ।

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