गुरुवार, 27 नवंबर 2008

सूरज तिवारी मलय की कविता : हसरत

suraj tiwari

बनना चाहता हूं

मैं भी, बारिश की

छोटी बूंद

ताकि बुझा सकूं

सूखी हो रही

धरती की प्‍यास

बुझा सकूं प्‍यास

उन किसानों की

जो आज भी आश्रित हैं

बारिश के मेघों पर ॥

बूंद बन बरसने की

चाहत है

बंजर मरूभूमि पर भी

ताकि उग आएं वहां भी

छोटे छोटे पौधे

बरसना चाहता हूं

बूंद बनकर

उन खेतों में

जहां किसानों की

गिरती हैं श्रम की बूंदें ।

जहां से उपजता है

अन्‍न, न सिर्फ अमीरों के लिए

बल्‍कि भारत के

उन गरीबों के लिए भी

जिनकी भूख मिट जाती है

सिर्फ रोटी और नमक खाकर ॥

काष मैं ऐसा कर पाता ॥

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सूरज तिवारी मलय

सहसचिव मनियारी साहित्‍य समिति , लोरमी

जिला-बिलासपुर छत्‍तीसगढ

E-mail - surajtiwarimalay@yahoo.com

surajtiwarimalay@gmail.com

surajtiwarimalay1@rediffmail.com

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