26 अप्रैल 2009

अशोक गौतम का व्यंग्य : बुंदु उठ , लीडर बन

 बुंदु उठ , घराट बंद कर । चुनाव आ गया । खड्‌ड सूख गई । सिर में हाथ मत दे । परेशान मत हो । घराट का स्‍यापा मत कर । वोटर ही मत रह । वोटर होकर बहुत जी लिया । अब लीडर बन । कपीन फैंक । लंगोट कस । घराट में क्‍या रखा है ? लीडरी में बहुत कमाई है । चल, पुश्‍तों की सेफ्‌टी का कर कुछ जत्‍न , बुंदु उठ ,लीडर बन ।

मक्‍की मत पीस । गेहूं मत पीस । जौ मत पीस । चने मत पीस । धर्म निरपेक्ष देश में जनता को धर्म का आटा खिला । धर्म निरपेक्ष देश में जनता को जात का बेसन खिला । शुद्ध आटा मत दे । आटे में बेईमानी मिला । बेसन में मक्‍कारी मिला । सत्‍तू मत खिला । सत्‍तू आत्‍मा को पवित्र रखते हैं । पवित्र आत्‍मा भूखी मरती है । चल बेचते हैं मुर्दों का कफन , बुंदु उठ, लीडर बन ।

पीसाई मत ले । आज तक ली , क्‍या बना ? अब जनता को पीस । मजा आएगा ,बहुत मजा आएगा । रोना छोड़ । धोना छोड़ । शरीफी छोड़ । ईमानदारी छोड़ । अफवाहें फैला । अफवाहें मत सुन । निक्‍कमा हो । बेईमानी कर , बेईमानी देख । उल्‍लू मत बन । उल्लू बना । अपना मुंह काला मत करवा । ईमानदारों का मुंह काला कर । चरित्रहीन हो मना जश्‍न ,बुंदु उठ ,लीडर बन ।

मक्‍की मत साफ कर । दलाली कर । दलाली खा । घराट में मत बैठ । दंगे में शामिल हो। समय की कद्र मत कर । आदर्श नागरिक बन । केवल अधिकारों की पैरवी कर । कर्त्‍तव्‍य को छोड़ जूते मार । अधिकार प्रेमियों का अपना वतन ,बुंदु उठ ,लीडर बन ।

किसी से भी सच बोल मत । यहां सच बोलना पाप है । तिलक लगा । धर्म की आड़ ले । समाज में धर्म के नाम पर दंगे करवा । डट कर पाप कर । किसी से मत डर । मन्‍दिर जा ,पाप धो आ । गुरू़द्वारे जा ,पाप धो आ । चर्च जा , पाप धो आ । धर्म के नाम पर नौटंकी कर । नौटंकी लीडरी के लिए परम जरुरी है । कर्मशील बन । कर्म से भाग । फल की इच्‍छा रख । कामप्रिय बन । सलाम की खा । किसी से मत डर । सबको डरा । मेहनतकशों से नफरत कर । मेहनत कर खाना बुरी आदत है । मेहनत करने वाले भूखे मरते हैं । लोकतन्‍त्र में राजा बन ,महाराजा बन । पर जनसेवक मत बन । मन्‍त्री बन ,सन्‍तरी बन । पर देश भक्‍त मत बन । देश चला ,खुद सो जा । रामभरोसे चल रहा अपना वतन ,बुंदु उठ ,लीडर बन ।

अपनी लीडरी की धार चमका । व्‍यभिचार को पूजा मान । नित नई पूजा कर । कबूतरबाज हो जा । प्रेम का भक्‍त होने का नाटक कर । दिमाग में नफरत के बीहड़ उगा । घराटन को घर से भगा । प्रेमिका को घर शान से ले आ । पराए माल को अपने बाप का माल समझ । इस देश का तू अनमोल रत्‍न ,बुंदु उठ ,लीडर बन ।

शान से तस्‍करी कर । छोटी-मोटी तस्‍करी लीडर को लानत है । अन्‍तरराष्‍ट्रीय तस्‍कर बन । नाम कमा । नाक कटा । नकटा प्रिय लीडर कहलाता है । प्रिय लीडर बन । डर मत , तू एम एल ए है । तू एम पी है । घोटालों के साथ उठ -बैठ । घोटालों में तेरे प्राण बसते हैं । जनता को गोली मार । वह फुद्‌दू है । नैतिकता को कर कब्र में दफन ,बुंदु उठ ,लीडर बन ।

न्‍याय की बात कर । सरकारी जमीन मार । सबका मांस खा । सबके हक मार । पर सबके हकों की पैरवी कर । श्‍ौतान बन । अन्‍याय मत सह । अन्‍याय कर । तेरे कारनामों से चीत्‍कार कर उठे देश का कण-कण , बुंदु उठ ,लीडर बन ।

पंजीकृत लीडर हो जा । देश के स्‍वर्णिम पन्‍नों में अपना नाम लिखवा । देश के विनाश में अपना अमूल्‍य योगदान दे। मुख्‍यधारा से जुड़ । गरीबी को नहीं , गरीबों को खत्‍म कर । बीमार होने का ढोंग कर । बीमारी के बहाने विदेशों में घूम आ । यहां के अस्‍पताल गधों के लिए हैं । हक से जनता के लिए नकली दवा बनवा । डट कर मौत में कमीशन खा । चोर बाजारी के लिए कर अनशन , बुंदु उठ ,लीडर बन ।

मन में नीम रख । सबसे मीठा बोल । सबके गले मिल । सबकी पीठ में छुरा घोंप । सबसे हंस कर मिल । सबसे खुंदक रख । सबको भरोसा दे । किसी पर भरोसा मत कर । मंझधार में भरोसा दे डूबा । खुद किनारे बैठ तालियां बजा । मल्हार गा । भगवान से मत डर । बहादुर बन । बीसियों लोन मार। टैक्‍स चोर । हर विभाग को अपने बाप की प्रापर्टी मान । डाकुओं को गले लगा । देशहित में अपना गिरोह बना । सबको झांसा दे । पर सपने में भी धोखा मत खा । बुरा ही देख । बुरा ही सुन । बुरा ही बोल । बुरा ही सोच । बुरा मत बन । अच्‍छाई से नफरत कर । भाई भतीजावाद का समर्थक बन । हवा में रह । जमीन पर मत चल । सड़ी मानसिकता रख । आदर्शवादी होने का ढोंग कर। गुंडागर्दी को कर समर्पित अपना तन -मन , बुंदु उठ ,लीडर बन ।

धर्म - धर्म रट । लाखों खट्‌ट । अत्‍याचार सहन मत कर । अत्‍याचारी बन । बीमारी बन । महामारी बन । भजन कर । गबन कर । अखबारों की सुर्खियां बन । सभ्रांत हो जा ,चौड़ी छाती तन , बुंदु उठ ,लीडर बन ।

विधान सभा जा । राज्‍य सभा जा । संसद जा । जूते चला । चप्‍पलें चला । जनता को भूखे रख । अपने भत्‍ते बढ़ा । आटा महंगा कर । चावल महंगा कर । पूंजीपतियों से मिल । समाजवाद की स्‍थापना कर । जनहित बेच । कोठे पर लेट । लिपस्‍टिक सस्‍ती कर । पाउडर सस्‍ता कर । नमक पर टैक्‍स लगा । हल्‍दी पर टैक्‍स लगा । लोकतन्‍त्र के मंच पर नंग -धडंग हो मना जश्‍न ,बुंदु उठ , लीडर बन ।

ये देश हमाम है । तू देश की अमर सन्‍तान है । देश के हित बेच । देश बेच । नंगा नाच । नंगा खा । देश नंगों का है । इसी में तेरी भलाई है । इसी में छिपी मलाई है । छाछ जनता में बांट । खुद मक्‍खन चाट । तू स्‍वतन्‍त्र देश का लाट । तुझे करेंगे ऋषि मुनि नमन्‌ ! बुंदु उठ ,लीडर बन ।

बुंदु ! आलस त्‍याग ,चुनाव जीत । सत्‍य -निष्‍ठा की शपथ खा । शुरु हो जा । विरोधियों को पटा ,कुर्सी बचा । चल विदेशी बैंकों के नाम गिन ,बुंदु उठ ,लीडर बन ।

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अशोक गौतम

अपर सेरी रोड , गौतम निवास , सोलन हि प्र

a_gautamindia@rediffmail.com

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