शनिवार, 24 जुलाई 2010

बृजेन्द्र श्रीवास्तव ‘ उत्कर्ष' की भोपाल त्रासदी पर कविता : अर्जुन पुराण

   अर्जुन पुराण      

मौन न रहो, हे अर्जुन!
माया-मोह का बंधन तजकर, अब तो तुझे बोलना  होगा,
सारे जग के सम्मुख अब तो, सारा रहस्य खोलना होगा,
नोटों और वोटों के माफिक, प्राणों का मोल तोलना होगा,
कर्म मार्ग पर चलकर तुझको, मोक्ष का द्वार खोलना होगा ||

मौन न रहो, हे अर्जुन!
तुम तो अर्जुन थे, फिर दुर्योधन का चोला क्यों ओढा था,
लाशों के ढेर लगाने वालों से, रिश्ता क्यों  जोड़ा था,
जिस जनता के रक्षक थे, उसके भक्षक को क्यों छोड़ा था,
इस महाभारत में भी दिल्ली ने,कर्त्तव्यों से मुख क्यों मोड़ा था॥

मौन न रहो, हे अर्जुन!
शकुनी तो परदेशी था,पर ध्रतराष्ट्र-दुशाशन कौन बना था ,
भारत का लहू बहाने में, किसका किसका हाथ सना था ,
भीष्म पितामह सा भारत का, संविधान क्यों पंगु बना था,
धर्म-ज्ञान की शिक्षा देता, ऐसा न कोई कृष्ण जना था ||

मौन न रहो, हे अर्जुन!
अभिमन्यु यदि मरता तेरा,तब भी तुम ऐसा ही करते,
हत्यारे के चरणों में तुम,अपना मस्तक यूँ ही धरते,
वृहन्नला  बन जाते अर्जुन,पर यूँ न दुर्योधन बनते,
सत्ता के चक्कर में पड़कर, इतने प्राणों को न हरते ॥

मौन न रहो, हे अर्जुन!
गांधारी सी अंधी होकर, अब सत्ता क्यों है  मौन खड़ी,
चुनाव हो गया द्युतक्रीडा,क्यों सबको अपनी जीत पडी,
निज स्वार्थो के चक्रव्युह में,क्यों सारी व्यवस्था है जकडी,
अबला है भारत की जनता,क्यों चीरहरण हो घडी-घडी||

 

------

परिचय

नाम: बृजेन्द्र श्रीवास्तव ‘ उत्कर्ष'|

.पिता का नाम : श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव |

माता का नाम: श्रीमती उमा श्रीवस्तव|

जन्म दिवस: 23 जनवरी|

जन्म स्थान: मैथा रेलवे स्टेशन, कानपुर देहात,उ.प्र.|

शैक्षिक योग्यता: एम.ए.; बी.एड.; आई.जी.डी.; पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा|

साहित्य लेखन: श्रंगार और हास्य-व्यंग्य के युवा हस्ताक्षर|गीत, गजल, मुक्तक, कवितायें, हास्य-व्यंग्य

और सम-सामयिक लेख विभिन्न राष्ट्रीय-अन्तर राष्ट्रीय(हिन्दी चेतना, कनाडा व हिन्दी समाचार पत्र,

आस्ट्रेलिया) पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित| राष्टीय कवि सम्मेलनों एवं काव्य गोष्ठियों मे कविता

पाठ|रचनाय़ें एफ एम रेडियों से भी प्रसारित|

ब्लाग लेखन: http://kaviutkarsh.blogspot.com

सम्मान:पर्यावरण संस्था "मनोदृष्टि" ने 'मनोदृष्टि कवि' के रूप में सम्मानित किया|

पता: म.न.-206, टाइप-2, आई.आई.टी., कानपुर 208016, उ.प्र., भारत |

 

E-mail:kaviutkarsh@gmail.com

1 blogger-facebook:

  1. बहुत ही सुन्दर व प्रेरक रचना को पढवाने के लिए धन्यवाद | सार्थक सोच व सार्थक ब्लोगिंग ...

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------