मंगलवार, 20 जुलाई 2010

अविनाश सैनी की कविता - बात की बात

bhawna navarang 5 (Mobile)

हरियाणा में युवाओं की नहीं है अब कोई खैर

खापियों से मोल ले लिया उन्‍होंने ऐसा बैर

मोल ले लिया बैर, कि हक से जीना चाहते

इसीलिए बेमौत, रोज़ कई मारे जाते

ले कानून हाथ में इनके पीछे पड़ गई खाप

अपने घर में पूछ न जिनकी, बन गए सबके बाप

 

हरियाणा में युवाओं का जीना है दुश्‍वार

मँहगा पड़े है उनको करना एक दूजे से प्‍यार

मँहगा पड़े है प्‍यार, जान पर है बन आती

उनके जज़्‍बातों को दुनिया समझ न पाती

राधा-किशन के भक्‍त है देखो कैसे अत्‍याचारी

झूठी शान के नाम पे रौंद रहे हैं खिलती क्‍यारी॥

 

हरियाणा में बनी हैं खापें, देखो खुद भगवान

शादी रोकें, रिश्‍ते तोड़ें, मौत का दें फरमान

मौत का दें फरमान, बचाएं हत्‍यारों को

रोज नई धमकी देती हैं सरकारों को

लोकतंत्र का गला घोंट, संविधान को रही नकार

कमजोरों का बिना बात करती जीना दुश्‍वार॥

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अविनाश सैनी

1355/21 चुन्‍नी पुरा, रोहतक।

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(चित्र – भावना नवरंग की कलाकृति)

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