शनिवार, 31 जुलाई 2010

दामोदर लाल ‘जांगिड़‘ की ग़ज़ल

ग़ज़ल

रोज चीखते अखबार तो, सरकार क्‍या करे।

पसरे हैं भ्रष्‍टाचार तो, सरकार क्‍या करे॥


डिप्‍लोमा, डिग्रियां लिये, तादाद में इतने,

बैठे हैं जो बेकार तो, सरकार क्‍या करे।


सियासत के हर शोबे में मुजरिमान की ऐसे,

हैं हो गयी भरमार तो, सरकार क्‍या करे।


जम्‍हूरियत के नाम से अब मुल्‍क में मेरे,

वो करते कारोबार तो ,सरकार क्‍या करे।


गर खास मोहरों को बचाने में मुल्‍क का ,

होता है बंटाढ़ार तो, सरकार क्‍या करे।


भोपाल गैस काण्‍ड से होते हैं फैसले ,

गर आदिल हैं लाचार तो, सरकार क्‍या करे।


दामोदर लाल ‘जांगिड‘

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