मंगलवार, 10 अगस्त 2010

अवनीश सिंह चौहान के नवगीत


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१. हे स्वरदेवी...

मेरी जड़-अनगढ़ वाणी को
हे स्वरदेवी, अपना स्वर दे!

भीतर-बाहर घना अँधेरा
दूर-दूर तक नहीं सबेरा
दिशाहीन है मेरा जीवन
ममतामयी, उजाला भर दे!

मानवता की पढूँ ऋचाएं
तभी रचूँ नूतन कविताएँ
एकनिष्ठ मन रहे सदा माँ,
आशीषों का कर सिर धर दे!

अपने को पहचानें-जानें
'सत्यम्‌ शिवम्‌ सुन्दरम्‌' मानें
जागृत हो मम प्रज्ञा पावन
हंसवाहिनी, ऐसा वर दे!

२. सबके चरण गहूँ मैं

मेरी कोशिश
सूखी नदिया में-
बन नीर बहूँ मैं

चल पाऊँ
उन राहों पर भी
जिनमें कंटक छहरे
तोड़ सकूँ
चट्टानों को भी
गड़ी हुई जो गहरे

हर राही
मंजिल पा जाए
ऐसी राह बनू मैं

थके हुए को
हर प्यासे को
चलकर जीवन-जल दूँ
दबे और कुचले पौधों को
हरा-भरा
नव-दल दूँ

हर विपदा में-
चिन्ता में
सबके साथ दहूँ मैं

जहाँ-जहाँ पर
रेत अड़ी है
मेरी धार बहाए
नाव चले तो
मुझ पर ऐसी
दोनों तीर मिलाए

ऊसर-बंजर तक
जा-जाकर
सबके चरण गहूँ मैं

३. मन का तोता

मन का तोता
करता रहता
नित्य नए संवाद

महल-मलीदा,
पदवी चाहे
लाखों-लाख पगार
काम न धेले भर का करता
सपने आँख हजार

इच्छाओं की सूची
मेरे
सिर पर देता लाद

अपने आम
बाग़ के मीठे
कुतर-कुतर कर फेंके
किन्तु पड़ोसी का
खट्‌टा भी
चंहके उसको लेके

समझाने पर
करता-रहता
अड़ा-खड़ा प्रतिवाद

विज्ञापन की भाषा बोले
'यह दिल माँगे मोर'
देख-देख बौराए
तोता
देता खीस निपोर

बात न माने
करने लगता
घर में रोज़ फ़साद

4. साधो मन को

नये चलन के
इस कैफ़े में
शिथिल हुईं सब परम्पराएं

पियें-पिलाएं
मौज उड़ायें
डाल हाथ में हाथ चले
देह उघारे
करें इशारे
नैन मिले
औ' मिले गले

मदहोशी में
इतना बहके
भूल गए हैं सब सीमाएँ

झरी माथ से मादक बूँदें
सांसों में
कुछ ताप चढ़ा
हौले-हौले भीतर-बाहर
कामुकता का
चाप चढ़ा

एक दूसरे में
जो डूबे
टूट गईं सब सब मर्यादाएँ

भैया मेरे,
साधो मन को
अजब-गजब है
यह धरती
थोड़ा पानी रखो बचाकर
करते क्यों ऑंखें परतीं

जब-जब मरा
आँख का पानी
आईं हैं तब-तब विपदाएँ




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. परिचय-
अवनीश सिंह चौहान
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जन्म: 4 जून, 1979, चन्दपुरा (निहाल सिंह), इटावा (उत्तर प्रदेश) में
पिता का नाम: श्री प्रहलाद सिंह चौहान
माताका नाम: श्रीमती उमा चौहान
शिक्षा: अंग्रेज़ी में एम०ए०, एम०फिल० एवं पीएच०डी० (शोधरत्) और बी०एड०
प्रकाशन: अमर उजाला, देशधर्म, डी एल ए, उत्तर केसरी, प्रेस-मेन, नये-पुराने, गोलकोण्डा दर्पण, संकल्प रथ, अभिनव प्रसंगवश, साहित्यायन, युग हलचल, यदि, साहित्य दर्पण, परमार्थ, आनंदरेखा, आनंदयुग, कविता कोश डॉट कॉम, हिन्द-युग्म डॉट कॉम, पी4पोएट्री डॉट कॉम, पोयमहण्टर डॉट कॉम, पोएटफ्रीक डॉट कॉम, पोयम्सएबाउट डॉट कॉम, आदि हिन्दी व अंग्रेजी के पत्र-पत्रिकाओं में आलेख, समीक्षाएँ, साक्षात्कार, कहानियाँ, कविताओं एवं नवगीतों का निरंतर प्रकाशन। साप्ताहिक पत्र ‘प्रेस मेन’, भोपाल, म०प्र० के ‘युवा गीतकार अंक’ (30 मई, 2009) तथा ‘मुरादाबाद के प्रतिनिधि रचनाकार’ (2010) में गीत संकलित। मेरी शाइन (आयरलेंड) द्वारा सम्पादित अंग्रेजी कविता संग्रह ' ए स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स' में रचनाएँ संकलित
 
प्रकाशित कृतियाँ: स्वामी विवेकानन्द: सिलेक्ट स्पीचेज, किंग लियर: ए क्रिटिकल स्टडी, स्पीचेज आफ स्वामी विवेकानन्द एण्ड सुभाषचन्द्र बोस: ए कॅम्परेटिव स्टडी, ए क्विन्टेसेन्स आफ इंग्लिश प्रोज (को-आथर), साइलेंस द कोर्ट इज इन सेशन: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर), फंक्शनल स्किल्स इन लैंग्वेज एण्ड लिट्रेचर, ए पैसेज टु इण्डिया: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर)
 
अप्रकाशित कृतियाँ: एक नवगीत संग्रह, एक कहानी संग्रह तथा एक गीत, कविता और कहानी से संदर्भित समीक्षकीय आलेखों का संग्रह आदि
अनुवाद: अंग्रेजी के महान नाटककार विलियम शेक्सपियर द्वारा विरचित दुखान्त नाटक ‘किंग लियर’ का हिन्दी अनुवाद भवदीय प्रकाशन, अयोध्या से प्रकाशित ।
 
संपादन:
प्रख्यात गीतकार, आलोचक, संपादक श्री दिनेश सिंहजी (रायबरेली, उ०प्र०) की चर्चित एवं स्थापित कविता-पत्रिका ‘नये-पुराने’ (अनियतकालिक) के कार्यकारी संपादक पद पर अवैतनिक कार्यरत।
प्रबुद्ध गीतकार डॉ०बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून) की रचनाधर्मिता पर आधारित उक्त पत्रिका का आगामी अंक शीघ्र ही प्रकाश्य। वेब पत्रिका ‘गीत-पहल’ के समन्वयक एवं सम्पादक ।
 
सह-संपादन: कवि ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग’ अभिनंदन ग्रंथ (2009) के सह-संपादक ।
संपादन मण्डल: प्रवासी साहित्यकार सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) अभिनंदन ग्रंथ (2009) के सम्पादक मण्डल के सदस्य ।
सम्मान :
अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, मुरादाबाद (उ०प्र०) से ब्रजेश शुक्ल स्मृति साहित्य साधक सम्मान, वर्ष 2009
संप्रति:
प्राध्यापक (अंग्रेज़ी)
 
स्थायी पता: ग्राम व पो.- चन्दपुरा (निहाल सिंह), जनपद-इटावा (उ.प्र.)-२०६१२७, भारत ।
ई-मेल: , abnishsinghchauhan@gmail.com
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Abnish Singh Chauhan
Lecturer
Department of English
Teerthanker Mahaveer University
Moradabad (U.P.)-244001
*****************************************************
Web Info: www.printsasia.com/BookDetails.aspx?Id=882727714
www.marelibri.com/topic/39-main/books/AUTHOR_AZ/2200
bhavdiya.com/book_detail.php?cat_id=english&&id=161
www.dkagencies.com/doc/from/1023/.../MicroSubjectDetails.html
www.poemhunter.com/abnish-singh-chauhan/
www.poemsabout.com/poet/abnish-singh-chauhan/
http://www.completeclassics.com/p/m/poem.asp?poem=22816623&poet=1036823&num=4&total=6
http://www.completeclassics.com/p/m/poem.asp?poem=22847650&poet=1036823&num=1&total=6
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http://www.actionfigureshq.info/tag/chandra/
http://www.articlesbase.com/literature-articles/social-exclusion-and-exploitation-in-mulk-raj-anand039s-untouchable-a-subaltern-study-2227611.html
http://www.professionalencouragers.info/father-of-the-career-guidance-movement/
http://www.bluemoonpiano.com/monster-cit/
http://kavita.hindyugm.com/2010/05/jalati-samidhayen.html
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http://purava.webs.com
http://geetpahal.webs.com/home.htm
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(चित्र – एल एन भावसार की कलाकृति)

2 blogger-facebook:

  1. अवनीश सिंह चौहान के गीत अपनी माटी से जुड़े हुए है तभी तो वे हमारे मन को छू जाते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. Pervinder Choudhary11:59 am

    Maine Abnish Singh Chauhan ke navgeet ko pdha, unki rachna achchhi hone ke sath sath man ko chhone bali hai.

    उत्तर देंहटाएं

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