हरीश नारंग की देश भक्ति पूर्ण रचना : हमें वतन पे मान है

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हमें वतन पे मान है

गर्व से कहते हैं हम, हमें वतन पे मान है,

सारे जहां से अच्छा देश, अपना हिन्दुस्तान है ।

एक मां के जाए हैं, हम हिन्द की संतान है,

चाहे सिख-ईसाई, चाहे हिन्दु-मुसलमान हैं,

एक हाथ में है गीता, एक में कुरान है ।

गर्व से कहते हैं हम----------------------

 

भेद भाव कुछ नहीं है, भाईचारा है यहां,

मन्दिर, चर्च, मस्ज़िद है, गुरुद्वारा है यहां,

अपने वतन में हर धर्म का, एक सा सम्मान है ।

गर्व से कहते हैं हम-----------

 

इतिहास दे रहा गवाही, कह रहा कहानियां,

कैसे कैसे वीरॊं ने, दी हैं यहां कुर्बानियां,

स्वर्ण अक्षरॊं में लिखीं, उनकी दास्तान है ।

गर्व से कहते हैं हम----------------

 

भिन्न भिन्न धर्म-जात, प्रांत व प्रदेश हैं,

भाषायें अनेक यहां, ऒर अनेक भेष हैं,

अनेकता में एकता, हमारी पहचान है ।

गर्व से कहते हैं हम-------------------

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हरीश नारंग
१५, अरावली अपार्टमेंट्स
अलकनंदा, कालकाजी
नई दिल्ली -१९

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3 टिप्पणियाँ "हरीश नारंग की देश भक्ति पूर्ण रचना : हमें वतन पे मान है"

  1. एक अच्छी कविता समय के अनुसार बहुत बहुत बधाई

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  2. आपने
    बहुत उम्दा पोस्ट लगाई है।
    लोकहित की बात उठाई है।
    स्वतंत्रता दिवस की
    हार्दिक बधाई है ॥
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  3. सुन्दर रचना.... सुन्दर सन्देश| स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये|

    उत्तर देंहटाएं

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