दामोदर लाल जांगिड़ की कविता : अब ले लो अवतार कन्‍हाई

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जन्माष्टमी पर विशेष:

अब ले लो अवतार कन्‍हाई

संतन का संकट हरने को।

दुष्‍टों का मर्दन करने को ॥

तब तुमने अवतार लिया था।

कितनों का उद्धार किया था॥

फिर बढ़ी हैं कंसों की ठकुराई।

अब ले लो अवतार कन्‍हाई।

 

कितना पापाचार बढ़ा हैं।

चहुँ दिश हाहाकार मचा हैं॥

पाप प्रक्षालन करने वाली।

पावन नदियां गौरवशाली॥

गंगा यमुना भी उकताई।

अब ले लो अवतार कन्‍हाई

 

सूना हैं गोकुल वृंदावन।

नंद यसोदा का घर आंगन॥

मत हाल पूछ राधा के मन का।

हैं बुरा हाल मीरा जोगन का ॥

हुए दिशाहीन पाण्‍डव सब भाई।

अब लेलो अवतार कन्‍हाई॥

 

रसिक तेरा रसखान पियारा।

जागा हैं उ द्धव दुखियारा॥

सूर के सुर भी मुखर हो गये।

तुम क्‍यों गाढ़ी नींद सो रहे॥

फिर नरसी ने खड़ताल उठाई।

अब लेलो अवतार कन्‍हाई॥

3 टिप्पणियाँ "दामोदर लाल जांगिड़ की कविता : अब ले लो अवतार कन्‍हाई"

  1. आप की रचना 03 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/09/266.html


    आभार

    अनामिका

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  2. बेनामी4:49 pm

    vah kya kahane

    उत्तर देंहटाएं

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