शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ की बाल कविताएँ

जानवरों के उसूल‌


एक छछूंदर पेट पहिनकर,
गया कराने शादी।
उसके साथ‌ गयी जगंल की
आधी सी आबादी।

मिस छछूंदर लेकर आईं
फूलों की वरमाला,
छोड़ छछूंदर,चूहेजी को
पहना दी वरमाला।

 
देख तमाशा,छछूंदर का
भेजा ऊपर सरका,
ऐसा लगा भयंकर बादल
फटा और फिर बरसा।

 
बोला अरी बावरी तूने
ऐसा क्यों कर डाला,
मुझे छोड़कर चूहे को
क्यों पहना दी वरमाला।

 
वह बोली रे मूर्ख छछूंदर
पेंट पहिन क्यों आया,
जानवरों के क्या उसूल हैं
तुझे समझ न आया
सभी जानवर रहते नंगे
यह कानून बना है,
जो कपड़े पहिने रहते
उनके संग ब्याह मना है।

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सही रास्ते चलना सीखो

इधर उधर न व्यर्थ भटकना।
चलना,सही रास्ते चलना।

अपना एक उद्देश्य बनाओ
आगे कदम बढ़ाते जाओ।


लेकर मनमें द्रढ़ विश्वास,
बढ़े चलो मंजिल के पास।
पग पग में अवरोध मिलेंगे,
अपने लोग विरोध करेंगे।

 
रोपेंगे काँटे रस्ते में,
नाग मिलेंगे गुल दस्ते में।
पर इच्छा शक्ति के आगे,
जैसे भूत छिटककर भागे।
बाल न बाँका कोई कर पाये,
बिना डरे जो बढ़ता जाये।

 
सुविचार जो रखता मन में,
नई ऊर्जा आती तन में।
काम सदा वह अच्छे करता,
पीड़ायें गेरों की हरता।

 
जग से न्यारे ऐसे लोग,
सबको प्यारे ऐसे लोग।
बच्चो तुम भी ऐसे बनना,
नाम देश का रोशन करना।

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प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ 12 शिव‌म‌ सुंद‌र‌म‌ न‌ग‌र‌ छिंद‌वाड़ा [म‌ प्र]

6 blogger-facebook:

  1. दूसरे प्रकार की कविता पढ़कर बच्चे भाग जाएंगे...पहले प्रकार की कविता पढ़कर पास आएंगे।
    ,,बच्चों को साहित्य से जोड़ने के लिए पहले प्रकार की कविता का सृजन जरूरी है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने तो दोनों ही कवितायेँ बहुत सुंदर रची हैं....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर.
    दशहरा की हार्दिक बधाई ओर शुभकामनाएँ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी11:59 am

    मेरे बाल गीतों के लिये बधाई देने वाले प्रशंसकों को धन्यवाद,दशहरा..दीवाली की शुभकामनायें|


    प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

    उत्तर देंहटाएं

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