गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य - पति एक घरेलू नौकर

उस दिन हिन्दी साहित्य के एक आचार्य के घर पर बैठा हुआ था । वे रोटेशन आफ हैडशिप की कृपा में विश्वविद्यालय में अस्थायी विभागाध्यक्ष थे ! और विभागाध्यक्ष व एम.ए. हिन्दी होने के कारण चिन्तित थे उनकी चिन्ता का विषय अत्यन्त महत्वपूर्ण था, 'हिन्दी शोध की गिरती हुई हालत' वे कह रहे थे । ''अब शोध का स्तर इतना गिर गया है कि अब और नहीं गिर सकता ।''

मैंने कहा 'यह तो अत्यन्त सन्तोष का विषय है । चलो कहीं जाकर स्थिर तो हुआ, चाहे भाड़ में जा कर ही ऐसा हुआ ।''

लेकिन मेरी चिन्ता का विषय दूसरा है वे फिर प्रस्फुटित हुए, अब छात्रों को नया विषय क्या दूं प्रतिवर्ष मुझे छात्रों को विषय बांटने होते हैं और इस वर्ष विषयों का अकाल है''

मैंने कहा इस बार शोध प्रबन्ध ''पति एक घरेलू नौकर'' नाम से लिखवाइये । और हिन्दी साहित्य घरेलू नौकरों पर लिख डालिये ।

बात उनके दिमाग में जम गई । उनके शोध प्रबन्ध के कुछ हिस्से मेरे हत्ये चढ़ गये, आपकी सेवा में प्रस्तुत है । औसत पति पति कम और घरेलू नौकर ज्यादा होता है । एक लतीफा है, एक महिला ने घरेलू नौकर से साक्षात्कार के दौरान पूछा :-

''तुम को खाना बनाना आता है''

''तुम बच्चों को रख लोगे''

''कपड़े धो दोगे''

''बर्तन साफ कर दोगे''

उम्मीदवार ने जवाब दिया - बहनजी आपको घरेलू नौकर नहीं पति की आवश्यकता है''

अमेरिका में किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार 50 प्रतिशत पति वहां रोज पिटते हैं, 25 प्रतिशत यदा कदा और बचे हुए 25 प्रतिशत ने प्रश्न का जवाब देने से मना कर दिया कमी यही स्थिति दुनिया के अन्य देशों की भी है ।

भारत एक विकासशील देश है, इस कारण यहां स्थिति अभी विस्फोटक नहीं है, पति पहली तारीख को पूरा वेतन देकर पिटने से बच जाता है । फिर महीने भी वह पत्नी के पीछे घूमता रहता है ।

शादी के बाद पति जो काम सबसे ज्यादा करता है, वह पत्नी द्वारा खरीदे गये सामानों को घर पहुंचाना और बिलों का चुकारा करना ।'

इसके बाद समय मिले तो दफ्तर जाना या बच्चों को खिलाना ।''

सिनेमा हाल में बच्चों को चुप करना उन्हें बाथ रूम कराना आदि कार्य तो सभी पति करते ही हैं ।

कुछ समझदार पत्नियां पतियों से अपने निर्देशन में खाना बनवाती हैं परिणामस्वरूप अन्त में होटल से खाना आता है ।

कई बार पत्नी की सहेलियों हेतु चाय, काफी या नास्ते का इन्तजाम करना या पत्नी को ब्यूटी क्लिनिक लेडीज क्लब जाना हो तो बच्चों को रखना आदि कार्य करना तो आम बात है ।

इस सर्वेक्षण के दौरान कुछ ऐसे पतियों से भी मुलाकात हुई जो पति कम और गधे ज्यादा नजर आते थे लगभग सभी इस घरेलू नौकरी से छुटकारा पाना चाहते थे । कुछ तो आत्महत्या के असफल प्रयास भी कर चुके थे । उन्हें सांत्वना देकर आगे चलते हैं ।

घरेलू खर्चे में बचत करने का सबसे बढ़िया और कारगर ढ़ंग है, नौकर को निकालो और पति को पालतू बनालो वैसे भी शादी के बाद पति शत प्रतिशत पालतू (फालतू) नजर आता है ।

एक नाटक में पति महाराज वास्तव में रसोईघर के महाराज बना दिये गये और परिणामस्वरूप नाटक के लिये एक दूसरा पति एकत्रित किया गया ।

अगर पति को कुत्ता प्रिय है तो घरेलू नौकर उर्फ पति का कर्तव्य है कि वह भी कुत्ते-कुत्तियों या बकरी से प्यार करे । कही ऐसा न हो कि घर पर महाभारत हो और आपकी शान में बट्टा लगे । पड़ोसी को कभी पता नहीं लगना चाहिये कि आप घर पर सो रहे हैं या साड़ी पेटी कोट पर साबुन लगा रहे हैं या झाडु बुहार रहे हैं या रसोई में सब्जी काट रहे हैं, तभी आप सफल और घरेलू नौकर बन सकेंगे, आप सभी सफल घरेलू नौकर बन सकें, इन्हीं शुभ कामनाओं सहित ।

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यशवन्त कोठारी

86, लक्ष्मीनगर ब्रह्मपुरी बाहर

जयपुर 302002

फोन 2670596

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