रविवार, 27 फ़रवरी 2011

सत्यवान वर्मा सौरभ के दोहे

दोहे-

1- तू भी पाएगा कभी फूलों की सौगात।

धुन अपनी मत छोड़ना सुधरेंगे हालात।

 

2- बने विजेता वो सदा ऐसा मुझे यकीन।

आँखों आकाश हो पांवों तले जमीन।।

 

3- जब तुमने यूँ प्यार से, देखा मेरे मीत।

थिरकन पांवों में सजी, होंठों पे संगीत।।

 

4- तुम साथी दिल में रहे, जीवन भर आबाद।

क्या तुमने भी किया, किसी वक्त हमें याद।।

 

5- लिख के खत से तुम कभी,भेजो साथी हाल।

खत पाए अब आपका, बीते काफी साल।।

 

6- हिन्दी हो हर बोल में,हिन्दी पे हो नाज।

हिन्दी में होने लगे,शासन के सब काज।।

 

7- हिन्दी भाषा है रही,जन-जन की आवाज।

फिर क्यों आंसू रो रही,राष्ट्रभाषा आज।।

 

8- मन रहता व्याकुल सदा,पाने माँ का प्यार।

लिखी मात की पातियां,बांचू बार हजार।।

 

9- बना दिखावा प्यार अब, लेती हवस उफान।

राधा के तन पे लगा, है मोहन का ध्यान।।

 

10-आपस में जब प्यार हो, फ ले खूब व्यवहार।

रिश्तों की दीवार में, पड़ती नहीं दरार।।

 

11-चिट्ठी लायी गांव से, जब राखी उपहार।

आँखें बहकर नम हुई,देख बहना का प्यार।।

 

12-लोकतंत्र अब रो रहा,देख बुरे हालात।

संसद में चलने लगे, थप्पड़-घूंसे-लात।।

 

13-नहीं रहे मुंडेर पे, तोते-कौवे-मोर।

डूब मशीनी शोर में, होती अब तो भोर।।

 

14-सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गांव।

पंछी उड़े प्रदेश को, बांधे अपने पांव।।

 

15-ख़त वो पहले प्यार का, देखूं जितनी बार।

महका-महका-सा लगे, यादों का गुलजार।।

 

16-बन के आंसू बह चले, जब हृदय की पीर।

तनवा काशी-सा लगे, मनवा बने कबीर।।

 

17-अपना सब कुछ त्याग के, हरती नारी पीर।

फिर क्यों आँखों में भरा,आज उसी के नीर।।

 

18-कलयुग के इस दौर में, ये कैसा बदलाव।

सगे-संबंधी दे रहे, दिल को गहरे भाव।।

 

19-मात-पिता के वेश में, जानो तुम रे राम।

पाएगा तू क्या भला, जाकर काशी-धाम।।

 

20-आजादी के बाद भी,देश रहा कंगाल।

जेबें अपनी भर गए, नेता और दलाल।।

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3 blogger-facebook:

  1. [सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गांव।
    पंछी उड़े परदेस को, बांधे अपने पांव।। ]
    अच्छे दोहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर अतिसुन्दर ब्यूटीफुल वर्मा जी welldan sir

    उत्तर देंहटाएं

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