शनिवार, 19 मार्च 2011

गणेश पाण्‍डेय की लंबी कविता - जापानी बुखार

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जापानी बुख़ार

हे बाबा

किसका है यह

जो अभी - अभी था

और इस क्षण नहीं है

जिसके मुखड़े के बिल्‍कुल पास

बिलख रहे हैं परिजन और स्‍वजन

राहुल - राहुल कह कर

 

किसका है यह नन्‍हा - सा

राजकुमार

जिसे अपनी छाती से लगाये

चूमती जा रही है बेतहाशा

एक लुटी-लुटी - सी बदहवास युवा स्‍त्री

जिसकी पथराई आँखों से झर रहे हैं

आँसू

झर-झर-झर

 

कौन है यह

अटूट विलाप करती हुई

अभागी कोमलांगी

जिसे अड़ोस - पड़ोस की बुजुर्ग औरतें

चुप करा रही हैं -

यशोधरा - यशोधरा कह कर

यह किसकी यशोधरा है बाबा

किसका है राहुल यह

तुमसे क्‍या नाता है

 

पिपरहवा के किसी अहीर

और गनवरिया के किसी कोंहार से

इस कालकथा का क्‍या रिश्‍ता है

कितने राहुल हैं बाबा

कितनी यशोधरा

 

ढाई हजार साल बाद

यह कैसी पटकथा लिख रहा है

काल

कपिलवस्‍तु के एक - एक गाँव में

कपिलवस्‍तु के बाहर गाँव - गाँव में

फूस की झोपड़ियों

और खपरैल के कच्‍चे - पक्‍के मकानों में

इक्‍कीसवीं सदी के एक - एक राहुल को

चुन - चुन कर

कैसे डँस लेता है काल

मच्‍छर का रूप धर कर

 

क्‍या पहले भी मच्‍छर के काटने से

मर जाते थे कपिलवस्‍तु के लोग

क्‍या पहले भी धान के सबसे अच्‍छे खेतों में

छिपे रहते थे जहरीले मच्‍छर

और देखते ही फूल जैसे बच्‍चों को

डँस लेते थे ऐसे ही

जापानी बुख़ार - जापानी बुख़ार

कह - कह कर

 

हमारे पुरखों के पुरखों के पुरखे

शालवन और पीपल के पेड़ वाले

बाबा

आज भी जिस जापान में बजता है

तुम्‍हारे नाम का डंका

सीधे वहीं से फाट पड़ी है यह महामारी

तीर्थों के तीर्थ बुद्ध प्रदेश में

पूर्वी उत्तर प्रदेश में

 

शोक में डूबी हुई है

यह विदीर्ण धरती

जहाँ - जहाँ पड़े हैं

तुम्‍हारे चरणकमल

श्रावस्‍ती हो या मगध

कपिलवस्‍तु हो या कोसल

लुम्‍बिनी हो या कुशीनारा

या हो सारनाथ

हर जगह है तुम्‍हारा राहुल

अनाथ

 

आमी हो या राप्‍ती

सरयू हो या गंगा या कोई और

जिन - जिन नदियों ने छुए हैं

तुम्‍हारे पांव

डबडब हैं यशोधरा के आँसुओं की बाढ़ से

देखो तो कैसे कम पड़ गया है

तुम्‍हारी करुणा का पाट

तुम्‍हीं बताओ बाबा

क्‍या

मेरी माँ यशोधरा

मेरी चाची यशोधरा

मेरी बुआ यशोधरा

मेरी दादी

मेरी परदादी की परदादी

यशोधरा के असमाप्‍त रुदन से

जीवित हैं इस अंचल की नदियाँ

 

क्‍यों नहीं सूख जाती हैं ये नदियाँ

क्‍यों नहीं खत्‍म हो जाता है

राहुल की चिन्‍ता न करने वाला

राजपाट

क्‍यों नहीं हो जाता सिंहासन को

जापानी बुखार

 

बोलो बाबा

कुछ तो बोलो

हे मेरे अच्‍छे बाबा कुछ तो नया बोलो

यशोधरा के महादुख पर रोशनी डालो

आलोकित करो पथ

 

क्‍या गोरखपुर क्‍या देवरिया

और क्‍या महराजगंज

क्‍या सिद्धार्थनगर

क्‍या अड़ोस - पड़ोस के जनपद

क्‍या पडोस के बिहार के गांव-गिरांव

और क्‍या नेपाल बार्डर - अन्‍दर

हर जगह पसरा हुआ है

मौत का सन्‍नाटा

और डर

घर - घर में कर गया है घर

 

किसी

नई - नई हुई माँ से

उसे रह-रह कर पुकारती हुई

उसकी नटखट पुकार को

छीन लेना

सहसा

किसी

पिता की डबडब आँख से

उसके चाँद-तारे को

अलग कर देना

किसी मासूम तितली से

एक झटके में

उसके पंख नोच लेना

और गेंदा और गुलाब से

उसकी पंखुड़ियों को लूटकर

मसल देना

किसी कविता का अंत है

कि जीवन की अवांछित विपदा

कि सभ्‍यता का कोई अनिवार्य शोकगीत

बोलो बाबा

 

क्‍या है यह

जपानी बुखार है तो यहां क्‍यों है

क्‍यों पसंद है इसे सबसे अधिक

इसके फंदेनुमा पंजे में

गिरई मछली की तरह तड़प-तड़प कर

शांत हो जाने वाले

इस अंचल के विपन्न , हतभाग्‍य

और दुधमुंहे

 

यह कोई बुखार है

बुखार है तो उतरता क्‍यों नहीं

महामारी है महामारी

नई महामारी

सबसे ज्‍यादा नये पौधों को

धरती से विलग करने वाली

मौत की तेज आंधी है

बुझाये हैं जिसने

इस अंचल के

हजारों नन्‍हे कुलदीप

 

कहां हैं मर्द सब

बेबस

और विलाप करती हुई मांओं की गोद

शिशु शवों से पाट देने वाला

हत्‍यारा जापानी बुखार

बचा हुआ है कैसे अबतक

कहां है पुलिस

और कहां है सेना

क्‍यों नहीं करती इसे गिरिफ्‍तार

जिंदा या मुर्दा

कोई विपक्ष है

है तो क्‍यों नहीं मांगता

जीने के अधिकार की गारंटी

कोई सरकार है कहीं

है तो कहां है

 

आये हाईकमान

कोई भारी-भरकम मंत्री-संत्री

कोई राजधानी का पत्रकार आये

और

टीवी पर जिंदगी की दो बूंद देने वाले

महानायक को पकड़कर लाये

कोई तो बतलाये-

जापान में एटमबम से

कितने शिशुओं की आंखें हुईं बंद

वर्ल्‍ड टे्रड सेंटर पर हुए हमले में

मारे गये कितने अमेरिकी

आखिर कितना है अभी यहां कम

 

आने से कतराता है

सरकार का मुखिया

करता है वक्‍त का इंतजार

और हिसाब-किताब

अस्‍पतालों और सेहत का महकमा

पता नहीं किस अहमक के जिम्‍मे है

क्‍या शहर और क्‍या देहात

क्‍या धान के खेत

और क्‍या गड्‌ढे का पानी

किस सूअर

और किस मच्‍छर की बात करें

हर कोनें-अंतरे में बठी हुई है मौत

सफेद लिबास में

 

एक कहता है

हेलीकाप्‍टर में बैठकर

अपने नुकीले नाखूनों वाले पंजे से

छिड़केंगे दवा

गांव-खेत , ताल-पोखर

चल चुकी है राजधानी से

दवा लगी मच्‍छरदानियों की भारी खेप

हर मुश्‍किल में आपके साथ है

एक खानदानी पंजा

 

दूसरा

पहले शंख बजाता है फिर गाल-

बुखार जापानी हो या पाकिस्‍तानी

मार भगायेंगे

मर्ज कैसा भी हो

काफी है छूमंतर होने के लिए

कमल की पंखुड़ियों से बनी

एक गोली

 

तीसरा आता है बाद में

रहता है सरकार में मगन

कहता है कुछ करता है कुछ

मिनट-मिनट पर सोचता है

नफा-नुकसान

क्‍या खूब फबती है

उसकी दस लाख की गाड़ी पर

हरे और लाल रंग के मखमल जैसे

छोटे से झण्‍डे में कढ़ी हुई

सुनहली साइकिल

जिसके पास खड़ा होकर

किसी पुराने दर्द भरे गाने की तरह

कहता है-

जो हुआ उसके लिए बेहद अफसोस है

टीके और दवा का करते हैं इंतजाम

लीजिए फौरन से पेश्‍तर

ले आया हूं आठ करोड़

बस पकड़े रहें

साइकिल की मूठ

 

आते हैं एक से बढ़कर एक

हाथी नहीं आता

मुमकिन है कभी आये हाथी

गिरते-पड़ते

चाहे हाथी के हौदे पर आये

कोई गुस्‍सैल

चिंघाड़ते हुए-

नहीं-नहीं , यह नहीं जापानी बुखार

न इंसेफेलाइटिस न मस्‍तिष्‍क ज्‍वर

यह तो है सीधे-सीधे

मनुवादी बुखार

कमजोर तबके पर है जिसकी ज्‍यादे मार

 

कोई नहीं आता ऐसा

कोई वैद्य कोई डाक्‍टर

कोई लेखक कोई कलावंत

जीवन का कोई इंजीनियर

कोई पथ-प्रदर्शक

कोई माई का लाल

माई से कहने-

घबड़ाओ नहीं माई

लो

मेरी त्‍वचा की रूमाल से

पोंछ लो अपने आंसू

हर पंजे से बचायेंगे

बचायेंगे कमल से

साइकिल से बचायेंगे

बचायेंगे हाथी से

शर्तिया बचायेंगे माई

इस भगोड़े जापानी बुखार से

सूअर से बचायेंगे

बचायेंगे मच्‍छर से

सबसे बचायेंगे

माई ।

---

 

परिचय-

गणेश पाण्‍डेयः

जन्‍मः 13 जुलाई 1955, तेतरी बाजार, सिद्धार्थनगर (उ.प्र.)

शिक्षाः एम.ए., पी-एच.डी.।

कृतियां-1-अटा पड़ा था दुख का हाट(कविता संग्रह)2-जल में (कविता संग्रह) 3-जापानी बुखार(कविता संग्रह) 4-परिणीता(कविता संग्रह)5-अथ ऊदल कथा(उपन्‍यास)6-पीली पत्तियां(कहानी संग्रह)7-आठवें दशक की हिन्‍दी कहानी(शोध)8-रचना,आलोचना और पत्रकारिता(आलोचना)।

साहित्‍यिक पत्रिका ‘यात्रा' का संपादन।सम्‍प्रति- प्रोफेसर, हिन्‍दी विभाग, दी.द.उ. गोरखपुर विश्‍वविद्यालय, गोरखपुर-273009.

---

 

(चित्र - अमृतलाल वेगड़ की कलाकृति)

3 blogger-facebook:

  1. बेहद मार्मिक वर्णन किया है पूर्वांचल में फैली महामारी का..

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत जीवंत चित्रण लगा जैसे आँखों के सामने हो रहा है सब .....मन भर आया ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. Acha laga bahut chitran vara laga ....
    Aakhen var aai...

    उत्तर देंहटाएं

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