सोमवार, 14 मार्च 2011

शुभ्रा दास, चित्ररंजन शाहा और शिवराम दास के शिल्प

शुभ्रा दास ने अपने शिल्पों को सृष्टि से रागात्मक रिश्ता बनाकर उसे अपनी तरह से रचने की कोशिश की है. नारी का स्वरूप प्रकृति से मिलता जुलता है - सृजन, ममत्व और पालनहार के रूप में. शुभ्रा के कुछ शिल्प -

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चित्ररंजन शाहा के शिल्पों में प्रकृति और उससे जुड़ी पर्यावरणीय समस्याएँ बेहद खूबसूरती से उभारी गई हैं. कुछ शिल्प:

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शिवराम दास के शिल्पों की विषय वस्तु है सूअर. वैसे तो सूअर को निकृष्ट माना जाता है, मगर हिंदू पौराणिक कथाओं में ईश्वर का वाराह रूप वंदनीय है. गंदगी में लोटते सूअरों से किसी को भी घृणा हो सकती है. मगर शिवराम दास के सूअर शिल्प बेहद ही प्यारे हैं और इन्हें देख कर सूअरों से प्यार हो सकता है. और, यही मानवीयता है, जिसे अपने शिल्पों के जरिए उभारने में शिवराम सफल रहे हैं. कुछ शिल्प:

SHIVRAM DAS

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3 blogger-facebook:

  1. बेहतरीन चित्रकला…………एक से बढकर एक हैं…………बिल्कुल जीवन्त लग रही हैं।

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  2. तीनों कलाकारों के शिल्प खूबसूरत हैं।
    सूअर भारतीय जैसे परिवेश में ही गंदा दिखता है, क्योंकि यहाँ इसे ऐसे ही छोड़ कर रखा जाता है कहीं से भी गन्दगी खा लेगा। जर्मनी और कुछ अन्य यूरोपियन देशों में इसे अच्छे भाग्य का प्रतीक समझा जाता है। बच्चों की गुल्लक तो Piggy Bank के नाम से मशहूर है ही पश्चिमी देशों में।

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