गुरुवार, 31 मार्च 2011

अंतस सिंग की प्रेम कविताएँ : नारी पथ भटक गई है...

नारी पथ

तुम कभी समानता की बात करती हो
तो कभी बदलाव की ...
या कभी मर्दों से कंधे से कन्धा मिलाने की ...
पर जब में कहता हूँ कि

आज सब्जी बाज़ार से तुम लाओ

तो कह देती हो की तुम लड़के हो ..

 

बस में खड़े खड़े मैं

कितना भी थक जाऊं

वो कभी सीट नहीं छोड़ती ..
किसी थके हुए मर्द को

लेडीज़ सीट में बैठा देख

उसके मन में कभी

दया की भावना नहीं आती

और बड़ी निर्ममता से

उठा कर खुद बैठ जाती है..
उसमें उसे अपनी

जीत का एहसास होता है

मानो कोई सिंहासन

हासिल कर लिया हो.
नारी पथ भटक गयी है...

----

मन है कि

मन है कि तुम्हें मैं

साइकल पर आगे बिठाकर

हरे भरे जनपथ पर

साथ घुमाऊं ..

इंडिया गेट दिखाऊं..


साइकल चलाते चलाते

जब में हांफ़ने लगूं

तो मेरे गर्म सासों की आवाज़

तुम्हारे कानो में पहुंचे ..
हफ -फ -फ-हफ -फ -फ

( संघर्ष से भरा रोमांतिसिस्म)

--

 

तुम्हारे दोमुंहे बाल..

तुम्हारे दोमुंहे बाल

अच्छे लगते हैं ..

मैगी में पड़ जाये

तो भी मुझे बुरा नहीं लगता.

नूडल समझ कर

उसे भी निगल लेता हूँ

पर शादी के बाद यह सब

मुझे इरिटेट करेंगे..

---

हर जगह दिखती हो

राह चलते हर एक कपल में

तुम्हें और अपने आप को देखता हूँ ..
तुम कभी भोली

तो कभी कमीनी

तो कभी खर्चीली दिखती हो.
सुबह सुबह ऑफिस के लिए

जब अपने आप को

बाथरूम में धकेलता हूँ

तो सिंथोल में तुम्हे देखता हूँ..
तुम कभी भरी भरी तो

कभी गली गली दिखती हो..

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अंतस की और भी कविताओं और ग्राफ़िक्स का आनंद लें उनके ब्लॉग द लेज़ी आर्टिस्ट गैलरी http://antaswork.blogspot.com/ पर.

7 blogger-facebook:

  1. बहुत अच्छे डियर..... मौलिक है ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुम कभी भरी भरी तो
    कभी गली गली दिखती हो..

    आपके हाथ काफी संवेदनशील हैं, लगता है बहुत कुछ छुआ है...क्‍या पता यह सच भी हो। वैसे कि‍सी भी व्‍यक्‍ि‍त के बाद की हकीकतों को कवि‍ताओं में सीधा सीधा लि‍खा भी नहीं जा सकता तो अप्रत्‍यक्ष अभि‍व्‍यक्‍ति‍...भड़ास नि‍कालने की क्षमता हो तो...इस तरह आप नि‍रन्‍तर लि‍खते रह सकते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. thankyou so much for honoring me :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहद खूबसूरत रचनाएं.... वाह !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बढिया रचनायें हैं।

    उत्तर देंहटाएं

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