मंगलवार, 26 जुलाई 2011

विजय वर्मा के गरजते बरसते हाइकु - बारिश का मौसम

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सुबह  से ही 

खूब हुई बारिश 

चेहरे खिले.

 

खेतों की ओर

हल-बैल लेकर 

किसान चले.

 

बुनने लगे 

सपने, जैसे कोई 

खजाना मिले.

 

आज खुश है 

किसान भगवान् 

धरती गीले.

 

फिर मिलेगा 

भरपूर फसल 

फल रसीले.

 

पेय जल की

भी ना होगी किल्लत.

आकंठ  पी ले.

 

--


v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

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(चित्र - निवेदिता श्रीवास्तव की कलाकृति)

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