विजय वर्मा के गरजते बरसते हाइकु - बारिश का मौसम

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

image

सुबह  से ही 

खूब हुई बारिश 

चेहरे खिले.

 

खेतों की ओर

हल-बैल लेकर 

किसान चले.

 

बुनने लगे 

सपने, जैसे कोई 

खजाना मिले.

 

आज खुश है 

किसान भगवान् 

धरती गीले.

 

फिर मिलेगा 

भरपूर फसल 

फल रसीले.

 

पेय जल की

भी ना होगी किल्लत.

आकंठ  पी ले.

 

--


v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

--

(चित्र - निवेदिता श्रीवास्तव की कलाकृति)

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

2 टिप्पणियाँ "विजय वर्मा के गरजते बरसते हाइकु - बारिश का मौसम"

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.