शनिवार, 27 अगस्त 2011

कान्ति प्रकाश त्यागी की हास्य कविता - गधे के सींग

गधे के सींग
डा० कान्ति प्रकाश त्यागी

अदालत में एक विशेष केस पेश हुआ,
केस सुनकर न्यायाधीश बेहोश हुआ।

हूज़ूर ! फ़रज़ू का कहना है,
धरमू उसका गधा मांगने आया,
काम के बाद, जब गधा लौटाने आया,
वह बिना सींग का गधा लौटाने लाया।
फ़रज़ू के साथ न्याय किया जाय,
उसके गधे के सींघ लौटये जाय
धरमू का कहना है,
जो गधा वह ले गया था,
उस गधे के सींग नहीं थे,
अतः सींगवाला गधा, कहां से लौटाय
फ़रज़ू को झूठ की सज़ा दी जाय।

दोनों पक्ष के वकील बहस शुरु करें,
अपना पक्ष विस्तार से प्रस्तुत करें।

हूज़ूर ! गर्धभराज हैं, हमारे बैशाखनंदन,
घास खाकर करते रहते नित क्रन्दन।
हमारा गधा बहुत काम का है,
यह बहुत ही बड़े नाम का है।
अल्ला ने इसे बहुत अवसर दिये,
परन्तु  सब के सब ठुकरा दिये।
तुम गधा छोड़ कर, हाथी घोड़ा कुछ भी बन जाओ,
प्रभु ! इसी जीवन से खुश हूँ, अधिक ना ललचाओ।
हूज़ूर! इसके पास नैतिकता है, जो किसी के पास नहीं है,
इसकी वाणी में पवित्रता है, जो किसी की वाणी में नहीं है।
बेचारे ने बिना घास खाए, धरमू का काम किया ,
धरमू ने क्या किया, उसे बिना सींग वापिस किया।
जनता में, एक दूसरे से विश्वास उठ जायेगा,
फिर भी गधा ही, आदमी के काम आयेगा।

दूसरे पक्ष के वकील को बुलाया जाय,
अपनी बात कहने का मौका दिया जाय।
हूज़ूर ! मेरे मुवक्किल ने जो गधा लिया,
उसके सींग नहीं थे, वैसे भी गधे के सींग नहीं होते,
वह गधा ही नहीं होता, अगर उसके सींग होते।
शेर जंगल का राजा होता है, उसके सींग नहीं होते,
गधा शहर का राजा होता है, उसके सींग नहीं होते।
शेर को किसी का डर नहीं, वह सींग नहीं रखता है
गधा भोला है, किसी को डर नहीं, सींग नहीं रखता है

वादी पक्ष के गवाह बुलाओ,
उनकी गवाही दिलवाओ।
फ़रज़ू ने, धरमू को गधा दिया,
हां हूज़ूर!  गधा मेरे सामने दिया।
उस समय गधे के सींग थे,
हूज़ूर ! गधे के सींग थे।
अगर थे, तो कितने थे ?.
नहीं मालूम,  कितने थे
रात का समय था,  घन घोर अंधेरा था
हूज़ूर ! मुझे रतौंधी आती है,
आँख की रोशनी भाग जाती है।
ठीक ठीक नहीं कह सकता,
कितने और कैसे सींग थे ?.
यह दावे के साथ कह सकता हूँ,
कि फ़रज़ू के गधे के सींग थे।

दूसरे गवाह को बुलाया जाय,
उसकी भी गवाही ली जाय।
क्या फ़रज़ू के गधे के सींग थे,
माई बाप !, उसके गधे के सींग थे।
अगर सींग, गधे के सर पर नहीं होगें,
हूज़ूर सींग क्या, आपके सर होगें।
कितने सींग थे, और कितने लम्बे थे,
चश्मा नहीं था, कैसे बताऊं, कितने लम्बे थे।
लम्बाई, मैं दावे के साथ नहीं पता सकता,
भगवान के डर से, ईमान नहीं बेच सकता।

तीसरे गवाह को  अभी बुलाओ,
अदालत का समय ना गंवाओ।
क्या धरमू सींगवाला गधा लाया था,
हां, हूज़ूर मेरे कुए पर पानी पिलाया था।

दो सिपाही अभी तुरन्त जायें,
कुआ देख कर फौरान बतायें।
हूज़ूर ! कुआ तो चोरी हो गया,
यह क्या, नया ग़ज़ब हो गया।
सींगों का फ़ैसला से देने पहले, चोरी हुए कुए को ढूढ़ा जाय,
पता लगाने के लिए यह केस, सी बी आई को दिया जाय।
सी बी आई ने केस में तीन साल लगाये,
कुए की चोरी के ,कुछ यूं तथ्य बतलाये।
कुआँ बनाने सरकारी ऋण लिया गया,
सरकारी दफ़्तर से नक्शा पास किया गया।
ऋण कागज़ों पर गवाहों के हस्ताक्षर हैं ,
कुआँ उदघाटन पर मंत्री के हस्ताक्षर हैं।
बहुत ढूढ़ा गया , परन्तु कुआँ ना मिला,
मिला तो फ़ालतु काग़ज़ों का पुलिंदा मिला।
अतः इस केस को बन्द किया जाय,
कुआ चोरी हो गया, मान लिया जाय।

केस ने देश में भयानक रूप धारण कर लिया,
देश को हिंसा-आगज़नी की चपेट में लपेट लिया।
विपक्ष ने संयुक्त संसद कमेटी की मांग उठाई,
सरकार ने यह बात बिलकुल निराधार बताई।
सरकार, यह तय करने में सक्षम है,
गधे के सींग होते हैं अथवा नहीं,
अगर होते हैं, तो कितने होते हैं,
अगर नहीं होते, तो क्यूं नहीं होते।
 
विपक्ष ने संसद को चलने ही नहीं दिया,
सरकार ने विपक्ष की मांग को मान लिया।
सभी पार्टियों के सांसदों को प्रतिनिधित्व मिला,
सभापति का पद, सरकारी सांसद को ही मिला।
जे पी सी, विदेशों में जायेगी ,
वहां जाकर अध्ययन करायेगी।
गधे विकसित होते हैं, विकसित देशों में
अथवा आधुनिक विकासशील देशों में
उनके सींग के रंग और लम्बाई में कुछ अन्तर है,
यदि अन्तर है, तो वह औसतन कितना अन्तर है।
सभी सांसद अपने साथ में पैमाना लेकर जायेगें
  गधे के सींग की ठीक से लम्बाई नाप कर आयेगें

सभी सांसदों ने अपनी अपनी रिपोर्ट दी,
कमेटी ने रिपोर्ट की पूरी तरह समीक्षा की।
रिपोर्ट से लोग संतुष्ट नहीं हुए,
देश में और अधिक दंगे हुए।
संसद में हल्ला हुआ,
सड़कों पर हल्ला हुआ।
सरकार ने अनेक कमीशन बिठाये,
कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आये।
कमीशनों के कार्यकाल भी बढ़ते रहे,
लोग अपनी बात पर अडिग अड़ते रहे।

धरमू इस ग़म से परलोक सिधार गया कि,
उस पर गधे के सींग चुराने का आरोप लगा।
गधा भी इस दुख में परलोक सिधार गया कि,
उस निर्दोष पर सींग रखने का आरोप लगा।
फ़रज़ू मस्त है, हृष्ट पुष्ट है, खुश है
उसे पूर्ण विश्वास है, सरकार एक दिन
उसकी बात मानेगी,अगर न्याय पालिका नहीं मानेगी,
तो सरकार कानून में संशोधन करके बिल लायेगी।
इस देश में गधे के सींग होते हैं,
मूर्ख़ हैं, जिनके सींग नहीं होते हैं।
जिनके सींग नहीं है, देश छोड़ कर चले जाओ
सींग वालो, बिना सींगवालों से देश मुक्त कराओ

2 blogger-facebook:

  1. ऐसा प्रतीत होता है कि गधे के सर से सींग का गायब होना और ऐसी हास्य कविताओं का जन्म, दोनो ही घटनाएं साथ-साथ हुईं हैं। कहीं सींग कविता तो नहीं बन गई..!

    उत्तर देंहटाएं
  2. शंकर लाल इंदौर9:28 am

    लगता है आप गधे के सिंग लाकर ही रहेंगे| बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति|

    उत्तर देंहटाएं

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