शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - आओ कहें दिल की बात - किश्त -2


धारावाहिक की पिछली कड़ी - कड़ी 1

आओ कहें...दिल की बात
कैस जौनपुरी


प्रिय शीतल...!
प्रिय शीतल को,
ढेर सारा प्यार...!
शीतल...हमारी शादी को आज तकरीबन चार महीने और सत्तरह दिन हो गए हैं. हर औरत की ख्वाहिश होती है कि वो शादी के बाद अपने पति के साथ रहे. लेकिन कुछ कारणों की वजह से हम-तुम साथ नहीं रह पा रहे हैं वो कारण भी तुम्हें मालूम हैं... जैसे हम सीधे बम्बई नहीं आ सकते क्योंकि पापा-मम्मी के बारे में भी सोचना पड़ेगा. उनकी सलाह के साथ ही हमें सब कुछ करना पड़ेगा. अगर हम दोनों यहाँ आ जाते हैं तो उन्हें कहीं न कहीं तो बुरा जरुर लगेगा. मैं समझ सकता हूँ आपका दुःख... लेकिन आप भी जरा मेरी जगह लेकर सोचिये. आप जानती हैं हम आपको कितना चाहते हैं. कुछ और दिन सब्र कर लीजिए फिर हम सब साथ में रहेंगे...!
मेरे माँ-बाप के मन में भी हर माँ-बाप की तरह बहु का सुख देखने के अरमान होंगें...ये सब बातें वो हमसे तो कहेंगे नहीं...इसलिए हमें ही समझदारी से काम लेना चाहिए...कल को हमने सिर्फ अपने बारे में सोचा तो हमारे माँ-बाप तो अपने हैं, एक बार के लिए वो कुछ नहीं भी कहेंगे...लेकिन लोग...??? लोग तो कहने से बाज नहीं आएँगे ना...??? फिर मेरे माँ-बाप किस-किस का मुँह बन्द करते फिरेंगे...??? और फिर क्यूँ...??? सिर्फ इसलिए कि उन्होंने हमारी शादी कर दी...और अब हम पति-पत्नी हैं...??? अब हमारी अपनी भी जिन्दगी है...??? मैं मना नहीं करता हूँ कि हमारी अपनी कोई जिन्दगी नहीं है...लेकिन शीतल...जरा सोचो...अभी कुल चार महीने ही हुए हैं...लोग यही कहेंगे.... “देखो...! माँ-बाप ने शादी क्या कर दी...माँ-बाप को ही अकेले रहने के लिए छोड़ दिया...”
इसलिए मेरी प्यारी शीतल...जिन्दगी के इस इम्तहान में आप मेरा साथ दोगी...मुझे आपसे  ये उम्मीद है...!
आपका
धीरज

1 blogger-facebook:

  1. बढि़या धारावाहिक... एकता कपूर टाइप नहीं है इसलिए अच्‍छा है :)

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