धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - घटना क्षितिज

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घटना क्षितिज

समय

हम दोनों को बहा ले गया है

एक दूसरे के घटना क्षितिज (event horizon) के पार

अब हमारे साथ घटने वाली घटनाएँ

एक दूसरे को प्रभावित नहीं कर सकतीं

यह जानने का अब हमारे तुम्हारे पास कोई जरिया नहीं बचा

कि कैसी हो मेरे बिना तुम

और तुम्हारे बिना मैं

 

अब अगर हम महसूस कर सकें

एक दूसरे का दर्द

बिना सूचनाओं के आदान प्रदान के

तब समझना

कि जो संबंध हममें और तुममें था

वह कोई आकर्षण बल नहीं

वह एक क्वांटम जुड़ाव (quantum entanglement) था

जो जुड़ गया था

ब्रह्मांड में हमारी उत्पत्ति के साथ ही

और जिसे समय भी खत्म नहीं कर सकता

यदि ऐसा हुआ

तब समझना

कि हमें फिर मिलने से कोई नहीं रोक सकता

 

हमारा मिलना

केवल समय की बात है

और समय बीतने के साथ

बढ़ती जा रही है

हमारे मिलन की संभावना

--
धर्मेन्द्र कुमार सिंह
वरिष्ठ अभियन्ता (जनपद निर्माण विभाग - मुख्य बाँध)
बरमाना, बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश
भारत

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(चित्र - अमरेन्द्र, फतुहा, पटना की कलाकृति aryanartist@gmail.com )

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