कैस जौनपुरी की कहानी - भग्नावेश

SHARE:

रफीक अपने ऑफिस जा रहा था. ऑटोरिक्शा में बैठके मोबाइल पे गाने सुन रहा था. रास्ते में दुनिया भर की चीजों को देखता हुआ जा रहा था. “इस शहर में ...

image

रफीक अपने ऑफिस जा रहा था. ऑटोरिक्शा में बैठके मोबाइल पे गाने सुन रहा था. रास्ते में दुनिया भर की चीजों को देखता हुआ जा रहा था. “इस शहर में कितनी भीड़ है...!” यही बात उसके मन में आ-जा रही थी. वो देख रहा था कि “लोग भीड़ में आ रहे हैं...जा रहे हैं. हर कोई अपने-अपने काम में लगा हुआ है. और दुनिया चल रही है....”

तभी रफीक का ऑफिस आ गया. वो रिक्शा से उतरा. किराये के पैसे दिए. कुल अठ्ठाईस रुपये हुए थे. रफीक ने दस-दस के तीन नोट दिए. ड्राईवर ने दो रूपये वापस किए. रफीक ने एक-एक रुपये के दो सिक्के अपनी जेब में रख लिए.

तभी रफीक की नजर सड़क के किनारे पड़ी एक मूर्ति पर पड़ी. मूर्ति किसी देवी की लग रही थी. वहीं बगल में एनर्जी ड्रिंक बेचने वाले की एक छोटी सी दुकान थी. मूर्ति दुकान की दीवार से टेक लगाकर रखी हुई थी. रफीक मूर्ति के पास पहुँच गया. उसे मूर्ति बहुत सुन्दर लग रही थी. अच्छी लग रही थी. वो चाह रहा था कि इस मूर्ति की फोटो खींच ले. फिर जब चाहे इसे देख सकता है. अपने हिन्दू मित्रों को दिखा सकता है. मुसलमान दोस्त तो देखने से रहे. उल्टा उसे ही उल्टा-सीधा सुनाने लगते. मगर रफीक को इन सब बातों की परवाह नहीं थी. उसे तो वो मूर्ति बड़ी अच्छी लगी थी और वो उस मूर्ति की फोटो अपने पास रखना चाह रहा था.

उसने अपना मोबाइल निकाला. फोटो खींचने के लिए उसने उस दुकान वाले से कहा, “जरा सा फोटो खींचना है इस मूर्ति का...” दुकानदार कुछ नहीं बोला. ऐसा लगा जैसे उसे क्या फर्क पड़ता है. तुम चाहे फोटो खींचो या मत खींचो. उसके चेहरे के हाव-भाव से ऐसा लग रहा था जैसे वो कहना चाह रहा हो, “तो मैं क्या करूँ...? फोटो खींचो ना...! मैंने मना किया क्या...?” उसकी तरफ से कोई जवाब न मिलने पर रफीक फोटो का पोज सही करने लगा.

दरअसल मूर्ति टूटी हुई थी. वो दुर्गा जी की मूर्ति लग रही थी. सिर्फ कमर के ऊपर का हिस्सा बचा था. पूरे हाथ भी नहीं थे. और मूर्ति दीवार से टेक लगा के रखी गई थी. लेकिन मूर्ति के चहरे पे एक चमक थी जो फीकी नहीं पड़ी थी. बारिश में खराब होने के बाद भी चेहरे का भाव एकदम देवियों वाला ही था. शक्तिशाली...बस उनके हाथ में भाला नहीं था. शायद वो सरस्वती जी की मूर्ति रही हो. रफीक को ज्यादा पता तो था नहीं. जितना उसने देखा है दुर्गा जी के कई हाथ होते हैं. लेकिन इस मूर्ति के सिर्फ दो ही हाथ थे. इसलिए शायद ये दुर्गा जी की मूर्ति नहीं थी. रफीक को इस बात से कोई लेना-देना भी नहीं था.

उसे तो उस कलाकार की कला पसन्द आ गई थी जिसने इस मूर्ति को बनाया था. जो इतना कुछ होने के बावुजूद भी एक सुन्दर रचना लग रही थी. मगर पता नहीं किस वजह से यहाँ पड़ी थी. शायद बिकी न हो...

रफीक ने चाहा कि “ये दुकान वाला कुछ बोल नहीं रहा है तो अब फोटो ले ही लेता हूँ.” उसने अपने मोबाईल का कैमरा सेट किया. मूर्ति मोबाईल में और सुन्दर लग रही थी... और फोटो बस क्लिक होने ही वाली थी कि पीछे से किसी ने टोक दिया.

“भाईसाब...! फोटो मत लीजिए...!”

रफीक ने मुड़ के देखा. एक आदमी साईकिल लेके पैदल जा रहा था. रफीक को फोटो खींचने से मना कर दिया. रफीक को अच्छा तो नहीं लगा मगर उसने जानना चाहा कि “फोटो खींचने में बुराई क्या है...?”

उसने उस अजनबी आदमी से कहा, “क्यूँ...?”

अब वो आदमी अपनी पण्डिताई झाड़ने लगा.... “ये मूर्ति पूरी नहीं बनी है...भग्नावेश में है. फोटो मत लीजिए.” रफीक ने उस आदमी को ध्यान से देखा और सोचा, “इसे बड़ा पता है...!”

वो आदमी था तो पैदल. मगर शकल से कोई पण्डित ही लग रहा था. उसका चेहरा साँवला था मगर उसके माथे पे लगा लाल और सफेद लम्बा टीका चमक रहा था.

रफीक ने कहा, “अच्छा जी...?”

उस अजनबी ने कहा, “क्या है कि ये मूर्ति पूरी नहीं बनी है. जिसने बनाई है इसे यहीं छोड़ गया है. बारिश से खराब हो गई है. लेकिन भग्नावेश में है इसलिए फोटो नहीं लेना चाहिए...”

रफीक ने कहा, “ठीक है...”

रफीक वहाँ से चल दिया मगर उसने मुड़के उस मूर्ति को देखा. उसे मूर्ति अब भी वैसी ही सुन्दर लग रही थी. मूर्ति की नजर आसमान की तरफ थी. ऐसा लग रहा था जैसे मूर्ति आसमान से पूछ रही हो कि “ये क्या मुसीबत है...? इतने दिनों से यहाँ टूटी-फूटी पड़ी हूँ. कोई पूछने नहीं आया. आज एक अल्लाह का बन्दा आया था तो उसको भी उस पण्डित ने भगा दिया.”

रफीक के मन में उस मूर्ति का खयाल अभी भी आ रहा था. उस आदमी की बात मानकर उसने फोटो तो नहीं ली मगर वो सोचने लगा, “अब ये भग्नावेश क्या होता है...?” रफीक को इसका मतलब नहीं पता था. उसने उस आदमी से ज्यादा बात करना पसन्द नहीं किया क्यूंकि उसने उसे फोटो खींचने से मना कर दिया था. वो तो ये सोच रहा था कि “फोटो खींच ही लेना चाहिए था.... बेकार में पोज बना रहा था. कम के कम फोटो तो मिल जाती. अब तो बारिश में मूर्ति और भी खराब हो जायेगी.” मगर वो उस आदमी की देवी थीं इसलिए उसने उसकी भावना का सम्मान किया और चुपचाप वापस आ गया.

रफीक वापस तो आ गया मगर एक सवाल उसके मन में अब भी घूम रहा था कि “भगवान के साथ भी इतने नियम-कानून क्यूँ होते हैं...?”

उसे तो वो मूर्ति इतनी अच्छी लग रही थी कि उसका जी चाह रहा था कि उस मूर्ति के पास थोड़ी देर बैठे और उस मूर्ति से दो-चार बातें करे....मूर्ति से कहे... “और बताइए...! सब ठीक-ठाक...? यहाँ क्या कर रही हैं...? और कब से हैं यहाँ...? और क्यूँ यहाँ हैं...? क्या मैं आपको कहीं और पहुँचा दूँ...?”

ऐसे जाने कितने खयाल रफीक के मन में आ-जा रहे थे. उसे उस मूर्ति से एक लगाव सा हो गया था. उसे उस मूर्ति में एक “माँ” जैसा अहसास हो रहा था. एक दोस्ती सी हो गई थी. एक अपनापन महसूस हो रहा था. जैसे वो मूर्ति कह रही हो... “आओ...थोड़ी देर बैठो इधर...!” और रफीक एक छोटे बच्चे की तरह हँसते हुए जाके मूर्ति की गोद में सिर रखके लेट जाता....

लेकिन मूर्ति की गोद तो थी ही नहीं. सिर्फ चेहरा था. और पेट का आधा हिस्सा बचा था. बाकी नीचे का हिस्सा नहीं था. शायद बना ही नहीं था. रफीक ने सोचा “कोई बात नहीं...मूर्ति के सीने से लग जाता जैसे कोई बच्चा अपनी माँ के सीने से लग जाता है. और फिर बगल में बैठ जाता. और एक दोस्त की तरह दो-चार बातें करता....”

मगर भला हो उस पैदल पण्डित का...उसने इतना कुछ होने से मना कर दिया.

रफीक ने देखा कि “वो मूर्ति आसमान की तरफ देख रही थी. शायद कोस रही थी उस कलाकार को कि “मेरे पैर भी बना देता तो तेरा क्या बिगड़ जाता...? कम से कम मैं खुद चल के कहीं जा तो सकती थी...? ऐसे में यहाँ बेसहारा पड़ी हूँ...”

मूर्ति के चेहरे पे एक उम्मीद झलक रही थी. जैसे कोई आएगा और उसे कहीं ले जाएगा. जहाँ के लिए उसे बनाया गया था. रफीक ने देखा मूर्ति के चेहरे को देख के ऐसा भी लग रहा था कि “जैसे उस मूर्ति से कोई गलती हो गई हो और भगवान ने उसे सजा दी हो कि तुम यहीं रहोगी. और वो मूर्ति भगवान से प्रार्थना कर रही हो कि “अब बहुत हुआ...अब मेरा कल्याण करो...!”

और शायद उस मूर्ति ने भगवान को मना भी लिया हो...और भगवान ने कहा हो... “रुको, किसी को भेजता हूँ...” शायद रफीक इसीलिए आया था वहाँ...मगर उसे तो भगा दिया गया था.

रफीक ऑफिस पहुँच गया. कम्प्यूटर ऑन किया. मगर उसके दिमाग में उस मूर्ति का प्यारा सा चेहरा अभी भी घूम रहा था. उसके कानों में उस पैदल पण्डित की बात अब भी गूंज रही थी, “मूर्ति भग्नावेश में है...” रफीक से रहा नहीं गया. उसने अपने फेवरिट “तिवारी जी” को फोन किया.

“हाँ साब...!” “तिवारी जी” ने कहा.

“ये भग्नावेश क्या होता है...?” रफीक ने पूछा.

“क्या साब आप भी न... हमेशा कुछ न कुछ उल्टा-सीधा सवाल करते रहते हैं....! अब ये सवाल कहाँ से आया...?” तिवारी जी ने कहा.

“तिवारी जी, अभी हम ऑफिस आ रहे थे. रास्ते में वो अपनी बिल्डिंग के बगल में एक दूध-बिस्किट वाली दुकान है न...?” रफीक ने कहा.

“हाँ है साब...!” तिवारी जी ने बीच में ही कहा.

“हाँ तो उस दुकान के पास एक मूर्ति पड़ी है. शायद किसी देवी की है. और वो मूर्ति मुझे अच्छी लगी. मैं फोटो खींचना चाहता था मगर किसी ने मुझसे कहा कि, “मत खींचो...मूर्ति भग्नावेश में है....”

“हाँ साब...! नहीं खींचना चाहिए...गलत है...” तिवारी जी ने भी वही बात कही...

“वही तो पूछ रहा हूँ तिवारी जी...! इसमें गलत क्या है...?” रफीक ने अपनी बात पे जोर दिया.

“अरे भाई...! आप किसी नहाती हुई औरत की फोटो खींचेंगे...तो गलत नहीं है...?” तिवारी जी ने उल्टा सवाल किया...

“लेकिन तिवारी जी, उस मूर्ति ने तो कपड़े पहने हुए हैं...बस वो क्या कहते हैं आप...? लाल रंग की चुनरी नहीं थी जो स्थापित करने के बाद पहनाते हैं. बाकी मूर्ति की बनावट में तो उन्होंने कपड़े पहने हुए हैं...” रफीक ने अपनी बात रखी.

“अच्छा आप फोन रखिये. आप फोन पे बहुत परेशान करते हैं मुझे. अभी मैं किसी के साथ हूँ. अभी आपके पास आता हूँ तब बताऊंगा आपको...” तिवारी जी ने भी कोई सटीक जवाब नहीं दिया जिससे रफीक के मन को शान्ति मिलती.

अब रफीक तिवारी जी के आने का इन्तजार करने लगा. थोड़ी देर बाद तिवारी जी आए. और फिर वही सब बातें...कि “ये गलत है...वो गलत है..ऐसा नहीं करना चाहिए...वैसे नहीं करना चाहिए...” तब रफीक ने एक सवाल पूछा....

“और अगर किसी को मूर्ति अच्छी लग गई तो...?” सवाल रफीक के मन का था.

“अरे, आपके अच्छे लगने से क्या होता है...? जो है सो है... सब आपके अच्छे लगने से होने लगा तब तो हो चुका.” तिवारी जी ने साफ़-साफ़ कह दिया.

मगर रफीक को अभी भी तसल्ली नहीं मिली थी. उसने कहा, “तिवारी जी, ये कोई बात नहीं हुई.”

तिवारी जी ने देखा कि रफीक कुछ ज्यादा ही जिद कर रहा है तो उन्होंने कहा, “अरे भाई ठीक है...! आपको नहीं मानना है तो जाइए अब खींच लीजिए. इस वक्त कोई मना नहीं करेगा. जाइए अपने मन की कर लीजिए...!”

रफीक ने देखा कि “तिवारी जी बस कहने के लिए कह रहे थे. चाह वो भी नहीं रहे थे कि रफीक उस मूर्ति की फोटो खींचे...” रफीक ने देखा कि कुछ होने वाला नहीं है...वो तो इस भक्त-भगवान के बीच की दूरी को मिटा देना चाहता था. मगर “लोग थे कि नियम-कानून बनाये बैठे हैं.”

रफीक तो उस कलाकार को ढूँढना चाह रहा था जिसने वो खूबसूरत मूर्ति बनाई थी. रफीक उस कलाकार को उसकी सुन्दर रचना के लिए बधाई देना चाह रहा था.

दोपहर को रफीक नमाज के लिए जाता था. आज भी जा रहा था. सड़क पार करने के लिए खड़ा था. तभी एक बार फिर उसकी नजर उस मूर्ति पर चली गई. उसने देखा कि “वो मूर्ति उसे बुला रही थी. वो मूर्ति कह रही थी कि “आओ तुम्हें भगवान ने भेजा है...!” रफीक ने अपने मन में कहा... “माफ कीजियेगा...लोग नहीं चाहते कि मैं आपके पास आऊँ...आपको बार-बार देखूँ...वैसे... मेरा बड़ा मन था...”

---

 

कैस जौनपुरी

 

qaisjaunpuri@gmail.com

www.qaisjaunpuri.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कैस जौनपुरी की कहानी - भग्नावेश
कैस जौनपुरी की कहानी - भग्नावेश
http://lh3.ggpht.com/-0DctKH83cHU/TpgLqVNxPjI/AAAAAAAAKr0/Nyy6wnFmvWk/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/-0DctKH83cHU/TpgLqVNxPjI/AAAAAAAAKr0/Nyy6wnFmvWk/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/10/blog-post_3299.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/10/blog-post_3299.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content