शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

कैस जौनपुरी की कहानी - उसकी जुल्फें

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उसकी जुल्फें हमेशा लहराती रहती थीं...जब वो चलती थी तो “आह...क्या बात है...!” लोगों के दिलों से यही निकलता था...उसकी जुल्फें हमेशा उसके कन्धे से होते हुए उसके सीने पे एक तरफ फैली रहती थीं...जब वो चलती थी तो सबकी नजर उसकी जुल्फों पे टिकी रहती थी...ऐसा लगता था जैसे पुराने ज़माने की कोई गणिका चल रही हो...जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा चल रही हो...अपनी जुल्फों को लहराते हुए...उसकी मुस्कुराहट से ही लोग घायल हो जाते थे...उसकी आँखों में हमेशा कुछ रहता था...मगर वो बोलती बहुत कम ही थी...सिर्फ मुस्कुरा के अपना काम कर लेती थी...

कभी-कभी वो हँसती भी थी...उस वक्त ऐसा लगता था जरुर किसी ने उससे कुछ कहा है...जरुर कोई उसके हुस्न से घायल हुआ है...जिसकी बात वो अपनी सहेली से कर रही है...उसकी आँखों में हमेशा एक नशा सा छाया रहता था...ऐसा लगता था जैसे उसकी आँखों से शराब छलक रही हो और वो खुद नशे में झूम रही हो. चाहे कुछ भी हो उसकी चाल में कभी कोई फर्क नहीं आया...वो हमेशा उसी मदमस्त चाल से चला करती थी...जैसे किसी बात की फ़िक्र न हो...और हो भी क्यूँ...ऊपरवाले ने हुस्न के साथ इतनी तो तरजीह दी ही है कि उसे कुछ करने की जरुरत नहीं पड़ेगी...लोग खुद उसके पास खींचते चले आएँगे...इसीलिए तो अबला नारी कहलाने वाली ये हुस्न की परियाँ अपनी जिन्दगी अपने हुस्न के सहारे आराम से जी लेती हैं...उनके हुस्न की कोई कीमत तो होती नहीं है...जैसा कद्रदान उतना मेहरबान...

वो फिर भी आज के ज़माने का हुस्न थी...आफिस में नौकरी करती थी......मगर उसे देखके कभी नहीं लगता था कि इसकी शादी भी हुई होगी...लोग हमेशा उसकी बातें किया करते थे...जिसको पता होता था वो बता देता था कि... “अरे इसकी तो शादी हो चुकी है...” फिर लोग अपने अपने दिलों पे पत्थर रख लेते थे...मन मसोस कर रह जाते थे...कुछ सिरफिरे फिर भी नहीं मानते थे...उसे घूरते रहते थे...मगर उस लड़की को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता था...और पड़े भी क्यूँ...? उसकी क्या गलती थी अगर वो इतनी खूबसूरत थी...उसकी क्या गलती थी जो उसकी जुल्फें लहराती रहती थीं...इसमें क्या बुराई थी अगर वो हमेशा मुस्कुराती रहती थी....क्या बुरा था जो वो हमेशा खुश रहती थी...कुछ भी तो नहीं...

लेकिन एक बात थी उसकी लहराती जुल्फों की वजह से बहुत लोगों के दिलों पे साँप लोट जाता था...बहतों के दिलों पे इसलिए कि वो उनकी नहीं थी...बहुतों के दिलों पे इसलिए कि वो बहुत खूबसूरत थी मगर घास नहीं डालती थी...बहुत से लोग अब भी कोशिश में लगे थे कि... “काश...ये हमसे दोस्ती कर लेती तो बहुत अच्छा रहता...काश ये हमें अपने करीब आने देती तो अच्छा रहता...और काश इसे हम छू सकते...” बड़े-बड़े लोगों ने बड़े-बड़े सपने सजाये मगर किसी के सपने पूरे नहीं हुए...क्यूंकि वो एक सपना नहीं थी...वो एक हकीकत थी..ये बात अलग है कि हकीकत में भी वो बड़ी खूबसूरत थी...यही एक चीज थी जो उसके पास बेशकीमती थी...बाकी सब तो वैसा ही था जैसा सबके पास होता है...एक पति...एक सास..एक ससुर...एक देवर...एक ननद...और सबकुछ वैसा ही जैसा सबके पास होता है...एक साधारण सी जिन्दगी थी उसकी भी...मगर उसे देखके ऐसा लगता था जैसे उसने दुबारा जनम लिया हो...और पिछले जनम में जरुर किसी राजघराने में पैदा हुई रही होगी...

लोग तरह-तरह के खयाल बनाते और बिगाड़ते रहते थे...कोई कहता... “ये लड़की ठीक नहीं है...देखो कैसे चलती है...” तो यही बात किसी-किसी के दिल को इतनी भा जाती थी कि वो कहता था... “वाह...क्या मस्त चाल है...हम तो फ़िदा हो गए...जी करता है...इसके कदमों के नीचे अपना दिल रख दें...और ये हुस्न एक बार हमारे दिल पे अपने कदम रख दे...और हम मर जाएँ...और दुनिया वहीं खत्म हो जाए...” ऐसे-ऐसे भी खयाल बनाने वाले थे...फिर जब कभी गलती से उसका सामना हो जाता था तब लोग उससे नजर भी नहीं मिला पाते थे...फिर वो मुस्कुरा के चली जाती थी. उसकी एक सहेली थी. जो हमेशा उसके साथ रहती थी. वो कभी भी अकेली नहीं देखी गई. जब भी देखी गई अपने सहेली के साथ.

एक दिन ऐसा आया जब वो किसी को नहीं दिखी. सब हैरान...! कहाँ गई...? क्यूँ नहीं आई...? आज का दिन खराब हो गया...वगैरह...वगैरह...मगर किसी की हिम्मत न हुई कि कुछ पता कर सके. उसकी सहेली तो आई थी मगर लोग उससे भी क्या पूछते...? और उसे कारण क्या बताते...? जब वो पूछती कि “क्या काम है...?” लोग कैसे बताते कि क्या काम है...? लोग कैसे बताते कि उसे देखा नहीं इसलिए दिल नहीं लग रहा...लोग कैसे बताते कि दिन खराब हो गया आज...उसकी सहेली ने देखा और महसूस किया कि लोग आज उसे कुछ ज्यादा ही घूर रहे हैं...फिर बड़ी जल्दी ही उसे अहसास हो गया कि लोग किसे ढूँढ रहे हैं....फिर वो भी मुस्कुराने लगी...

और अगले दिन जब लोगों को वो जुल्फें एक बार फिर दिख गईं...तब लोगों की जान में जान आई...अब लोगों को लगा कि “क़यामत आने में अभी देर है...” अभी जिन्दा रहने के कुछ दिन और बाकी हैं...अभी कुछ दिन और इन जुल्फों को देखना नसीब है....इधर लोगों ने राहत की सांस ली...उधर वो जुल्फों वाली कुछ खामोश सी दिखाई दे रही थी...मुस्कुरा रही थी मगर आज वो बात नहीं थी...फिर दोपहर के बाद वो मुस्कुराहट वापस आ गई. तब लोगों को तसल्ली हो गई कि सब ठीक है...और फिर वही सिलसिला शुरू हो गया. वो आती थी...वो जाती थी...लोग उसे देखके आहें भरते रहते थे.

धीरे-धीरे कुछ लोगों ने हिम्मत करके उससे बात करना शुरू किया...तब लोगों ने पाया “अरे...! ये तो बात करती है...! हम बिला वजह घबरा रहे थे.” इस तरह कुछ लोगों के लिए आसानी हो गई. दिन में एक-दो बार सामना हो जाता था तो मुस्कुरा के बातें हो जाया करती थीं. क्यूंकि लोग कहते तो क्या कहते. और लोग कुछ कहते नहीं थे इसलिए वो भी सिर्फ मुस्कुरा के रह जाती थी.

रिजवान ने थोड़ी हिम्मत दिखाई तो उसका फायदा भी हुआ. वो अप्सरा जैसी दिखने वाली लड़की कुछ-कुछ फ़िदा जैसी हो गई थी. अब एक नया सिलसिला शुरू हुआ. रिजवान और उस जुल्फों वाली के बीच नैन मटक्का शुरू हो गया था. दोनों छिप-छिप के एक दूसरे को देखते रहते और फिर से देखने की कोशिश करते रहते. जब रिजवान की नजर अचानक उससे मिलती थी तो वो मुस्कुरा देती थी. तब रिजवान बड़ी हैरत में पड़ जाता था कि इस मुस्कुराहट का क्या मतलब है...? फिर वो कोई भी राय न बनाकर सिर्फ मुस्कुराने में ही भला समझता था. और इस तरह एक जान-पहचान बन चुकी थी.

ये बात बाकी चाहने वालों को अच्छी न लगी. मगर करते भी तो क्या...? उनके अन्दर इतनी हिम्मत तो थी नहीं कि जाके उस लड़की से बात करते. रिजवान ने वो हिम्मत दिखाई थी इसलिए उसे ये नजदीकी हासिल हुई थी. बाकी लोग तो सोचते थे कि कोई उस लड़की को उनके लिए थाली में परोस के लाएगा. और वो उसे खयाली पुलाव समझ के खा लेंगे. लेकिन वो तो एक जीती-जागती लड़की थी. लोगों को जब कोई रास्ता न दिखा तो वो रिजवान के आस-पास मँडराने लगे. इसी बहाने उन्हें वो लड़की मुस्कुराती हुई दिख जाती थी. मगर कुछ लोगों को ये भी अच्छा नहीं लगता था कि वो रिजवान के लिए मुस्कुराती थी. इसलिए लोगों ने रिजवान को भडकाना शुरू कर दिया. कुछ ने तो रिजवान से दोस्ती कर ली. ऐसे लोग जब रिजवान से मिलते तो पहले जुल्फों वाली का हाल पूछते. अब उन्हें एक ठिकाना मिल गया था. जिस दिन वो दिखाई नहीं देती थी उस दिन रिजवान से पूछा जाता था.

रिजवान एक तरह से मशहूर होने लगा. हालाँकि रिजवान के लिए कोई खुशी की बात नहीं थी. उसकी तो बस एक-दो बार बातें हुईं थीं. और लोगों ने समझा कि “बात कुछ और है...” लोगों ने रिजवान को भड़काया कि “वो हिन्दू है...” रिजवान कहता, “कोई बात नहीं, मुझे तो बस इतना दिखता है कि खूबसूरत है...” लोग जब देखते कि रिजवान उनकी बातों में नहीं आ रहा तब वो दूसरी तरह की बातें करना शुरू कर देते. जैसे, “अरे, ये लड़की ठीक नहीं है...देखो अगर किसी अच्छे खानदान से होती तो यूँ मटक-मटक के चलती भला...?” तो रिजवान के पास इसका भी जवाब होता था, “अरे मियाँ, अब वो लड़की है...खूबसूरत है...वो नहीं मटकेगी तो क्या आप मटकेंगे...?” फिर सब हँसने लगते थे. और रिजवान उस जुल्फों वाली की खूबसूरती को एक बार फिर गौर से देख लेता था. और मन में कहता था, “खूबसूरत तो हैं आप...और अदा भी है...इतना मुस्कुराती हो...इरादा क्या है...?” उधर दूसरी तरफ से मुस्कुरा के ही खामोश जवाब मिलता था, “क्या बताएँ साहब...आपकी इस हौसले भरी नजर से असर हो गया है हमपे...वरना लोग तो नजरें चुरा के मिलते हैं हमसे...एक आप ही हैं जिसने इतनी हिम्मत दिखाई है...बस इतनी सी बात है...”

और फिर दोनों मुस्कुरा देते थे. इस तरह सब ठीक चल रहा था. दुनिया समझती थी कि रिजवान और उस लड़की के बीच कुछ है. मगर ऐसा था नहीं. ये रिजवान को भी पता था और उस खूबसूरत जुल्फों वाली को भी पता था. मगर एक बात थी कि दोनों एक-दूसरे को देखके मुस्कुराते जरूर थे. यही बात लोगों को सोचने पे मजबूर कर देती थी. जबकि रिजवान इस बात से खुश था कि “चलो, जिस लड़की से लोग नजर मिलाने से डरते हैं. वो लड़की मुझे देखके मुस्कुराती है. इतना क्या कम है...?” उधर वो लड़की ये सोचके खुश होती थी कि, “चलो, इन डरपोक नजर चुरा के देखने वालों के बीच कोई तो हिम्मत वाला है...और देखता भी है तो मुझे ही मुस्कुराना पड़ता है वरना ये तो देखता ही जाए.”

बाकी जो कुछ था, रिजवान और उस जुल्फों वाली की नजरों के बीच ही था. नजर के इस खेल में जब तक नजर न मिले तो चैन कहाँ...? इसलिए दोनों एक-दूसरे से नजर मिला ही लेते थे. और अब तो ये नौबत आ गई थी कि उन्हें बाकी लोगों कि नज़रों का खयाल रखना पड़ता था. क्यूंकि जब इन दोनों की नजर आपस में मिलती थी तब कई लोगों की नजर इन दोनों पे टिकी होती थी. मगर ये दोनों अगर दुनिया को देखते तो एक-दूसरे को कब देखते...? इसलिए दुनिया की परवाह किये बिना एक-दूसरे को देखते और मुस्कुराते थे. हालाँकि उनके बीच ऐसा कुछ नहीं था. सिर्फ मुस्कुराहट का रिश्ता था. वो भी इतना कि दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुरा देते थे. अब दोनों की नजर जब भी मिलती तो दोनों को पता चलता कि दोनों ही एक-दूसरे को देख रहे थे. फिर मुस्कुराहट का आना तो लाजिमी है.

सब अच्छा-अच्छा चल रहा था. वो लड़की अब तो हँसने भी लगी थी. अब जब वो चलती थी तो अपनी सहेली से बातें करते हुए हँसती रहती थी. फिर रिजवान की तरफ पलट के देखती थी और रिजवान को भी मुस्कुराने की वजह दे देती थी. खुश रहने का एक बहाना था दोनों के पास.

फिर दो दिन बीत गए. वो नहीं दिखी. इस बार उसकी सहेली भी नहीं दिख रही थी. सब परेशान. सब रिजवान से पूछते “कहाँ है वो...?” रिजवान कहता, “नहीं पता...” फिर तीसरे दिन उसकी सहेली दिखी. रिजवान से न रहा गया. उसने जाकर उसकी सहेली से पूछ ही लिया. उसकी सहेली रो पड़ी. रोने की वजह पूछने पर पता चला कि “वो लड़की अस्पताल में है...”

रिजवान ने अस्पताल पहुँचने की वजह पूछने की जरुरत न समझी... बस इतना पूछ लिया कि “किस अस्पताल में है...?” और सीधा उस अस्पताल पहुँच गया. डर तो था कि उसके घरवाले देखेंगे तो सवाल करेंगे. मगर दूसरों के सवालों के डर से उसके अस्पताल में पड़े होने पर भी न जाना तो ठीक नहीं था ना. इसलिए वो अन्दर चला ही गया.

मगर अस्पताल का नजारा तो कुछ और ही कह रहा था. वहाँ पुलिस भी थी. लोग भी जमा थे. मामला गम्भीर लग रहा था. रिजवान सीधा उसके पास पहुँच गया. वो अस्पताल की सफ़ेद चादर में लिपटी हुई थी. सिर्फ चेहरा दिख रहा था उसका. बाकी सब कुछ सफ़ेद था. उसका सिर भी सफ़ेद पट्टियों से लपेटा गया था. रिजवान को देख वो एक बार फिर मुस्कुराना चाह रही थी. मगर इस कोशिश में उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े. रिजवान उसके पास जाकर उससे बात करना चाह रहा था मगर तभी पुलिस और लोगों ने उसे रोक दिया. ये देख उस खूबसूरत लड़की के चेहरे पे आँसुओं की धार बह गई.

रिजवान को पता चला कि उस लड़की को दहेज़ की लालच में जलाकर मारने की कोशिश की गई थी. मगर बदनसीब बच गई थी. रिजवान इजाजत लेकर एक बार फिर उसके पास गया. वो उसे ऊपर से नीचे देख रहा था. वो सफेद चादर में लिपटी बेबस सी पड़ी थी. उसके माथे से ऊपर पूरा सिर पट्टियों से लिपटा हुआ था. आज उसकी आँखें मुस्कुरा नहीं पा रहीं थीं. वो बस बह जाना चाहती थीं. उसे भी महसूस हुआ कि रिजवान उसकी जुल्फों को ढूँढ़ रहा है. ये देख उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया और जी भर के रोना चाहती थी.

आग की लपटों ने उसकी लहराती जुल्फों को जला दिया था. उस खूबसूरत लड़की की खूबसूरत जुल्फों को दहेज की नजर लग गई थी.

कैस जौनपुरी

 

qaisjaunpuri@gmail.com

www.qaisjaunpuri.com

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(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com  की कलाकृति)

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