ईश्वर कुमार साहू की कविता - प्रणय प्रसून

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प्रणय प्रसून

प्यार को न बेचिए गुनाह के बाज़ार में।

जीवन की नींव खड़ी प्यार के आधार में।।

वो क्या जाने दुःख दर्द को, जो सुख में जी रहे हैं।

जिसे नसीब ना हो प्यार का वो घुट घुट के जी रहे हैं।।

कोई तरसे माँ की अंचल को, कोई बेटे की पुकार को।

कोई भाई बहन का स्नेंह, कोई मानवता की दुलार को।।

प्यार के भेद अनंत है, ढल जाये संकल्पाकार में

प्यार को न बेचिए .....................................

 

मीत बंधु बान्धवी, प्रसून प्रणय की पुंज है।

परागावर्णी राग का, ये सूक्ष्मता की छंद है।।

निश्च्छल प्रणय की पावक भी,शीतल सी भरी मयंक है।

इस राग में कुछ विकंप नहीं, चाहे भयद तरंग है।।

प्यार में सुख दुःख दोनों, यही विशेषता है कलाकार में।

प्यार को न बेचिए .....................................

 

सुबोध है जो ज्ञान से, बिन प्यार कुछ ना और है।

परिणाम सबके सामने, आज वो जग सिरमौर है।।

अबोध है जो प्रेम से, वो अक्ल अर्थ व्यर्थ करे।

विलास द्वेष भोग में, सौदा प्रणय की,वो धूर्त करे।।

जिस राग में दंभ द्वेष हो, अनुराग वो बेकार में।

प्यार को न बेचिए .....................................

 

वनिता मनुज की योग में, केवल वपु आसक्ति है।

पर राधा कृष्ण योग में, कैवल्य पद की मस्ती है।।

इति अर्थ सारांश है, ना कर सकूँ विस्तार मै।

करने की गुस्ताखी की पर, हासिल की कई हार मै।।

क्योंकि प्यार प्रकृति को प्राप्त है, नियति प्रदत्त संस्कार में।

प्यार को न बेचिए गुनाह की बाज़ार में।

जीवन की नींव खड़ी प्यार के आधार में।।

प्यार को न बेचिए ...................................

 

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मेरा परिचय

ई श ने इस जग में जब -जब , मुझे वसुन्धरा वास दिया /

श्वास प्राण तत्वों से सजी, आतम को गहना गत दिया //

वर्णन कुछ वद ना जाय सके, जो नैसर्गिक अनुराग दिया /

रग -रग में अपने अनुभव की,पल -पल में राग सुवास दिया //

सेवा नित मुझे प्रदान किया, तन रूपी अपने अंश से /

वक्त की रेखा में घेर दिया, एक नाते रिश्ते वंश से //

कभी तात रूप कभी मात रूप, तू रहता मेरे संग में /

तेरे रास्ते अनेक है जैसे, एक फूल अनेक रंग में //

मनुज देह निर्वाण को, ऐसा प्रज्ञा प्रदान किया /

शैशव युवा हो या वृद्धा, स्वरुप का अपने ज्ञान दिया //

ले चलो हमें निज धाम को, ना हो फिर उदय निधन /

दृग दोष विस्मरण कर स्वामी, अर्पित हूँ तेरी शरण // 

नोट :- ( इस कविता का मुख्य शीर्षक है "मेरा परिचय " / इस कविता को लिखने का उद्देश्य यह है की मुझे  भगवान ने धरती पर भेजा उसने माता पिता और सगे सम्बन्ध भी दिए इसके बावजूद उनको बुलाकर परमात्मा ( निज धाम ) को याद करना और फिर से आपने में समाहित करने का आग्रह करना   / इस कविता के पत्येक चरण के प्रथम अक्षर से मेरा नाम ( ईश्वर ) पिता का नाम ( सेवक राम ) माता का नाम ( शैलेंदरी  बाई ) आता है /

ईश्वर कुमार साहू
ग्राम - बंधी, पो. - दाढ़ी,
तहसील/ जिला - बेमेतरा,
(छत्तीसगढ़)
वर्तमान पता :-
गंगा तालाब के पास
साहू किराना दुकान,
गंगा नगर, भनपुरी, रायपुर
(छत्तीसगढ़)

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