रविवार, 11 दिसंबर 2011

शशांक मिश्र भारती की बाल कविताएँ - पेड़

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अनेक पेड़

मेरे घर में सुन्‍दर-सुन्‍दर

हैं अनेक पेड़,

छोटे-बड़े रंग-बिरंगे

फूलों वाले पेड़।

 

कोई छोटा कोई बड़ा है

कोई गिरा कोई पड़ा है,

हैं बहुत से पेड़

मनमाहक ये पेड़।

 

लू हो या हो जाड़ा-

हम सबसे प्रिय नाते,

ना ही हम घृणा रखते

सभी हैं मुझको भाते।

--

बड़ा या छोटा सा पेड़

अपने घर एक लगाओ

सभी प्‍यार से पेड़,

कम अधिक जगह देखकर

छोटा या बड़ा सा पेड़।

 

किन्‍तु सभी के घर में

एक अवश्‍य ही पेड़,

यह हमारे जीवन दाता हैं

ग्रीष्‍म-लू के त्राता हैं,

गरमी से राहत देकर

खुशहाली के भ्राता हैं,

 

धरा पे हरियाली लाकर

उसमें नमी बढ़ाते हैं,

मौसम को अनुकूल बना

वर्षा खूब करवाते हैं,

इनकी सुन्‍दर डाली पर है-

बनाती चिड़िया सुन्‍दर घर,

 

कोयल अच्‍छा गीत सुनाती

बैठकर इन्‍हीं पेड़ों पर,

इसीलिए प्‍यार से बच्‍चों-

लगाकर डटकर पेड़,

अपने घर में एक लगाओ

बड़ा या छोटा सा पेड़।

--

सम्‍पर्कः-हिन्‍दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर-242401 उ0प्र0 9410985048

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