मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - परिवर्तन

परिवर्तन

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“मदन तूँ इतना निराश क्यों है” ? मोहन ने पूछा। मदन बोला “घर की बात है। कुछ समझ में नहीं आता क्या करूँ”। मोहन बोला “ चलो उस पेड़ के नीचे चबूतरे पर बैठते हैं। हो सकता है कि मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर सकूँ”।

दोनों चबूतरे पर बैठ गए मदन बोला “क्या बताऊँ यार शादी के बाद से मम्मी के व्यवहार में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले मम्मी ऐसी नहीं थीं। बहू के आते ही मम्मी बदल गईं।

मम्मी मेरी पत्नी से नाखुश तो रहती ही हैं। साथ ही मुझसे भी नाराज रहने लगी हैं। ऐसा लगता है कि मैं उनका बेटा ही नहीं हूँ और न ही मेरी पत्नी उनकी कुछ लगती है। ऐसा जान पड़ता है कि मैं मम्मी के लिए पराया होता जा रहा हूँ। मेरे प्रति उनका यह परिवर्तन समझ में नहीं आता। और इसको लेकर ही मैं बहुत दुखी हूँ।

मोहन बोला “यह परिवर्तन लाजिमी है। वस्तुतः यह मानव स्वभाव से जुड़ा प्रश्न है। मान लीजिए कि तुम्हारी कोई बहुत प्रिय चीज है। जो बर्षों से तुम्हारे एकाधिकार व देख रेख में रही है। अब यदि तुम्हें लगता है कि धीरे-धीरे कोई उसे अपने अधिकार में ले रहा है। वह किसी दूसरे के देख-रेख में जा रही है। वह तुमसे दूर होती जा रही है। तो क्या तुम्हें दुख नहीं होगा ? क्या तुम्हारे व्यवहार में परिवर्तन नहीं आएगा ?

शादी के पहले जो बेटा मम्मी-मम्मी कि रट लगाये रहता है। शादी के बाद उसे मम्मी से बातचीत करने का, उनके पास बैठने का भी समय नहीं मिलेगा तो मम्मी के व्यवहार में परिवर्तन होना उचित नहीं है क्या ?

शादी के पहले बेटा हर दुख-दर्द, भूँख-प्यास आदि माँ से कहता है। कहाँ जाना है ? कहाँ नहीं जाना है। मम्मी यह करना है, वह करना है कहने वाला और बाहर से आकर मम्मी के पास पहुँचने वाला बेटा जब मम्मी से बिना बताए घर से जाने लगता है और आने पर सीधे घर में पहुँच जाता है। तो अपने ही घर में मम्मी भी क्या पराया महसूस नहीं करती होगी ?

मदन यह कहानी घर-घर की है। इस परिवर्तन का कारण यही है। और नासमझ लोग माता-पिता को दोषी मानकर उनसे लड़ने-झगड़ने लगते हैं। सोचो तब क्या बीतती होगी उनके दिल पर ?

कुलमिलाकर यह परिवर्तन भी माँ के प्रेम के कारण ही है। इसलिए ही गुरुदेव ने माता को दोष देने वाले को मूर्ख कहा है- ‘दोष देंय जननी जड़ जेई, जो गुर साधु सभा नहि सेई’।

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डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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(चित्र- अमृतलाल वेगड़ की कलाकृति)

2 blogger-facebook:

  1. सार्थक लघु कथा .... परिवर्तन तो लाज़मी है पर जब माँ पर दोष देना शुरू कर देते हैं तो ज्यादा अफसोस होता है

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  2. शादी के बाद माँ, बाप, बेटा एवं नव नवेली दुल्हन अर्थात सभी की जीवन शैली में परिवर्तन आता ही है | अगर सभी इसका एहसास पहले से ही कर लें तो घर में हमेशा सुख शान्ति का वास बना रहेगा |

    उत्तर देंहटाएं

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