बुधवार, 16 मई 2012

प्रियंका सिंह की कविता - भूले तो कुछ नहीं हैं

 

भूले तो कुछ नहीं हैं याद आए तो बहुत हैं,

हंसने को हंस रहे हैं, चिंताएं तो बहुत हैं।

 

इनमें से काम की हैं कितनी खुदा ही जाने,

मेरी हथेलियों पर रेखाएं तो बहुत हैं।

 

पहने हुए हैं तन पर हम जोगिया भले ही

मन में दबी-दबी सी इच्‍छाएं तो बहुत हैं

 

कब अग्‍नि से गुजर कर दी राम की परीक्षा

इससे गुजरने वाली सीताएं तो बहुत हैं॥

 

रहना सदा बिरह में, जीना सदा मिलन में

मीरा है एक अकेली राधाएं तो बहुत हैं।

 

मौके जो हमने पाकर खोए हैं जिन्‍दगी में

दो-चार ही हैं, लेकिन पछताएं तो बहुत हैं।

 

गिनती की जो भी खुशियां बख्‍शी हैं जिन्‍दगी ने

इनसे ही अपने जी को बहलाएं तो बहुत हैं

 

किस्‍मत की ये लकीरें इक रोज लेंगी ये करवट

विश्‍वास कम है, लेकिन आशाएं तो बहुत हैं॥

 

देखें, कटेगा कैसे ये चार दिन का रस्‍ता

छोटे से इस सफर में बाधाएं तो बहुत हैं

 

बोली वही जो निकले दिल से दिलों में उतरे

वैसे यहां चलन में भाषाएं तो बहुत हैं

 

दस-बीस ही हैं जिनको शेरों में ढाल पाए

अश्‍कों में ढलने वाली पीड़ाएं तो बहुत हैं॥

11 blogger-facebook:

  1. बेनामी4:27 pm

    priyanka g apki kavita bahut achhi hai....

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  2. i like the poem ... its really a good one.

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  3. shweta dubey (banasthali vidyapith)11:10 am

    di apki kavita ke ek ek shabd me nayi seekh hai. aap hamesha aise hi aage bade... wish you all the very best.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी11:20 am

    so nice poem,priyanka ji........

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेनामी11:23 am

    very nice poem

    उत्तर देंहटाएं
  6. monikachoudhary3:09 pm

    BAHUT ACHA HAI AAGE BHI AISE HI LIKHTE RAHNAAAAAAAA

    उत्तर देंहटाएं
  7. dil ko chhu jati hai kuch hi bate , yu tou Rachanakar pe kavitaye bahut hai ....

    उत्तर देंहटाएं
  8. di aap ki kavita ekdam sahi hai
    aap ne badi rahsya may kavita likhi ha
    jiske liye bahut-bahut subhkamnaye aap ko

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  10. Priyanka11:12 am

    THANK U ALL MY FRIENDS..............

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  11. अच्छी कविता है, शायराना अंदाज में लिखी गई|

    उत्तर देंहटाएं

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